बिहार के दूसरे दसरथ मांझी की कहानी -35 साल से एक नदी पर लाखों लोगों की सुविधा के लिए खुद बना रहे हैं बांस का पुल!

Posted On: July 6, 2016

विभूति कुमार रस्तोगी:

बीते 35 साल से एक 27 गांव के साथ साथ भारत-नेपाल को जोड़ने वाले सड़क के बीच बहने वाली नदी पर अपने खर्चे से पुल बनाते आ रहे हैं।vपहली बार सन् 1982 में पुल बनाना तब शुरू किया जब एक बूढी अम्मा नदी पार करने के दौरान नदी और उसके दल दल में फंस गई और बचने के लिए जोर जोर से बचाओ बचाओ की आवाज लगा रही थी। तभी उस दौरान 11वीं के छात्र और 16 वर्षीय बालक कृष्णनंदन उधर गुज़र रहा था। बचाओ बचाओ की आवाज सुनकर 16 वर्षीय कृष्णनंदन बिना कुछ सोंचे-समझे बूढी अम्मा को बचाने के लिए नदी में छलांग लगा दिया और सकुशल बूढी अम्मा को भारी मशक्कत के बाद नदी से बाहर निकाला। नदी से बाहर निकलने के बाद बूढी अम्मा ने 16 वर्षीय कृष्णनंदन को दुआ दी और कहा सरकार यहाँ पुल भी नहीं बनाती।

बूढी अम्मा की दुआ ने कृष्णनंदन के जीवन की दिशा ही बदल दी। कृष्णनंदन नदी पर पुल बनाने के लिए उस 16वर्ष की अवस्था में गाँव के मुखिया से लेकर विधयाक और सांसद तक के दरबार में चक्कर लगाये लेकिन किसी ने उस दौरान सुध नहीं ली तब कृष्णनंदन ने खुदी नदी पर पुल बनाने की ठान ली और बांस काटकर पहली बार नदी पर बांस के पुल का अपने पैसे और अपने श्रम से अकेले ही 100 मीटर लंबे बांस के पुल का निर्माण कर दिया। पहली बार 80 बांस से पुल का निर्माण हुआ था। जिसपर 1982 में 2000 खर्च हुआ था।

बिहार में बाढ़ आने पर जब कृष्णनंदन का बनाया बांस का पुल पानी के जब बह जाता है तो कृष्णनंदन फिर पुल बनाते हैं ऐसा करते करते कृष्णनंदन का उम्र 16 साल से 51 साल हो गया और नदी पर पुल बनाते बनाते कृष्णनंदन को 35 साल हो गया। 35 साल से कृष्णनंदन लगातार बिहार सरकार से पुल बनाने की मांग भी कर रहे हैं लेकिन आज तक बिहार सरकार ने सुध तक नहीं ली। 11 साल से बिहार में विकास पुरुष नितीश कुमार की भी सरकार है और कृष्णनंदन पुल बनाने को लेकर नितीश कुमार के जनता दरबार में भी नितीश से मिलकर सारी बात बता चुके हैं फिर भी कुछ नहीं हुआ। कृष्णनंदन को गांव के मुखिया से लेकर विधायक, सांसद और बिहार के राज्यपाल तक इस अनुकरणीय और साहसिक कार्य के लिए प्रशंशा पत्र दे चुके हैं।

कृष्णनंदन की उम्र 51 साल हो चुका है और पुल बनाने के जूनून में कृष्णनंदन ने शादी तक नहीं की और सामाजिक कार्य के लिए पूरा जीवन इस उम्मीद में अविवाहित रहने का फैसला किया कि कहीं शादी करने के बाद पत्नी और बच्चे उन्हें इस काम से उनका मुंह न मोड़ ले। अब कृष्णनंदन को करीब 100 मीटर पुल बनाने में 125 बांस और पूरा खर्च करीब 12 हज़ार तक आ रहा है। कृष्णनंदन के जूनून ने उन्हें आर्थिक तंगी की ओर धकेल दिया है भाई ने खुद से अलग कर दिया है। अब अविवाहित कृष्णनंदन कहीं खाते हैं कहीं सोते है लेकिन फिर भी पुल बनाने का जूनून 35 सालों से बना हुआ है।

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