आज़ादी से पहले से चली आ रही रेलवे बजट की परम्परा, मोदी सरकार लगा सकती है विराम !

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Posted On: June 23, 2016

वर्षों से एक ही ढर्रे पर चल रही अर्थव्यवस्था को नए आयाम देती बीजेपी सरकार आने वाले समय में रेलवे बजट में फेर बदल करने को प्रतिबद्ध दिखाई दे रही है, रेल बजट को आम बजट के साथ पेश करने का सुझाव पीएमओ ऑफिस ने नीति आयोग से माँगा था जो एक स्वागत योग्य कदम है! इससे समय और देश की टैक्स पेयर जनता का पैसा बचेगा, जो अन्य किसी जन कल्याणकारी योजनाओं के काम आ सकता है नीति आयोग ने इससे से सम्बंधित ब्यौरा पीएमओ को सौंप दिया है!

भारतीय संसद सत्र के दौरान प्रति मिनट का खर्च ढाई लाख रूपए आता है! जो करोड़ों भारतीयों की गाड़ी कमाई से लिए गए टैक्स का पैसा है,मोठे तौर पर यदि हिसाब लगाया जाए तो अमूनन एक दिन के रेल बजट में कितना पैसा ख़राब हो रहा है, गणना आप स्वयं कर लीजिए ! डेढ़ से दो घंटे के आम बजट के साथ यदि रेल बजट को प्रस्तुत किया जाये तो समय और धन की हानि से बचा जा सकता है!

एक छोटा सा प्रयोग लेकिन परिणाम दूरगामी हो सकते हैं, लम्बे समय से ढोई जा रही परम्पराओं में बदलाव कर देश नयी दिशा में सोचने की पहल तो कर ही सकता हैं ! परिवर्तन समय की मांग है तो क्यों हम आज़ादी के ६९ सालों के बाद भी अंग्रेजों की बनाई नीतियों पर चलते रहें? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इन्हीं छोटी-छोटी परिवर्तनशील और दूरगामी सोच ने उन्हें अंतर्राष्ट्रीय स्तर इतनी प्रसिद्धि दी है!

बदलाव की जो बयार नरेंद्र मोदी सरकार ला रही उसे देख सच में लगने लगा है ‘मेरा देश बदल रहा है और आगे बढ़ रहा है।

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