Warning: Cannot modify header information - headers already sent by (output started at /nfs/c12/h04/mnt/223577/domains/indiaspeaksdaily.com/html/wp-content/themes/isd/includes/mh-custom-functions.php:277) in /nfs/c12/h04/mnt/223577/domains/indiaspeaksdaily.com/html/wp-content/plugins/wpfront-notification-bar/classes/class-wpfront-notification-bar.php on line 68
उदितराज जी केले में जो ताकत है, वह बीफ यानी गो मांस में नहीं! - India Speaks Daily: Pressing stories behind the Indian Politics, Legislature, Judiciary, Political ideology, Media, History and society.

उदितराज जी केले में जो ताकत है, वह बीफ यानी गो मांस में नहीं!



Courtesy Desk
Courtesy Desk

हरि शंकर व्यास। भाजपा सांसद उदित राज ने सबको मूर्ख बनाया। अब वे कह रहे हैं कि वे तो ट्रेनर के कहे से बोले थे। मतलब यह बात कि ट्रेनर ने गरीब उसेन बोल्ट से कहा था कि दोनों वक्त बीफ खाया करों! तभी देखिए उसने ओलंपिक में नौ गोल्ड जीते। जाहिर है उदित राज ने बीफ को गरीबी से, अफ्रीका से, काले से, ओलंपिक से जोड़ बताया कि ताकत का जरिया तो बीफ है। यह सिरे से गलत है बात। गरीब, काले, अफ्रिकी, कमजोर व दलित, उत्पीडित होने का अर्थ यह नहीं है कि बीफ उसकी मुक्ति का, उसके गोल्ड मेडल का रास्ता है। उलटा है। ऐसा सोचना अपने साथ, अपने समाज और वैश्विक हकीकत सबके साथ छल है। जो डार्विन के विकासवाद को, अफ्रिका के चिंपाजी, गोरिल्लाओं से इंसानी शुरुआत मानते हैं उन्हें भी जान लेना चाहिए कि आदि मानव चिंपाजी आज भी शाकाहारी है। जानवरों के बीच यदि बुद्धी-ताकत में चिंपाजी को अव्वल माना जाता है तो वह कुल मिला कर केले खाने वाला है। उसकी ताकत और बुद्धी दोनों केले से यानी कि शाकाहार से है!

इसलिए महामना उदितराज जी, केले में जो ताकत है वह गौमांस याकि बीफ में नहीं है। बीफ मांसाहार के सभी खानों में सर्वाधिक घटिया पेटभराऊ और मरियल बनाने वाला माना जाता है। इस बात का दो टूक प्रमाण उदित राज की ओलंपिक कसौटी में खुद ओलंपिक खिलाड़ियों का खुराक चार्ट है। इस बात का कोई प्रमाण नहीं है, न ही बोल्ट ने कभी किसी इंटरव्यू में कहा है कि वह बीफ खा खा कर एथेलेटिक सरताज, दुनिया का नंबर एक धावक बना। इंडिया टुडे वेबसाइट पर रोहन सेन ने कथित ट्रेनर की कथित बात की जांच करके लिखा है कि इंटरनेट पर वायरल किए गए झूठे नोट पर उदित राज ने गौमांस को ले कर टिवट किया। फिर उनके टिवट को 200 बार रिटिवट किया गया ताकि देश –दुनिया जाने की जो गौमांस हिंदुओं की आस्था में वर्जित है वह कैसे दुनिया के श्रेष्ठतम खिलाड़ी बनाता है!

हकीकत उलटी है। न उसेन बोल्ट की खुराक में बीफ की नियमितता है और न दुनिया के ओलंपिक एथेलेटिक्स या नामी खिलाड़ियों की ताकत का राज बीफ है। इनकी ताकत का राज है केले, फल, सब्जियां, दूध, डेयरी प्रोडक्ट, अंडे, चिकन, पोर्क याकि सुअर का मांस। सीएनएन ने 2012 के लंदन ओलंपिक गांव की रसोईघर के सभी रिकार्ड ले कर- ‘ओलंपिक एथेलेटिक्स एक्सट्रीम हैबिट’- की एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी। उसमें उसेन बोल्ट के स्प्रींट प्रतिस्पर्धी योहान ब्लेक का यह वाक्य था कि वह 24 घंटे में 16 बड़े पक्के केले जरूर खाता है।

उसेन बोल्ट का जहां सवाल है उसका रसोईया उसके साथ रहता है। वह बोल्ट की नियमित खुराक में हमेशा बनाता है चिकन, चावल, सब्जियां, सुअर का मांस, मछली व रतालू याकि जिमीकंद। मतलब कारबोहाईड्रेट और प्रोटीन दोनों से भरीपूरी खुराक बोल्ट के लिए अनिवार्यता है।

