सहनशीलता और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व को पढ़ाने के लिए; भारत पुरानी और महत्वपूर्ण पाठशाला बनी हुई है! खलफ-अल-हर्बी.

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Posted On: July 22, 2016

भारत में असहिष्णुता का रोना रोने वाले वालों के लिए ‘खलफ-अल-हर्बी’ का यह लेख आंखें खोलने वाला हो सकता है, मुसलमानो और अल्पसंख्यकों के हिमायती होने का दिखावा करने वाले तथाकथित पत्रकार और अवार्ड वापसी गैंग को आइना दिखाता यह लेख. भारत में रहकर भारत की जड़ों को खोखला कर रहें हैं उनको सच का आईना दिखता हुआ यह लेख,भारत में रह रहे तमाम उन लोगो के लिए है जो देश में असहिणुता जैसे शब्दों कि अवधारणा को गड़ते हैं और देश में अराजकता और द्वन्द को बढ़ावा देते हैं.

खलफ-अल-हर्बी एक स्तंभकार और सऊदी अरब के विचारक है ! अपने उदार विचारों और लेखों से विभिन्न मुद्दों पर बड़ा प्रभाव छोड़ते हैं और दुनिया भर में चर्चित हैं! इनके समसामयिक विषयों पर लिखे लेखों पर विश्व के हर कोने पर बात होती है . ‘सऊदी गजट’ के एक कॉलम में उन्होंने भारत को दुनिया का सबसे ज्यादा सहिष्णु देश बताया है. अपने लेख में उन्होंने भारत देश का वर्णन करते हुए लेख लिखा जिसका शीर्षक था ‘india – A country that rides elephants ‘ खलफ-अल-हर्बी लिखते हैं: “भारत में लगभग सौ से अधिक धर्मों और भाषाओँ वाले लोग रहते हैं जो अपने सार्थक प्रयासों से राष्ट्र को मजबूत बनाने के लिए सुई से लेकर मंगल में जाने के लिए रॉकेट तक सब कुछ बना सकते हैं.

वह आगे कहते हैं कि मुझे कहना होगा कि मैं थोड़ा जलन महसूस कर रहा हूँ क्योंकि मैं एक ऐसे राष्ट्र में रहता हूँ जहाँ एक धर्म और एक ही भाषा-भाषी रहते हैं फिर भी जगह -जगह हत्याएं हो रही हैं! दुनिया सहिष्णुता के बारे में क्या बोलती है यह मायने नहीं रखता लेकिन भारत धार्मिक, सामाजिक, राजनीतिक मतभेद की परवाह किए बिना सहनशीलता और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व को पढ़ाने के लिए सबसे पुराना और सबसे महत्वपूर्ण पाठशाला बनी हुई है.

भारत से बाहर के बुद्धिजीवियों को भारत में कोई बुराई नजर नहीं आती किन्तु देश में रह रहे कुछ बुद्धिजीवी जो संकीर्ण मानसिकता और लोलुपता के पुजारी है उन्होंने देश में भ्रामकता का जो मकड़जाल बुन रखा है, उसको काटने का वक़्त आ गया है नहीं तो यह रक्तपिपासु मकड़ी की तरह राष्ट्र के सदभावना रुपी रक्त को चूस जायेंगे.

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