सिंहस्थ महाकुंभ आस्था और अध्यात्म का सैलाब

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मेषे राशि गते सूर्य सिंह राशो ब्रहस्पतो ।
उज्जियन्तां भवेत कुम्भः सदमुक्ति प्रदायक:॥

अर्थात जब मेष राशि सूर्य पर हो और बृहस्पति सिंह राशि पर, उज्जैन में महाकुंभ का आयोजन किया जाता है, बृहस्पति के सिंह राशि में प्रवेश करने के कारन इससे सिंहस्थ महाकुंभ कहा जाता है.प्रत्येक बारह वर्षों के अंतराल में महाकुंभ का आयोजन किया जाता है, उज्जैन में होने वाले इस कुम्भ में पौराणिक आस्था के साथ भौगोलिक महत्व को जोड़ दिया जाए तो यह महाकुंभ विशेष से श्रेष्ठ हो जाता है, जैसे नाभि हमारे शरीर का मध्य भाग है उसी तरह उज्जैन हमारे देश का मध्य स्थान है, जो ध्यान, तप ,पूजा कर्म और दान करने के लिए सर्वोत्तम स्थान है जिस कारण इस सिंहस्थ महाकुंभ की श्रेष्ठता ज्यादा बढ़ जाती है हिन्दू धर्म के अनुसार माना जाता है की महाकुंभ में डुबकी लगाने से समस्त व्याधियां समाप्त हो जाती हैं महाकुंभ में किया गया स्नान अगले जन्म की नियति भी तय करता है.

महाकाल की नगरी उज्जैन में क्षिप्रा नदी के तट पर होने वाले महाकुंभ का इतिहास बहुत पुराना है.पुराणों को आधार मान कर जो कथा महाकुंभ के आयोजन को प्रभावशाली रूप से दर्शाती है वह इस प्रकार से है,”देवताओं और दानवों के सहयोग से समुन्द्र मंथन से निकले अमृत कलश के लिए होने वाले युद्ध और छीना झपटी में अमृत की कुछ बूँदें उज्जैन, नासिक, हरिद्वार और इलाहाबाद में गिरी,तब से १२ वर्षों के पश्चात इन दिव्य-स्थलों में महाकुंभ का आयोजन किया जाता है.

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भारत स्वछता मिशन के तहत सिंहस्थ कुम्भ में जानी मानी उत्पाद डेटॉल और हार्पिक के प्रयास से स्वछता का अभियान चलाया जा रहा है, लाखों की संख्या में पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को साफ़ सफाई का बेहतर विकल्प देने के लिए प्रयासरत हैं! स्वयं सेवक, लोगों को सफाई रखने से होने वाले लाभ से अवगत करा रहे हैं, साथ ही साथ डेटॉल और हार्पिक पानी बचाओ के सन्देश को भी प्रसारित कर रहे है! अनुमान है बारह सालों में होने वाला इस महाकुंभ में ५ करोड़ से भी ज्यादा श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है, गर्मी के मौसम में पानी की उपलब्धता इस बात पर निर्दृत होगी की कैसे ज्यादा से ज्यादा पानी के दोहन को बचाया जाये, डेटॉल हैंड सेनिटाइजर और वाटर स्प्रेयर की सहायता से यह सुनिश्चित कर रहा है कि पानी की खपत कम से कम हो और लोगों को पूर्ण सफाई मिले..

इस अभियान में डेटॉल ने सिंहस्थ महाकुंभ में १०० शौचालयों की साफ़ सफाई रखने की व्यवस्था की है,अक्सर सफाई के अभाव में लोगों को खुले में शौच करने के लिए बाध्य होना पड़ता है इससे बीमारी फ़ैलने की आशंका बढ़ जाती है, RB ग्रुप ऑफ़ कंपनी ने नासिक में हुए कुम्भ में भी तीन करोड़ लोगों को स्वछता के बारे में जागरूक किया था! उसी अभियान को आगे बढ़ाते हुए RB ग्रुप ऑफ़ कंपनी भारत स्वच्छ -मिशन को नया आयाम प्रदान कर रहा है!

 
जानकारों के अनुसार प्राचीन समय में बृहस्पति के वृश्चिक राशि में आने पर सिंहस्थ महाकुंभ का आयोजन किया जाता था किन्तु १८ शताब्दी में श्रेष्ठता के लिए होने वाले युद्धों में मराठाओं ने मालवा पर अपना प्रभुत्व जमा लिया इस अवसर पर उज्जैन के महाराज राणोजी शिन्दे के आदेश पर कुम्भ के आयोजन का फैसला लिया गया दिन था, वैशाखी पूर्णमासी विक्रम संवत 1789 सन 1732 ,भारत की अतुल्य संस्कृति की छठा बिखेरता महाकुंभ आस्था और अध्यात्म का सैलाब है जिसमें भारत और भारत से बाहर के करोड़ों लोग आकंठ डूबना चाहते हैं तथा महसूस करना चाहते हैं भारत की आध्यात्मिक चेतना को जो भारत के कण-कण में व्याप्त है|

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1 Comment on "उर्मिलेश जी नाम के साथ अब अपना सही सरनेम लगा ही लीजिए, क्यों पत्रकारिता को धोखा दे रहे हैं?"

  1. Amar shriwastav | May 8, 2017 at 2:03 pm | Reply

    Good Very Good Argument

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