ऐसे ही दुनिया के सर्वाधिक 23 गोल्ड मैडल जीतने वाले तैराक फेल्पस की कोई 12 हजार केलौरी वाली रोजाना की खुराक है। इसमें वह भरपूर प्रोटीन वाले पास्ता, पिजा, चिकन, मछली पकवाता है। इसका अर्थ यह नहीं कि ये बीफ नहीं खाते होंगे। खाते होंगे। लेकिन इन्होंने अपनी जीत, अपनी खुराक को ले कर जितने भी इंटरव्यू दिए हंै या बताया है उसमें चिकन, मछली, डेयरी प्रोडक्ट ही मूल खुराक है। अन्यथा तो ये मेकडॉनाल्ड के बर्गर भी खाते हंै और जंक फास्ट फूड भी।

एथेलेटिक, तैराक, वेट लिफ्टिंग जैसै केलौरी खफाऊ खेलों के खिलाड़ियों के खुराक चार्ट में कारबोहाईड्रेट, प्रोटिन का तकाजा नंबर एक का है और उसमें गौमांस की जगह नहीं है। 2008 के बींजिग ओलंपिक के बाद तैराक फेल्पस ने एनबीसी को इंटरव्यू में कहा था कि जब उसकी ट्रैनिग चरम पर होती है तो वह कार्वोहाईटड्रेड वाला चीज भरा पास्ता, पिजा जमकर खाता है। उसी वक्त उसेन बोल्ट ने कहां था कि वह पोटेशियम लेवल को दुरूस्त रखने के लिए बहुत केले खाता है। ब्रिटेन के वेटलिफ्टर जैक ओलिवर की फितरत है कि वह हर सुबह ताजा ब्याई गाय का दूध अनिवार्यतः पीता है। कई एथेलेटिक और खिलाड़ी कोलोस्ट्रम, प्रोटीन रिच दूध के लिए ऐसे ताजा ब्याई गाय का दूध पीते हैं। जापान की मैराथन दौड़ने वाली खिलाड़ी ने बताया कि वह हर बड़े सत्र के बाद दो किलों मछली खाती है।

सीएनएन की लंदन ओलंपिक की रसोई पर लिखी गई रपट के अनुसार उस ओलंपिक के दौरान कोई पांच हजार खिलाडि़यों ने वहां खाना खाया। इसमें 25 हजार ब्रेड पैकेट, 232 टन आलू, 75 हजार लीटर दूध, 330 टन फल और सब्जियों की खपत के आंकड़े सबसे बड़े थे। यह आंकड़ा था ही नहीं कि बीफ कितने टन खाई गई।

यदि ओलंपिक खिलाड़ियों को प्रशिक्षित करने वाले विशेषज्ञों, जानकारों से बात कर पूछे कि – प्रोफेशनल एथेलेटिक्स सचमुच क्या खाते हैं तो जवाब मौटे तौर पर यह होगा–खुराक में सब्जियां, फल और लेग्यूमस खूब होंगे। अनाज याकि ब्रेड, चावल, पास्ता, नूडल्स और खास कर होलग्रेन जमकर खाया जाए। चिकन, मछली, या उसके शाकाहारी विकल्प जैसे तोफू, लेग्यूमस लंच और डिनर दोनों में। दूध, दही, चीज और सोया दूध भरपूर मात्रा में।

यही खिलाडि़यों की अनिवार्य खुराक है। उसेन बोल्ट के जो खुराक चार्ट हैं या जो इंटरव्यू की उनकी बाते है उसमें सब्जियों, कच्ची सब्जियों, रतालू, आलू और भुने केले और पके केले का जिक्र बार-बार मिलेगा। एक चार्ट के अनुसार उसका नाश्ता दही , साल्टफिश, हाई प्रोटीन वाली येलो याम डाइट, आलू और भुने हुए केले का होता है तो लंच में वह चिकन ब्रेस्ट और पास्ता खाता है और रात में मटर के साथ चावल और पोर्क याकि सुअर का मांस!

साभार: नया इंडिया



राष्ट्रवादी पत्रकारिता को सपोर्ट करें !

जिस तेजी से वामपंथी पत्रकारों ने विदेशी व संदिग्ध फंडिंग के जरिए अंग्रेजी-हिंदी में वेब का जाल खड़ा किया है, और बेहद तेजी से झूठ फैलाते जा रहे हैं, उससे मुकाबला करना इतने छोटे-से संसाधन में मुश्किल हो रहा है । देश तोड़ने की साजिशों को बेनकाब और ध्वस्त करने के लिए अपना योगदान दें ! धन्यवाद !
*मात्र Rs. 500/- या अधिक डोनेशन से सपोर्ट करें ! आपके सहयोग के बिना हम इस लड़ाई को जीत नहीं सकते !