लातूर जल संकट: सूखा तो हर साल आता है लेकिन मीडिया इसी साल आई है!

जो बीते सालों में नहीं हुआ वह अब हो रहा है! बात करते हैं महाराष्ट्र के सुख ग्रस्त क्षेत्रों की। मुंबई और उससे सटे पुणे में इन दिनों ग्रामीण परिवेश के लोगों की हलचल साफ़ देखी जा सकती है। अप्रैल से लेकर सितंबर तक लातूर जिला गांवों से लोग पलायन कर मुंबई जैसे महानगरों की तरफ अपना रुख करते हैं। ये लोग किसी न किसी रूप में खेती-बाड़ी से जुड़े हैं, जो पानी के अभाव में पलायन करने को मजबूर हैं!

इस बार के सूखा पर लातूर में मीडिया का जमघट है। लातूर के लोगों का कहना है कि
‘सूखा हर साल आता है लेकिन मीडिया इसी साल आई है।’ इनमें से कुछ लोग पिछले कई सालों से महानगरों में जीविकोपार्जन हेतु आते हैं और मानसून के आने के बाद वापस चले जाते हैं। प्रश्न यह उठता है कि क्यों पिछली सरकारों ने इनकी ओर ध्‍यान नहीं दिया और इनके लिए प्रयास नहीं किया ?

‘सबका साथ-सबका विकास’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सिर्फ नारा नहीं है अपितु वह इसको क्रियान्वित करने का भी प्रयास कर रहे हैं। लातूर में ट्रेनों के द्वारा पानी पहुंचाना इस बात का सूचक है कि केंद्र की मोदी सरकार और महाराष्‍ट्र की फर्णवीस सरकार मिलकर इस सूखे के खिलाफ राहत पहुंचाने में जुटे हैं।

देश में गरीब से गरीब तबके को मूलभूत सुविधायें प्रदान करने का प्रधानमंत्री का लक्ष्य है और वे इसे प्राप्त करने के लिए निरन्तर प्रयासरत हैं। लोगों को उनकी मिट्टी से जोड़े रखने के लिए सरकार द्वारा किया गया यह प्रयास सराहनीय हैं इसके लिए उनको साधुवाद!

Web Title: Drought crisis- Latur water train a positive step taken by PM Narendra Modi

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