भारतीय ख़ुफ़िया एजेंसी RAW को कमज़ोर करने में गांधी परिवार की भूमिका

उपरोक्त हिंदी अनुवाद एस गुरूमूर्ति द्वारा 17 अप्रैल 2004 को न्यू इंडियन एक्सप्रेस में लिखे गए लेख का हिंदी अनुवाद है। हालांकि गुरूमूर्ति के उस लेख का वेब लिंक न्यू इंडियन एक्सप्रेस ने हटा दिया है, जो ढूंढे पर भी नहीं मिलता है। लेकिन कुछ अन्य वेब पोर्टल व ब्लाॅग पर वह लेख आज भी उपलब्ध है। इंडिया स्पीक्स डेली उसी लेख का हिंदी अनुवाद एक फेसबुक लिंक से लेकर पेश कर रहा है। मूल सोर्स दिया गया है। इसके अलावा उसके नीचे एस.गुरुमूर्ति का वह अंग्रेजी लेख भी ज्यों का त्यों दिया जा रहा है। फेसबुक के उस लिंक में कुछ बातें ऐसी भी है, जो गुरूमूर्ति के मूल लेख में नहीं है। चूंकि मूल फेसबुक का लिंक मैंने दिया है, इसलिए उन कथनों को रहने दिया है। इंडिया स्पीक्स डेली दोनों लेखों में से किसी के भी किसी भी तथ्यों की पुष्टि का दावा नहीं करता है।

जब पंजाब में आतंकवाद चरम पर था तब सुरक्षा अधिकारियों ने इंदिरा गाँधी को बुलेटप्रूफ़ कार में चलने की सलाह दी, इंदिरा गाँधी ने अम्बेसेडर कारों को बुलेटप्रूफ़ बनवाने के लिये कहा, उस वक्त भारत में बुलेटप्रूफ़ कारें नहीं बनती थीं इसलिये एक जर्मन कम्पनी को कारों को बुलेटप्रूफ़ बनाने का ठेका दिया गया । जानना चाहते हैं उस ठेके का बिचौलिया कौन था, वाल्टर विंसी, सोनिया गाँधी की बहन अनुष्का का पति ! रॉ को हमेशा यह शक था कि उसे इसमें कमीशन मिला था, लेकिन कमीशन से भी गंभीर बात यह थी कि इतना महत्वपूर्ण सुरक्षा सम्बन्धी कार्य उसके मार्फ़त दिया गया । इटली का प्रभाव सोनिया दिल्ली तक लाने में कामयाब रही थीं, जबकि इंदिरा गाँधी जीवित थीं ।

दो साल बाद 1986 में ये वही वाल्टर विंसी महाशय थे जिन्हें एसपीजी को इटालियन सुरक्षा एजेंसियों द्वारा प्रशिक्षण दिये जाने का ठेका मिला, और आश्चर्य की बात यह कि इस सौदे के लिये उन्होंने नगद भुगतान की मांग की और वह सरकारी तौर पर किया भी गया । यह नगद भुगतान पहले एक रॉ अधिकारी के हाथों जिनेवा (स्विटजरलैण्ड) पहुँचाया गया लेकिन वाल्टर विंसी ने जिनेवा में पैसा लेने से मना कर दिया और रॉ के अधिकारी से कहा कि वह ये पैसा मिलान (इटली) में चाहता है, विंसी ने उस अधिकारी को कहा कि वह स्विस और इटली के कस्टम से उन्हें आराम से निकलवा देगा और यह “कैश” चेक नहीं किया जायेगा । रॉ के उस अधिकारी ने उसकी बात नहीं मानी और अंततः वह भुगतान इटली में भारतीय दूतावास के जरिये किया गया । इस नगद भुगतान के बारे में तत्कालीन कैबिनेट सचिव बी.जी.देशमुख ने अपनी किताब- A Cabinet Secretary Looks Back में उल्लेख किया है, हालांकि वह तथाकथित ट्रेनिंग घोर असफ़ल रही और सारा पैसा लगभग व्यर्थ चला गया ।

