शिवलिंग कुछ और नहीं बल्कि न्यूक्लियर रिएक्टर्स हैं!



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सौरभ गुप्ता। महाशिवरात्रि का पर्व आने वाला है ! इस पर्व के साथ सोशल मीडिया में कुछ ज्ञानी भी आएंगे मुफ्त का ज्ञान बांटने! शिवलिंग पर दूध की बर्बादी से अच्छा है किसी गरीब को दे दो! सुनने में बहुत अच्छा लगता है लेकिन हर हिन्दू त्योहार पर ऐसे संदेश पढ़कर थोड़ा दुख होता है, ऐसे सन्देश केवल हिन्दू त्योहारों में ही क्यों आते हैं? दीवाली पर पटाखे ना चलाएं, होली में रंग और गुलाल ना खरीदें, सावन में दूध ना चढ़ाएं, उस पैसे से गरीबों की मदद करें। लेकिन त्योहारों के पैसे से ही क्यों? ये एक साजिश है हमें अपने रीति-रिवाजों से विमुख करने की।

हम सब प्रतिदिन दूध पीते हैं तब तो हमें कभी ये ख्याल नहीं आया कि लाखों गरीब बच्चे दूध के बिना जी रहे हैं। अगर दान करना ही है तो अपने हिस्से के दूध का दान करिए और वर्ष भर करिए! कौन मना कर रहा है? शंकर जी को चढ़ाये जा रहे दूध ही पर आपत्ति क्यों? अगर आप को गरीबों की इतनी ही ज्यादा चिंता है तो अपने व्यसनों का दान कीजिये, दिन भर में जो आप सिगरेट, पान-मसाला, शराब, मांस अथवा किसी और क्रिया में पैसे खर्च करते हैं, उसको बंद कर के गरीब को दान कीजिये! इससे आपके इहलोक और परलोक दोनों सुधरेंगे स्वास्थ्य लाभ होगा वो अलग।

महादेव ने जगत कल्याण हेतु विषपान किया था! अनंतकाल से उनका अभिषेक दूध से किया जाता है। जिन महानुभावों के मन में अतिशय दया उत्पन्न हो रही है उनसे मेरा अनुरोध है कि एक महीना ही क्यों, वर्ष भर गरीब बच्चों को दूध का दान दें। घर में जितना भी दूध आता हो उसमें से ज्यादा नहीं सिर्फ आधा लीटर ही किसी निर्धन परिवार को दें। महादेव को जो दूध चढ़ाते हैं वो उन्हें ही चढ़ाएं। भगवान पर आस्था जबरदस्ती नहीं पैदा की जाती है यह मन की भावना है, किसी रोज सच्चे मन से बिना किसी लालसा और लालच से शिव मंदिर में दस मिनट आँखें बंद कर बैठ जायें, दावे के साथ कह सकता हूँ जिस परम आनंद की प्राप्ति आप करेंगे वो आपको संसार की किसी वस्तु से प्राप्त नहीं हो सकती ! ये हो गयी आस्था की बात अब इसके पीछे के वैज्ञानिक तथ्यों पर ध्यान दीजिये।

हिन्दू धर्म वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित है! यह विज्ञान भी मान चुका है, कभी भारत का रेडियोएक्टिविटी मैप उठा लें, तब हैरान हो जायेगें यह जानकर कि भारत सरकार के नुक्लियर रिएक्टर के अलावा सभी ज्योतिर्लिंगों के स्थानों पर सबसे ज्यादा रेडिएशन पाया जाता है! शिवलिंग पर जल और दूध इसलिए चढ़ाया जाता है ताकि उससे निकलने वाली रेडिएशन को शांत रखा जा सके शिवलिंग कुछ और नहीं बल्कि न्यूक्लियर रिएक्टर्स हैं!

महादेव के शिव लिंग पर दूध और पानी के अतिरिक्त बिल्व पत्र, आक, आकमद, धतूरा, गुड़हल, आदि भी चढ़ाये जाते हैं ये सभी न्यूक्लिअर एनर्जी सोखने वाले है। भगवान शिव को विष धारण करने वाला माना गया है! रेडिएशन रुपी जहर को ग्रहण करने के लिए महादेव संसार में शिवलिंगों के रूप साक्षात व्याप्त है! एक और तथ्य जो आपने समझा हो या नहीं शिवलिंगों में चढ़े पानी अथवा दूध को बहार निकलने वाली नलिका को लांघा नहीं जाता क्योंकि शिवलिंग के संपर्क में आने से पानी भी रिएक्टिव हो जाता जो आपको हानि पहुंचा सकता है लेकिन यही पानी नदियों के बहते पानी के साथ मिल औषधीय गुण ले लेता है।

हमारी परम्पराओं के पीछे कितना गहन विज्ञान छिपा हुआ है इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि भाभा एटॉमिक रिएक्टर का डिज़ाइन भी शिवलिंग की तरह ही है! जिस संस्कृति की कोख से हमने जन्म लिया है, वो तो चिर सनातन है। विज्ञान की परम्पराओं का जामा इसलिए पहनाया गया है ताकि वो प्रचलन बन जाए और हम भारतवासी सदा वैज्ञानिक जीवन जीते रहें।


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