The Hindu अखबार और राजदीप सरदेसाई जैसे पत्रकार हथियार दलाल जेम्स मिशेल की तरफदारी में आखिर क्यों जुटे हैं ?

Posted On: May 3, 2016

अंग्रेजी अखबार The Hindu और The Telegraph सहित नामी पत्रकार राजदीप सरदेसाई,बरखा दत्त आदि AgustaWestland Helicopter scam में साफ तौर पर हथियार दलाल और अभियुक्त जेम्‍स क्रिश्‍चयन मिशेल की तरफदारी में जुटे हुए हैं! आखिर क्या वजह है कि एक हथियार दलाल और अगस्ता वेस्टलैंड मामले में बिचैलिए जेम्‍स क्रिश्‍चयन मिशेल के लिए इन्हें मैदान में उतरना पड़ा है!

द हिंदू ने तो बकायदा जेम्‍स क्रिश्‍चयन मिशेल का साक्षात्कार( http://www.thehindu.com/opinion/interview/interview-with-james-christian-michel-alleged-middleman-in-vvip-chopper-deal/article8524561.ece) ही छाप दिया, जबकि जेम्स इस मामले में न केवल मुख्य अभियुक्त है, बल्कि उसके खिलाफ गैरजमानती वारंट से लेकर रेड काॅर्नर नोटिस तक जारी है!

ऐसा भी नहीं है कि The Hindu ने घोटाले को खोलने के उद्देश्य से जेम्स का साक्षात्कार लिया हो! बल्कि इस साक्षात्कार को पढ़ कर साफ लगता है कि यह इटली की अदालत में घूसकांड की ड्राइविंग फोर्स सिग्नोरा गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, कांग्रेस नेता अहमद पटेल व आॅस्कर फर्नांडिस को निर्दोष दिखाने के लिए मुख्य अभियुक्त जेम्स मिशेल का बयान है, जिससे देश की जनता को गुमराह किया जा सके! इस साक्षात्कार में जेम्स को भी पीडि़त दिखाने का प्रयास किया गया है, जो पूरी तरह से एजेंडा जर्नलिज्म का हिस्सा लगता है!

यह साफ तौर पर PressTitutes पत्रकारिता है, जिसमें रिपोर्टिंग से अधिक घोटाले में घिरे पूर्व यूपीए सरकार और कांग्रेस नेतृत्व के पक्ष में दलाली की कोशिश को दर्शाता है! द हिंदू के अलावा द टेलीग्राफ और कांग्रेस के बेहद नजदीक रहे मशहूर पत्रकार राजदीप सरदेसाई और बरखा दत्त द्वारा बार-बार यह कहा जा रहा है कि जेम्‍स क्रिश्‍चयन मिशेल ने मोदी सरकार को जब यह प्रस्ताव दिया है कि वह भारत आकर जवाब देने को तैयार है तो फिर सरकार उसे भारत बुलाकर उसका बयान दर्ज क्यों नहीं कर रही है? यह मीडिया हाउस और ये पत्रकार बार-बार जेम्‍स क्रिश्‍चयन मिशेल के एक संदिग्ध पत्र का उल्लेख भी कर रहे हैं, जो कि इनके अनुसार प्रधानमंत्री मोदी को जेम्स ने इस बारे में लिखा है! जेम्स के आधे-अधूरे हस्ताक्षर वाला ऐसा कोई पत्र प्रधानमंत्री कार्यालय के पास पहुंचने की सूचना नहीं है तो फिर ये पत्रकार मुख्य अभियुक्त व हथियार दलाल पर अपने देश के प्रधानमंत्री कार्यालय से अधिक विश्वास क्यों कर रहे हैं? स्वाभाविक है इन्हें प्रधानमंत्री कार्यालय से यह पत्र तो मिला नहीं है, तो फिर ये लोग जेम्स मिशेल के लगातार संपर्क में रहकर झूठ बोलने और अपनी ही सरकार पर जेम्स को सेफ पैसेज देने के लिए दबाव क्यों बना रहे हैं?

दरअसल द हिंदू, द टेलीग्राफ, राजदीप सरदेसाई, बरखा दत्त आदि की पूरी कोशिश यह है कि जेम्स स्वयं भारत आए और यह बयान दे दे कि अगस्ता वेस्टलैंड में सिग्नोरा गांधी, जिसे भारत की जनता से कमोबेश सोनिया समझ ही लिया है- और कांग्रेस लीडरशिप का इस घूसकांड से कोई वास्ता नहीं है! जेम्स का यह बयान देते ही ये पत्रकार व मीडिया हाउस कांग्रेस लीडरशिप को बचाने के लिए 24 घंटे अखबार व न्यूज चैनलों के जरिए कोलाहल का प्रदर्शन करेंगे! संभवतः इससे जांच एजेंसी पर जेम्स सहित कांग्रेस लीडरशिप से पूछताछ न करने का दबाव उत्पन्न हो जाएगा और यदि मोदी सरकार ने इसकी कोशिश भी की तो यही पत्रकार व मीडिया हाउस इसे एक बदले की राजनीति के रूप में प्रमोट करेंगे! जबकि अभी यह पूरा मामला इटली की अदालत द्वारा खोला गया है, इसलिए ये चाहकर भी इसे बदले की राजनीति के रूप में पेंट नहीं कर पा रहे हैं! लेकिन इनकी पूरी कोशिश घोटाले की आरोपी सोनिया गांधी या यूपीए सरकार को बचाने और घोटालेबाजों पर कार्रवाई तेज करने वाली मोदी सरकार पर हमला करने की है, जो इन अखबरों व पत्रकारों की पत्रकारिता से अभी भी परिलक्षित हो रहा है!

