कविता- तय कर लो, जाना किधर है…



तय कर लो, जाना किधर है. हिंदी कविता (प्रतीकात्मक तस्वीर साभार )
Ravi Kumar Bhadra
Ravi Kumar Bhadra

तय कर लो!
जाना किधर है
एक तरफ
काँटों का रास्ता पर
तरफ दूसरी उजाले
की चमक है
सोच लो चलना किधर है
एक तरफ
नरम घास सा रास्ता
तरफ दूसरी अँधेरे
का असर है
पसंद तुम्हारी
देगा तुम्हे
रास्ता नया
या बरबादियो
का मंज़र
एक तरफ
तरफ एक पल
का दर्द मगर
उम्र भर का
सुख है
तो तरफ दूसरी
कुछ पलों
की खुशिया
तरफ दूसरी
तमाम जिंदगी
भर का ग़म है

URL: India Speaks Daily hindi poem by Ravi Kumar Bhadra

Keywords: हिंदी कविता,अटल, कविता कोश, hindi poem, hindi kavita, Kavita kosh,


More Posts from The Author





    राष्ट्रवादी पत्रकारिता को सपोर्ट करें !

    जिस तेजी से वामपंथी पत्रकारों ने विदेशी व संदिग्ध फंडिंग के जरिए अंग्रेजी-हिंदी में वेब का जाल खड़ा किया है, और बेहद तेजी से झूठ फैलाते जा रहे हैं, उससे मुकाबला करना इतने छोटे-से संसाधन में मुश्किल हो रहा है । देश तोड़ने की साजिशों को बेनकाब और ध्वस्त करने के लिए अपना योगदान दें ! धन्यवाद !
    *मात्र Rs. 500/- या अधिक डोनेशन से सपोर्ट करें ! आपके सहयोग के बिना हम इस लड़ाई को जीत नहीं सकते !