निर्वाचन आयोग द्वारा नोट बंदी में व्यर्थ का विवाद खड़ा करने की कोशिश!

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राजेन्द्र सिंह। निर्वाचन आयोग ने वित्त मन्त्रालय को इस आशय का पत्र लिखा है कि वह वोट देने के बाद लगाई जाने वाली अमिट स्याही का प्रयोग बैंकों में नोट बदलवाने आए लोगों की अंगुलियों पर न करे। ऐसा कह कर आयोग ने व्यर्थ का विवाद खड़ा कर दिया है। यह उल्लेखनीय है कि मतदान के बाद मतदाता के बाएं हाथ की तर्जनी अंगुली के नाखून के ऊपर पर अमिट स्याही का निशान इसलिए लगाया जाता है ताकि कोई व्यक्ति दोबारा मतदान न कर सके।

8 नवम्बर को 500 और 1000 रुपये के नोट पर सरकार द्वारा लगाई गई पाबन्दी के कारण यह देखने में आया है कि बहुत सारे लोग बैंक में बार-बार जाकर पुराने नोटों को बदलवाने का प्रयास करते पाए गए हैं। यह सब देख कर वित्त मन्त्रालय की ओर से यह निर्देश आया है कि नोट बदलवाने आए लोगों की अंगुली पर वही अमिट स्याही लगाई जाए ताकि कोई व्यक्ति बैंक में बार-बार जाकर नोट बदलवाने का प्रयास न कर पाए। काले धन वाले अपनी काली कमाई को सफ़ेद करने के लिए जिस प्रकार के हथकण्डे अपनाते हैं उसे देखते हुए वित्र मन्त्रालय का निर्णय बिल्कुल ठीक था। परन्तु अब निर्वाचन आयोग ने इस पर ऐतराज़ वाला पत्र लिखकर अमिट स्याही के प्रयोग पर केवल अपना ही एकाधिकार जताना चाहा है। यह बात समझ से परे है।

यह बात तो समझ में आती है कि बैंक वाले उस अमिट स्याही का प्रयोग व्यक्ति के बाएं हाथ की तर्जनी अंगुली पर न करके दाएं हाथ की किसी अंगुली पर करें। परन्तु यह बात समझ से बिल्कुल ही परे है कि वित्त मन्त्रालय इस स्याही का प्रयोग न करके कोई और विकल्प ढूंढे। कोई और विकल्प ढूंढने में जितनी देरी होगी उतना ही काले धन को सफ़ेद करने वालों को लाभ मिलता रहेगा। क्या इतनी छोटी सी बात निर्वाचन आयोग के अधिकारियों को समझ में नहीं आती। यहां विचारणीय यह है कि जिस भी अधिकारी ने वित्त मन्त्रालय को उपरोक्त पत्र लिखा है क्या वह सच्चे मन से लिखा गया है अथवा काले धन को सफ़ेद करने वाले लोगों को लाभ पहुंचाने की दृष्टि से लिखा है। अतः सरकार को चाहिए कि इस विषय में यदि जांच करना क़ानूनन सम्भव हो तो ऐसा अवश्य किया जाना चाहिए ताकि उस अधिकारी की असली मन्शा का पता चल सके।

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