पाकिस्तान के कश्मीरी ब्रांड को मोदी के बलूचिस्तान ब्रांड ने किया चारो खाने चित्त !

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लालकिले की प्राचीर से प्रधानमंत्री अपने अपने समय पर भाषण देते हुए आये हैं और पाकिस्तान को घुड़कियाँ देने का सिलसिला आजादी के बाद से बदस्तूर जारी रहा है किन्तु प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बलूचिस्तान वक्तव्य पर पाकितान की बिलबिलाहट सामने आ रही है। उससे यही लग रहा है की इस बार पाकिस्तान की दुम पर बड़ी जोर से किसी ने सोच समझ कर पैर धरा है, जिससे पाकिस्तान की राजनैतिक गलियारे में भूचाल आ गया है।

पिछले सत्तर सालों में पाकिस्तान ने हर मंच पर केवल एक ही राग अलापा है और वह कश्मीर है! चाहे उनके खुद के देश में हर दिन मानवता लहू लुहान होती रही लेकिन मानव अधिकारों के हनन को लेकर पाकिस्तान ने भारत सरकार को सदैव हाशिये पर रखा हुआ है! यूनाइटेड नेशन से लेकर लगभग हर अंतराष्ट्रीय मंच पर केवल और केवल कश्मीर का मुद्दा उठा कर पाकिस्तान ने स्वयं को दीन-हीन और लूट पिटा दिखाया लेकिन नरेंद्र मोदी ने बलूचिस्तान का नाम लिया तो ऐसा लगा की बम फट गया हो! बलूचिस्तान और पाक अधिकृत कश्मीर की बात सामने आते ही वह पाकिस्तान का निजी मामला हो जाता है लेकिन कश्मीर के मामले में वही पाकिस्तान अंतर्राष्ट्रीय मुद्दा बताने से नहीं चुकता, पाकिस्तान की यह दोहरी नीति नहीं तो क्या है ?

यहाँ पर एक बात बतानी जरूरी है कि 1946 में मुस्लिम लीग द्वारा भारत के बंटवारे को लेकर कराये गए मतदान में बलूचिस्तान वह भू-भाग रहा है जहाँ मुस्लिम लीग को मुंह की खानी पड़ी थी ! यह बात पाकिस्तान के रहनुमा भली भाँती जानते हैं । वे यह भी जानते हैं कि नरेंद्र मोदी द्वारा दिखाई चिंगारी कभी भी भीषण लपटों में बदल सकती है। पिछले कुछ दिनों से पाकिस्तान के इन हिस्सों में बगावत के स्वर सुनाई भी देने लगे हैं।

1946 से चाहे वो जिन्ना हो,याह्या खान हो अरशद खान हो, भुट्टो हो,मुशर्रफ हो अथवा नवाज शरीफ हो सभी का एजेंडा केवल और केवल कश्मीर ही रहा है । 70 सालों से पाकिस्तान कश्मीर में केवल जिहाद के नाम पर अराजकता फैला कर भारत के मस्तिष्क पर आघात कर रहा है, नफरत और भारत के टुकड़े करने के उद्देश्य से बने पाकिस्तान से और उम्मीद भी क्या की जा सकती है ? पिछले कई सालों में भारत ने कई बार शान्ति की पहल के लिए वार्तायें भी की लेकिन बदले में कभी कारगिल युद्ध, कभी मुम्बई के ताज पर हमला और कभी भारतीय एयरबेस पर हमलों के रूप में सौगात मिलती रही।

पहली बार पाकिस्तान को उसकी भाषा में जवाब दिया गया है जब बलूचिस्तान और पाक अधिकृत कश्मीर के मुद्दे को नरेंद्र मोदी द्वारा अंतरष्ट्रीय स्तर पर उठाया है। यदि मानवाधिकार के हनन की बात भारत में कश्मीर के लिए हो सकती है तो बलूचिस्तान में मानवाधिकार के हनन की सीमा कौन तय करेगा?

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1 Comment on "क्या कांग्रेस राज में एक ही नंबर के कई नोट छापकर काला धन पैदा किया गया?"

  1. Ramakant Tiwari | January 25, 2017 at 2:58 pm | Reply

    SC have no business to entertain the petition.
    If they have nothing better to adjudicate, they should go to Kullu / Manali on wnter vacation to enjoy snowfall.

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