इटली के जो सुरक्षा अधिकारी भारतीय एसपीजी कमांडो को प्रशिक्षण देने आये थे उनका रवैया जवानों के प्रति बेहद रूखा था, एक जवान को तो उस दौरान थप्पड़ भी मारा गया । रॉ अधिकारियों ने यह बात राजीव गाँधी को बताई और कहा कि इस व्यवहार से सुरक्षा बलों के मनोबल पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है और उनकी खुद की सुरक्षा व्यवस्था भी ऐसे में खतरे में पड़ सकती है, घबराये हुए राजीव ने तत्काल वह ट्रेनिंग रुकवा दी,लेकिन वह ट्रेनिंग का ठेका लेने वाले विंसी को तब तक भुगतान किया जा चुका था । राजीव गाँधी की हत्या के बाद तो सोनिया गाँधी पूरी तरह से इटालियन और पश्चिमी सुरक्षा

अधिकारियों पर भरोसा करने लगीं, खासकर उस वक्त जब राहुल और प्रियंका यूरोप घूमने जाते थे । सन 1985 में जब राजीव सपरिवार फ़्रांस गये थे तब रॉ का एक अधिकारी जो फ़्रेंच बोलना जानता था, उनके साथ भेजा गया था, ताकि फ़्रेंच सुरक्षा अधिकारियों से तालमेल बनाया जा सके । लियोन (फ़्रांस) में उस वक्त एसपीजी अधिकारियों में हड़कम्प मच गया जब पता चला कि राहुल और प्रियंका गुम हो गये हैं । भारतीय सुरक्षा अधिकारियों को विंसी ने बताया कि चिंता की कोई बात नहीं है, दोनों बच्चे जोस वाल्डेमारो के साथ हैं जो कि सोनिया की एक और बहन नादिया के पति हैं । विंसी ने उन्हें यह भी कहा कि वे वाल्डेमारो के साथ स्पेन चले जायेंगे जहाँ स्पेनिश अधिकारी उनकी सुरक्षा संभाल लेंगे।


भारतीय सुरक्षा अधिकारी यह जानकर अचंभित रह गये कि न केवल स्पेनिश बल्कि इटालियन सुरक्षा अधिकारी उनके स्पेन जाने के कार्यक्रम के बारे में जानते थे । जाहिर है कि एक तो सोनिया गाँधी तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव के अहसानों के तले दबना नहीं चाहती थीं, और वे भारतीय सुरक्षा एजेंसियों पर विश्वास नहीं करती थीं । इसका एक और सबूत इससे भी मिलता है कि एक बार सन 1986 में जिनेवा स्थित रॉ के अधिकारी को वहाँ के पुलिस कमिश्नर जैक कुन्जी़ ने बताया कि जिनेवा से दो वीआईपी बच्चे इटली सुरक्षित पहुँच चुके हैं, खिसियाये हुए रॉ अधिकारी को तो इस बारे में कुछ मालूम ही नहीं था ।

जिनेवा का पुलिस कमिश्नर उस रॉ अधिकारी का मित्र था, लेकिन यह अलग से बताने की जरूरत नहीं थी कि वे वीआईपी बच्चे कौन थे । वे कार से वाल्टर विंसी के साथ जिनेवा आये थे और स्विस पुलिस तथा इटालियन अधिकारी निरन्तर सम्पर्क में थे जबकि रॉ अधिकारी को सिरे से कोई सूचना ही नहीं थी, है ना हास्यास्पद लेकिन चिंताजनक… उस स्विस पुलिस कमिश्नर ने ताना मारते हुए कहा कि “तुम्हारे प्रधानमंत्री की पत्नी तुम पर विश्वास नहीं करती और उनके बच्चों की सुरक्षा के लिये इटालियन एजेंसी से सहयोग करती है”। बुरी तरह से अपमानित रॉ के अधिकारी ने अपने वरिष्ठ अधिकारियों से इसकी शिकायत की, लेकिन कुछ नहीं हुआ ।

