राजनीति के मायने बदलते आज के नेता, खून के बदले खून की राजनीति देश के लिए घातक !

Posted On: July 22, 2016

उत्तर प्रदेश भाजपा उपाध्यक्ष दयाशंकर सिंह की बसपा सुप्रीमो मायावती के खिलाफ की गई अपमानजनक टिप्पणी पर राज्यसभा में खूब हंगामा हुआ. मायावती समेत तमाम दलों के नेताओं ने इस बयान को लेकर केंद्र सरकार और भाजपा को आड़े हाथों लिया. देखने में आ रहा है कि जैसे ही देश में कहीं भी चुनाव होते है उससे पहले भाजपा नेताओं के सुर बदलने लगते हैं. भाजपा के लिए जो कहावत हमेशा लिखी जाती है कि यह पार्टी अपने भूतकाल से कुछ नहीं सीखती फिर चरितार्थ हो गयी है.

भाजपा के वरिष्ठ नेता से इस तरह की भाषा की उपेक्षा नहीं कर सकते. हालाँकि भाजपा ने त्वरित कारवाही करते हुए दयाशंकर को पार्टी से निष्कासित करने का फैसला लिया है. अरुण जेठली और भाजपा के कुछ और वरिष्ठ नेताओं ने इस टिप्पणी पर खेद भी जताया ! जो एक तरह से पार्टी और उनके सदस्यों कि नैतिक जिम्मेदारी भी बनती है. दयाशंकर की इस अभद्र टिप्पणी का कोई भी समर्थन नहीं करेगा लेकिन बसपा प्रमुख मायावती ने जिस तरह पलटवार करते हुए उनकी बेटी और परिवार की तरफ उंगली दिखाई वह भी इसी अभद्र भाषा की बदले की पराकाष्ठा थी, दयाशंकर के निजी बयान को उनके परिवारवालों के साथ जोड़ने पर मायावती जी पर किसी ने अंगुली नहीं उठाई.

भारतीय राजनीति में विवादित बयानों का भरा पूरा पुराण है लेकिन आज तक न निष्कासन हुआ न प्रतिरोध, बात आई-गयी हो कर रह गयी. आइये आपको बताता हूँ किसने क्या कहा और क्या किया? इमरान मसूद के बोटी बोटी वाले शर्मनाक बयान पर क्या कांग्रेस ने उनको पार्टी से निष्कासित किया! नहीं ? केजरीवाल ने संकट के समय अपने कितनें विधायकों का दामन छोड़ा ! नहीं ? लालू, नितीश,मायावती आदि ने आज तक अपने बेलगाम नेताओं पर कार्यवाही की ! नहीं? साउथ की महिलाओं का रंग भले ही सांवला होता है, मगर वो सेक्सी होती हैं,शरद यादव के इस बयान पर राज्यसभा में कितनो ने माफ़ी मांगी ? अली अनवर के इस बयान को अभी ज्यादा दिन नहीं हुए जब स्मृति ईरानी के लिए उन्होंने इन शब्दों का प्रयोग किया कि अब कपड़ा मंत्रालय मिला है, मैडम अपना तन ढक सकेंगी. जेएनयू में देश विरोधी नारे लगाने पर कितने वामपंथियों ने कन्हैया कुमार का साथ दिया था .आज भी उनके खिलाफ कोई कुछ नहीं बोला न कोई कार्यवाही हुई? मुलायम सिंह यादव का बयान कोई भूल सकता है क्या ? हां जी क्यों नहीं? भारत में सब कुछ भुलाया जा सकता है, सेक्युलर के नाम पर.

लालू यादव लाल, मणि सेन डेका और आज़म खान जैसे नेताओं ने कैसी भद्र टिप्पणियां की थीं, उसका हिसाब न राज्यसभा ने माँगा और न किसी नेता ने इसके बारे में टिप्पणी की. केस दर्ज होने की बात तो दूर की कौड़ी लगती है. जहाँ तक पैसे लेकर चुनाव का टिकट देने का मामला है मायावती की बहुजन समाज पार्टी से बागी हुए स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा कि मायावती भी माल्या की तरह देश का पैसा लेकर भागने की फिराक में हैं,मायावती उसी को आगामी विधान सभा का टिकट देंगी जो उसका मूल्य चुकाएगा. मायावती पर आरोप लगते हुए वे यहाँ तक बोले जिला पंचायत के चुनावों में भी टिकटों की खरीद फरोख्त की गयी.

मायावती के समर्थकों ने बदले की भावना से जो कृत्य किये है उसे कोई भी समाज स्वीकार नहीं करेगा.कुत्सित मानसिकता की राजनीति से किसका भला होगा इसका जवाब न किसी के पास है न दे सकता है, मायावती समर्थकों ने जिस तरह से एक बारह साल की लड़की पर अभद्र टिप्पणियाँ की है ये वही लोग हैं जो नवरात्रों में कन्याओं के पैर धोने और पूजने का आडम्बर करते हैं, एक सभ्य समाज में इस तरह की घटनायें वाकई शर्मनाक और बेहद निंदनीय हैं. महिलाओं पर टिप्पणी पर सलमान खान को आड़े हाथों लेने वाला महिला आयोग और समाज सुधारकों ने क्यों मुंह सिल रखा है पता नहीं?

दयाशंकर द्वारा की गयी अभद्र टिप्पणी पर कोई सफाई नहीं हो सकती लेकिन जो बसपा सुप्रीमो समर्थकों ने किया वो भी अपराध की इसी श्रेणी में आता है तो क्या मायावती जी अपने इन कार्यकर्ताओं पर वही कार्यवाही करेंगी जो बीजेपी ने किया.

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