केजरीवाल ने पत्रकारों पर की कार्रवाई, रवीश कुमार के NDTV का टीवी स्क्रीन अभी भी रंगीन है!

असहिष्णुता देखनी है तो अरविंद केजरीवाल की देखिए। दैनिक जागरण के ब्यूरो चीफ राजकिशोर जी ने ट्वीटर पर केजरीवाल सरकार के Odd-Even फार्मूले पर सवाल उठाया था। केजरीवाल ने पहले उन्हें ट्विटर पर अपमानित किया और बाद में आम आदमी पार्टी ने जागरण के 6 रिपोर्टों को अपने WhatsApp ग्रुप से निकाल दिया!

दिल्‍ली सरकार के इस WhatsApp ग्रुप में दिल्‍ली सरकार कवर करने वाले पत्रकार और मीडिया हाउसों के ब्‍यूरो प्रमुख व स्‍थानीय संपादक जुड़े हुए हैं। सरकार अपनी अपडेट इस ग्रुप में भेजती है। केजरीवाल के इस कदम का मतलब है कि अब वह दिल्‍ली सरकार का कोई भी अपडेट दैनिक जागरण अखबार को नहीं भेजेगी। यही नहीं, जब तक आपसी समझौता नहीं हो जाता, तब तक शायद दिल्‍ली सरकार जागरण को विज्ञापन भी जारी नहीं करेगी। सुना तो यह भी है जागरण के सभी पत्रकारों के दिल्ली सचिवालय में प्रवेश पर भी पाबंदी लगा दी गई है!

असहिष्णुता पर अखलाक के घर से कन्हैया के विश्वविद्यालय तक ‘तीर्थयात्रा’ कर आए Arvind Kejariwal का असली स्टालिनवादी चेहरा सामने आने और अपनी ही पत्रकार बिरादरी के अपमान के बावजूद सभी क्रांतिकारी पत्रकार चुप हैं, रवीश कुमार का टीवी स्क्रीन अभी भी रंगीन है! देशद्रोह मामले में जेएनयू के छात्र अध्‍यक्ष कन्‍हैया कुमार पर कार्रवाई के विरोध में NDTV का स्‍क्रीन काला करने वाले रवीश कुमार दिल्‍ली सरकार के मामले में शायद ही ऐसा कर पाएं, क्‍योंकि पांच साल के लिए केजरीवाल सरकार ने करीब 2500 करोड़ का जो विज्ञापन बजट निर्धारित किया है, उसमें भी तो हिस्‍सेदारी लेनी है!

देश विरोधी नारा लगाने वाले कन्हैया के पक्ष में जिन पत्रकारों ने ‘देश पर आपातकाल लागू है’- कह कर रैली निकाला था, वो आज आम आदमी पार्टी द्वारा पत्रकारों पर हुए हमले पर खामोश हैं!

सोचिए यदि यही मोदी सरकार करती तो देश में आपातकाल की पूरी पटकथा केजरीवाल-राहुल-नीतीश-येचुरी आदि के साथ मिलकर राजदीप-बरखा-रवीश-सारिका-शेखर गुप्ता-अभिज्ञान-ABP आदि कब का लिख चुके होते और सुबह से ही गला फाड़ कर चिल्ला रहे होते! आज स्थिति यह है कि कल हुई इस घटना का ज्यादातर लोगों को पता ही नहीं है! इसी को कहते हैं पत्रकारों द्वारा सत्ता के लिए दलाली!

Web Title: Arvind Kejriwal government taken action on 6 dainik jagran journalist

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1 Comment on "सिब्बल-चिदंबरम जैसे नेता, जनता की मेहनत से सैलरी लेकर अपनी पार्टी व क्लाइंट का मुकदमा लड़ते हैं! सुप्रीम कोर्ट इस पर रोक कब लगाएगा?"

  1. महेन्द्र | November 29, 2017 at 9:36 pm | Reply

    बसे तीनों चोर है

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