अंतरराष्ट्रीय खुफ़िया एजेंसियों के गुट में तेजी से यह बात फ़ैल गई थी कि सोनिया गाँधी भारतीय अधिकारियों, भारतीय सुरक्षा और भारतीय दूतावासों पर बिलकुल भरोसा नहीं करती हैं, और यह निश्चित ही भारत की छवि खराब करने वाली बात थी । राजीव की हत्या के बाद तो उनके विदेश प्रवास के बारे में विदेशी सुरक्षा एजेंसियाँ, एसपीजी से अधिक सूचनायें पा जाती थी और भारतीय पुलिस और रॉ उनका मुँह देखते रहते थे । (ओट्टावियो क्वात्रोची के बार-बार मक्खन की तरह हाथ से फ़िसल जाने का कारण समझ में आया ?) उनके निजी सचिव विंसेंट जॉर्ज सीधे पश्चिमी सुरक्षा अधिकारियों के सम्पर्क में रहते थे, रॉ अधिकारियों ने इसकी शिकायत नरसिम्हा राव से की थी, लेकिन जैसी की उनकी आदत (?) थी वे मौन साध कर बैठ गये ।संक्षेप में तात्पर्य यह कि, जब एक गृहिणी होते हुए भी वे गंभीर सुरक्षा मामलों में अपने परिवार वालों को ठेका दिलवा सकती हैं, राजीव गाँधी और इंदिरा गाँधी के जीवित रहते रॉ को इटालियन जासूसों से सहयोग करने को कह सकती हैं, सत्ता में ना रहते हुए भी भारतीय सुरक्षा अधिकारियों पर अविश्वास दिखा सकती हैं, तो अब जबकि सारी सत्ता और ताकत उनके हाथों मे है, वे क्या-क्या कर सकती हैं, बल्कि क्या नहीं कर सकती । हालांकि “मैं भारत की बहू हूँ” और “मेरे खून की अंतिम बूँद भी भारत के काम आयेगी” आदि वे यदा-कदा बोलती रहती हैं, लेकिन यह असली सोनिया नहीं है ।

समूचा पश्चिमी जगत, जो कि जरूरी नहीं कि भारत का मित्र ही हो, उनके बारे में सब कुछ जानता है, लेकिन हम भारतीय लोग सोनिया के बारे में कितना जानते हैं ? (भारत भूमि पर जन्म लेने वाला व्यक्ति चाहे कितने ही वर्ष विदेश में रह ले, स्थाई तौर पर बस जाये लेकिन उसका दिल हमेशा भारत के लिये धड़कता है, और इटली में जन्म लेने वाले व्यक्ति का ।

उन्होंने कहा है कि, मेरी मेहनत भरी रिसर्च और बुद्धिमत्ता रंग लाई। उन चार मंत्रियों (इंदिरा सरकार के कैबिनेट मंत्री) और दो दर्जन सांसद KGB (रूस की जासूसी एजेंसी) के लिए काम करते थे। KGB इन्हें इसके लिए मोटी रकम देता था।

मलय कृष्णधर ने उनकी किताब में कुछ जाने माने तथ्य और पब्लिक सिक्रेटों को प्रकाशित किया है। इस किताब में उन्होंने सोनिया गांधी पर आरोप लगाते हुए कहा है कि सोनिया गांधी एक KGB द्वारा भेजी हुई जासूस है।

वर्ष 1985 में रूसी जासूसी एजेंसी KGB द्वारा 2 बिलियन यूएस डॉलर (94 करोड़ रुपये) राहुल गांधी के स्विस बैंक खाते में जमा किये थे जो कि सोनिया गांधी द्वारा मैनेज किया जाता था। स्विस न्यूज़ मैगजीन में भी यह दर्शाया गया था कि KGB ने सोनिया गांधी जो कि भारतीय राजनेता से विवाहित है उसे इतनी मोटी रकम क्यों दी गई?

