उपेक्षा के शिकार उत्तरपूर्व में बहने लगी है, बदलाव की बयार !

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वर्षों से उपेक्षा का दंश झेलता उत्तरपूर्व में बदलाव की तैयारी शुरू हो चुकी है. रेल मंत्रालय और प्रधानमंत्री मोदी के सम्मिलित प्रयासों ने मेघालय के बीच ट्रेन शुरू कर भारत के सात बहन राज्यों (seven sisters states ) को राष्ट्र की मुख्यधारा के साथ जोड़ने का श्रीगणेश कर दिया है.

रेलवे मिनिस्टर सुरेश प्रभु पिछले दिनों बांग्लादेश के साथ सीधी रेल सेवा शुरू करने पर जो कदम, एक तीर से दो शिकार करने के समान है, भारत बांग्लादेश रेलमार्ग न केवल बांग्लादेश को भारत के साथ जोड़ेगा अपितु रेलवे आज़ादी के 67 सालों बाद भी अलग-थलग पड़े उत्तरपूर्व को अपनत्व की थपकी देगा. ये रेल मार्ग न केवल बांग्लादेश के साथ व्यापारिक गतिविधियों को नया आयाम देगा वरन भारत के अन्य प्रान्तों में उत्तर पूर्व के लोगों की आवागमन की सुलभता को भी निश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण पहल है.

उत्तर-पूर्व राज्यों के सम्पूर्ण विकास के लिए मोदी सरकार दृढ़संकल्प है.वर्ष 2016-17 के लिए सरकार ने इन राज्यों के लिए 33000 हजार करोड़ से ज्यादा का बजट घोषित किया है ताकि यहाँ के युवाओं को रोजगार के अवसर मुहैया करवाये जायें, नरेंद्र मोदी ने पिछले दो वर्षों में यहाँ स्वयं भी दौरे किये हैं ताकि अलग थलग पड़े यहाँ के लोगों को इस बात का विश्वास दिलाया जा सके की वे भी भारत का हिस्सा हैं. भारत के इन राज्यों में उल्फा जैसे देश विरोधी समूह बांग्लादेश को एक आधार के रूप में प्रयोग करते हैं और यहाँ के युवाओं के हाथ में कहीं न कहीं कभी न कभी बन्दूक आ ही जाती हैं, मोदी सरकार का यहाँ के युवाओं को रोजगार देकर राष्ट्र के कल्याण के साथ जोड़ने के लिए अच्छी पहल है.

बांग्लादेश से कोलकाता के लिए आवागमन के लिए बसें पहले से ही माध्यम बनी हुई हैं लेकिन ट्रेन से जोड़कर भारत और बांग्लादेश में व्यापार की संभावनायें बढ़ जाएंगी साथ ही साथ भारत के उत्तरपूर्व को देश के दूसरे हिस्सों से आवागमन की सुलभता से Seven Sisters States को विकास के नए पंख लगेंगे.

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