बिहार में टॉपर काण्ड , शिक्षा की बदहाली के लिए आप और हम भी जिम्मेदार !

Posted On: June 29, 2016

उत्तर प्रदेश और बिहार दो ऐसे राज्य जहाँ से सबसे ज्यादा प्रशासनिक अधिकारी निकल कर आते हैं! वहां पर शिक्षा के नाम पर टॉपर कांड हो रहे हैं ! बेहद शर्मनाक है ! बिहार में टॉपर काण्ड हुआ,खूब हो-हल्ला मच रहा है! आरोप प्रत्यारोप, दोषी कौन है? आदि-आदि. शिक्षा के ऐसे स्वरुप को हम नहीं जानते हैं,प्रतिशत का खेल ग्रेडिंग प्रणाली ! जिस स्कूल के बच्चों के नंबर ज्यादा आये वह अच्छा स्कूल जिसके कम आये वो बुरा! शिक्षा का बाजारीकरण हो चुका है! दोष किसका? प्रशासन का, शिक्षा विभाग का ! शिक्षा के इस स्वरुप के लिए हम और आप भी बराबर के भागीदार हैं!

अपनी बात सिद्ध करने के लिए आपको कुछ साल पीछे ले जाता हूँ! उत्तर प्रदेश में 1991 में, बीजेपी ने मुख्यमंत्री की कुर्सी कल्याण सिंह को दी! कल्याण सिंह ने उत्तरप्रदेश की शिक्षा में व्याप्त भ्रष्टचार को रोकने के लिए कड़े कदम उठाए ! नक़ल माफिया के जड़ों पर प्रहार करते हुए नक़ल अध्यादेश को लागू किया! परिणामस्वरूप उत्तर प्रदेश में नक़ल करना एक दंडनीय अपराध बन गया ! मुझे याद है उन दिनों यूपी बोर्ड का रिसल्ट 65% से 80 % के बीच आता था! अब आप नक़ल अध्यादेश के बाद आंकड़े देख लीजिए! हाई स्कूल यानि दसवीं क्लास का रेगुलर और प्राइवेट को मिलाकर रिजल्ट आया लगभग 15% ! इंटरमीडिएट के आंकड़े भी कोई उत्साहित करने वाले नहीं थे.

कल्याण सिंह ने शिक्षा की आड़ में चल रहे नक़ल माफियाओं को एक ही झटके में निकाल बाहर किया! स्कूलों में पढना और पढ़ाना वक़्त की जरूरत हो गयी ! एक सटीक फैसले से अनुशासन और स्कूलों की हाज़िरी में इजाफा होने लगा ! सरकारी अध्यापक जो अब तक केवल तनख्वाह लेने तक ही सीमित थे उन्हें बच्चों को पढ़ाने की मजबूरी हो गयी ! बच्चे तो यह बात समझ गए की पढना पड़ेगा लेकिन उनके अभिभावकों को कल्याण सिंह का यह फैसला रास नहीं आया !

अगले चुनावों में मुलायम ने नक़ल अध्यादेश को चुनावी मुद्दा बनाया और जनता को वादा किया, हमें सत्ता दो हम नक़ल अध्यादेश को समाप्त कर देंगे,जनता ने मुलायम को हाथों-हाथ लिया तथा कल्याण सिंह को सत्ता से निकाल बाहर किया. जिसने आपके बच्चों को यह सन्देश दिया, बिना पढाई आप पास नहीं हो सकते आपने उसे हरा दिया! आपने धकेल दिया अपने बच्चों को शिक्षा के उस अंधे कुए में जहाँ सब कुछ है, डिग्री है, ग्रेडिंग है, अगर नहीं है तो ज्ञान, शिक्षा, संस्कार !

तो मित्रों सिस्टम को कोसने से पहले जरा आप सोच कर देखो ! इस सिस्टम को बनाने में आपकी कितनी भागीदारी है और बिगाड़ने में कितना योगदान ! सिस्टम को कोसने से कुछ नहीं होगा क्योंकि शिक्षा के व्यवसायीकरण के लिए हम और आप भी उतने ही जिम्मेदार हैं!

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