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बाजार में मौजूद है कई गुणा करेंसी, प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर की कार्रवाई की मांग! - India Speaks Daily: Pressing stories behind the Indian Politics, Legislature, Judiciary, Political ideology, Media, History and society.

बाजार में मौजूद है कई गुणा करेंसी, प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर की कार्रवाई की मांग!



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भाजपा सरकार की नोटबंदी की चर्चा अपनी चरम पर है। समूचा विपक्ष मोदी सरकार के इस फैसले से नाखुश नजर आ रहा है, वही सोशल मीडिया में प्रधानमंत्री के इस साहसिक कदम को काले धन पर सर्जिकल स्ट्राइक का नाम दिया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक अब तक लगभग एक लाख करोड़ से भी ज्यादा धन बैंकों में जमा हो गया है लेकिन अभी भी बाजार में कई गुणा करेंसी मौजूद है।

मौलिक भारत ट्रस्ट ने प्रधानमंत्री का ध्यान इस तरफ केंद्रित करने हेतु पत्र लिखकर की कार्रवाई की मांग की है। मौलिक भारत ने अपने पत्र में लिखा है कि रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया के अनुसार देश में कुल 17.4 लाख करोड़ रुपयों की करेंसी जारी की हुई है किन्तु जिस प्रकार निरंतर लोगो के पास कालाधन होने की सूचनाएं उनके पास आ रही हें, उसके अनुसार बाज़ार में इससे कई गुना करेंसी मौजूद है। हमारे इस निष्कर्ष के निम्न कारण हैं :

* देश में 80 से 95 प्रतिशत तक व्यापारिक गतिविधियां और लेनदेन नकद में ही होती हें।

* देश में 50 प्रतिशत तक औधोगिक गतिविधियो के लेनंदन नकद में हो रहे हें।

* देश में निर्माण एवं जमीन की खरीद/ बिक्री और सोने, चांदी, हीरे जवारहत का भी अधिकांश व्यापार नकद में ही होता है।

* ड्रग्स, लॉटरी, शराब, सट्टा, मटका, कमेटी, आतंक, नक्सली, विदेशी फण्ड लेने के लिए अधिकृत एनजीओ,विदेशी मुद्रा के अवैध लेनदेन, चीन से आयात, हवाला, आंगडियो द्वारा अन्तर्देशीय हवाला, स्मगलिंग,जुआ, डब्बा ट्रेडिंग, अवैध अस्त्रों की बिक्री आदि का 80 से 100 प्रतिशत लेनदेन नकद में होता है। ऐसे में जबकि इन व्यापारों में लाखों करोड़ रुपयों के लेनदेन हो रहे हें ऐसे में मात्र 17.4 लाख करोड़ रुपयों की करेंसी से देश की अर्थव्यवस्था का संचालन संभव ही नहीं। यह गहन जांच का बिषय है कि कैसे कई गुना करेंसी अवैध रूप से देश में चलायीं जा रही है।

* देश में होने वाले नकद आयत में बिचोलियों द्वारा हज़ारों फर्जी/बोगस कम्पनियों को बनाकर बिलिंग की जाती है और कुछ महीनो बाद वो कम्पनियों काम करना बंद कर देती हें। यह सरकारी अधिकारियों की मिलीभगत के बिना होना संभव नहीं है। इसकी गहन जांच करा दोषियों के खिलाफ उचित क़ानूनी कार्यवाही जरूरी है।

* देश में अधिकांश घरों/ प्रतिष्ठानों में किरायेदार नकद ही किराया देते हें और मकान मालिक टैक्स चोरी करते हें, इस पर रोक लगाने के प्रभावी कदम उठाये जाएं।

सिर्फ इतना ही नहीं मौलिक भारत ने धन वितरण में हो रही अनियमिताओं और जसाधारण को होने वाली असुविधा पर भी ध्यान आकर्षित करते हुए लिखा कि:

* करेंसी बदलने की प्रक्रिया धीमी होने से किसानों को फसल बुआई के लिए बीज और खाद आदि खरीद में होने वाली परेशानी को दूर करने के लिए तुरंत कोई वैकल्पिक व्यवस्था करने हेतू राज्य सरकारों को निर्देश दिए जाएं। साथ ही बेंको के बाहर खड़ी जनता को उचित सुविधाएं और सुरक्षा देने के निर्देश भी दिए जाएं। इस प्रक्रिया में किसी भी स्थिति में कोई भी जनहानि न हो यह सुनिश्चित किया जाये।

* देश की सीमाओं पर स्थितियां चुनोतिपूर्ण हें और सभी सैन्य व अर्ध सैन्य बलों के जवान खासे दबाब में हें। ऐसे में यह सुनिश्चित किया जाए कि करेंसी के बदलाब की प्रक्रिया के बीच उनके परिवारों को कोई परेशानी का सामना न करना पड़े।

* करेंसी के बदलाब में डाकघरों, सहकारी बेंको एवं निजी बेंको द्वारा अनियमितताओं की सैकड़ो शिकायतें आ रही हें। इनमें करेंसी बदलाब की प्रक्रिया पारदर्शी हो, इसके सभी उपाय किये जाएं अन्यथा करेंसी बदलने के काम से इनको अलग कर दिया जाए। बिशेष रूप से राज्य सरकारों के कर्मचारियों और पुलिस के अनेक लोगों द्वारा भी जिनके पास पर्याप्त मात्रा में कालाधन है, जानबूझकर अराजकता और अव्यवस्था फैलाई जा रही है। इसकी गहरी जांच और कार्यवाही की जाए।



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