अगर सोनिया गांधी भारत की प्रधानमंत्री बन गई होती तो हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा, सेना, वैज्ञानिकता और टेक्नोलॉजी विकास (BARC, ISRO, DRDO, ICAR, ICAR) और हमारी व्यापारिक गतिविधियां रूस, रोम और अन्य मुस्लिम राष्ट्रों के लिए एक तरह से खुली किताब के समान हो जाती। इटालियन माफिया भारतीय इंडस्ट्रीस और व्यापार पर अपना दबदबा कायम कर लेता, जिसका परिणाम बहुत ही खतरनाक होता।

कृष्णधर द्वारा जुटाए गए कुछ सबूत सोनिया गांधी को रसियन एजेंट साबित करते है।जवाहर लाल नेहरू के समय इंदिरा गांधी को भी KGB के द्वारा मोटी रकम मिलती थीं। उसके बाद इंदिरा गांधी के चहेते राजीव और सोनिया को पाकिस्तानी बैंकर के द्वारा रकम दी जाती थी। बैंकर आघा हसन अबदी जो कि बैंक ऑफ क्रेडिट एंड कॉमर्स में कार्यरत था। यह बैंक अबु धाबी के शेख जैयद के अवैध धन (नशीली दवाओं से कमाई रकम) को वैध करता था।

तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की रहस्यमयी मृत्यु रूस पर उंगली उठाती है। 1965 भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद शास्त्रीजी पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान से ताशकेंट में मुलाकात की और ‘No-War समझौते’ पर हस्ताक्षर किए जिसमें लिखा था कि अब कोई युद्ध नहीं होगा। लेकिन चौकाने वाली बात यह है कि उनकी अगले ही दिन रहस्यमयी मृत्यु हो गई और इससे जुड़े सारे सबूत मिटा दिए गए।

संजय गांधी की मृत्यु से जुड़े सबूत भी सोनिया गांधी को संदेह के घेरे में खड़े करते थे। संजय गांधी को KGB के कहने पर मारा गया था ताकि राजीव गांधी भारत के अगले प्रधानमंत्री हो।

राजीव गांधी की मृत्यु श्रीलंका के आतंकी समूह LTTE (जिसे ईसाई समूह द्वारा वित्तीय सहायता मिलती थी) द्वारा हुई थी। बता दे कि राजीव गांधी को 21 मई, 1991 को तमिलनाडु में 24 वर्षीय धनु नामक रोमन कैथेलिक महिला, जिसका असली नाम क्लैबथि था, के द्वरा आत्मघाती बम द्वारा उड़ा दिया गया था।

आरोप है कि राजीव गांधी को मार दिया गया तो KGB ने सोनिया गांधी को बढ़ावा देने के लिए पर्दे के पीछे से काम किया। सोनिया की लीडरशिप के लिए संभावित खतरों को एक एक कर के शानदार तरीके से दुर्घटनाओं का रूप देकर हटा दिया गया, जो कि KGB की विशेषता है।

कैथोलिक्स रविवार को विशेष मानते है और सोनिया गांधी के सभी खतरे रविवार को ही समाप्त हुए।राजेश पायलट की रोड एक्सीडेंट में रविवार को मौत हुई, जितेंद्र प्रसाद रविवार ब्रेन हैमरेज से मरे और माधवराव सिंधिया रविवार के ही दिन प्लेन क्रैश में मारे गए थे।

स्रोत –
1) SONIA UNMASKED By S. Gurumurthy ((Published in TheNew Indian Express dt.17.04.04)

2) ‘ओपन सीक्रेट’ written by मलय कृष्णा धर (रिटायर इंडियन पुलिस सर्विस मलय कृष्णा धर ने 29 वर्षों तक इंटेलिजेंस ब्यूरो में सेवा दी है।)

3) बी.जी.देशमुख की किताब- A Cabinet Secretary Looks Back

4) who is soniya gandhi – नाम से छापा गया सुब्रमण्यम स्वामी जी द्वारा लिखित एक लेख।

खबर का मूल लिंक।

SONIA UNMASKED By S. Gurumurthy

SONIA UNMASKED By S. Gurumurthy

(Published in TheNew Indian Express dt.17.04.04)

“Your Prime Minister`s wife does not trust you, gets her security from Italians`

This is what this investigation reveals. Sonia arranges a clandestine meeting between the RAW, Indian spy network, and Italian spies. This was when she was just a housewife and Rajiv was just the general secretary of the Congress.