द हिंदू अखबार ने तो विदेश में बैठे जेम्स का साक्षात्कार तक ले लिया ताकि घोटाले की जांच कराने वाली मोदी सरकार पर बदले की राजनीति का आरोप लगाया जा सके और घोटाले में संलिप्त यूपीए सरकार व कांग्रेस नेतृत्व को इस आरोप से बाहर निकाला जा सके! स्वयं द हिंदू अखबार भी इस घूसकांड में फंसा दिखता है! जेम्स मिशेल के मोबाइल नंबरों की जांच में कई पत्रकारों का नंबर मिला है, जिसमें एक नंबर द हिंदू अखबार के रक्षा मंत्रालय कवर करने वाले पत्रकार राजू संथानम का है!

राजू संथानम से प्रवर्तन निदेशालय(ED) ने पूछताछ भी किया है! सूत्र बताते हैं कि उससे मिली जानकारी में द हिंदू के मुख्य संपादक तक जांच की आग पहुंच रही है! यही नहीं, उसने कई बड़े संपादकों और पत्रकारों का नाम लिया है, जिसे अगस्ता वेस्टलैंड की डील से फायदा मिला है! इसमें जेम्स मिशेल द्वारा इन पत्रकारों को इटली घुमाने से लेकर करीब 45 करोड़ रुपए घूस(http://www.indiaspeaksdaily.com/agustawestland-chopper-manufacturer-finmeccanica-managing-the-indian-media-by-six-million-euros/) में देने तक का आरोप है!

जेम्स के जरिए पत्रकारों व मीडिया हाउस के चालों को मोदी सरकार भी समझ रही है! इसलिए केंद्र सरकार ने बयान जारी कर अप्रत्यक्ष रूप से यह बता दिया है कि कुछ पत्रकारा व मीडिया हाउस अगस्ता मामले में संलिप्त अपराधियों को बचाने के प्रयास में जुटे हैं। 29 जून को पीआईबी द्वारा प्रेस विज्ञप्ति को अधिकांश मीडिया हाउस ने लगभग दबा दिया, लेकिन उसमें साफ लिखा था- “जेम्‍स क्रिश्‍चयन मिशेल द्वारा 08.11.2015 को सीबीआई व ईडी द्वारा भारतीय धरती पर सवाल पूछने के दिए गये कथित प्रस्‍ताव पर केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री द्वारा कोई कार्रवाई न करने पर सवाल उठाकर कुछ लोगों ने वांछित अपराधी का साथ दिया है। कानून की परिधि के बाहर किसी भी आरोपी से किसी तरह की समझ रखना या समझौता करना आपराधिक कृत्‍य है।”

सरकार आगे कहती है, “जेम्‍स क्रिश्‍चयन मिशेल भारतीय कानून व जांच एजेंसियों का एक वांछित अपराधी है। उसकी गिरफ्तारी और प्रत्‍यावर्तन कर भारत लाने के लिए सभी कानूनी साधनों का प्रयोग किया जा रहा हैं। मिशेल को तरह-तरह के बहाने तलाशने की बजाय अपने आपको भारतीय कानूनी व्‍यवस्‍था के समक्ष समर्पण कर देना चाहिए। वह वास्तव में एक आरोपी हैं। देश इस बात के प्रति दृढ़प्रतिज्ञ हैं कि मिशेल और उसके सहयोगियों के खिलाफ कानून अपना काम करेगा।” सरकार के अनुसार, “कुछ लोग जो PM Modi को अपने उद्देश्‍यों में सफल होते नहीं देखना चाहते हैं वे ही इस तरह की भ्रामक बातें फैला रहे हैं!”

स्पष्ट है कि Modi सरकार के इस कठोर बयान को मीडिया हाउसों द्वारा दबाने का मकसद यही था कि कि सरकार इसमें साफ तौर पर कह रही है कि जेम्स एक आरोपी है, उससे कानून के जरिए ही निपटा जाएगा, इसलिए जो लोग जेम्स के पक्ष में बयानबाजी कर रहे हैं, वो साफ तौर अगस्ता वेस्टलैंड के एक बिचैलिए और मुख्य अभियुक्त को बचाने का प्रयास कर रहे हैं! द हिंदू, द टेलीग्राफ, राजदीप सरदेसाई, बरखा दत्त आदि की पत्रकारिता यही करती दिख रही है!

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