When Sonia was still an Italian and had not applied yet to become an Indian citizen. Are you surprised? Go further.

Her brother-in-law, that is Sonia’s sister’s husband, Walter Winci, arranges bullet-proofing of Indira Gandhi’s car in a German factory. Are you shocked? Wait. Later the same Winci arranges the training of SPG commandos by Italian security personnel who even slap the SPG trainees. Are you embarrassed? Go further.

When Sonia travels to France with Rajiv in 1985, without the knowledge of the Indian security agency, SPG, she gets the security of Rahul and Priyanka arranged by Italian and Spanish officials. Are you ashamed? It is not over yet. In 1986 when Rahul and Priyanka go to Geneva and Italy,Sonia directly gets their security organised through the Italian foreign office.

The Swiss police official taunts the Indian RAW officer in Geneva,‘‘Your Prime Minister’s wife does not trust you; she trusts only the Italians.’’ You feel humiliated?

Whether you feel humiliated or not,the RAW official did feel extremely humiliated. Italian officials are the ones she trusts. Italian embassy is her official embassy. Italian security is her security.

This is the Sonia who now shouts from election platforms day in and day out that she will die for her motherland. The only issue is which is her that motherland. That she does not trust India is known to the whole western world, but not India.Read this humiliating story.

(The expose is based on oral testimony of retired officials, including the RAW officials.)

There is no time for side shows. Let us go straight to the heart of the issue. The Indian spy agency RAW, formed in the year 1968, had established clandestine network with its counterparts in different countries. With the USA, UK, Israel, France, West Germany and other countries, which possessed the capability for exchange of information on terrorism, insurgency, China and similar subjects. RAW did not consider Italian spy agencies as worthy of such association, as they did not have any capability. So India did not bother about them. Rajiv Gandhi entered active politics after Sanjay’s death in 1980. He began to participate in the classified briefings of RAW even though he held no position in the government. Not just he, he wanted Arun Nehru and Arun Singh too to participate in such briefings. The agency protested saying that they had no official position. But Indira Gandhi stepped in, asked the RAW to allow them to be present. The agency agreed reluctantly, but told the Indira that their names would remain unrecorded in the briefing. This was when Rajiv was not in the government, was just general secretary of the Congress Party.

Soon,even though he had nothing to do with the Government or the RAW, Rajiv began insisting that RAW should liaise with the Italian spy agencies. Why Rajiv should have insisted on Italy?Did he study the importance of Italian assistance to India?Nothing of that sort. The reason is Obvious. Sonia. Rajiv had married her in1968. The RAW felt that it would be waste of time and money. But Rajiv would not relent. The agency finally gave in. So after more than a decade and more the RAW was forced into accepting liaison with Italian spy agencies whom they considered not worthy of association. Want to know who acted as the go between for RAW with the Italian spy agencies and arranged the first clandestine meeting between RAW spies and Italian spies. Believe it. Sonia! Obviously she was in touch with Italian spies. An innocent and devout housewife, unconcerned about politics and state, was deep in her contact with Italian spy agencies. This was when she was still an Italian national, had not yet accepted the Indian nationality which she reluctantly did much later. Being in the Prime Ministers household, she was in touch with the spies in Italy.So even when she was just a housewife and Rajiv was not yet in the government,she was linking the Italian spies to India.An aside. One of the reasons why the RAW would not touch the Italian agencies could be the presence of Sonia in the PM’s house. If they official is ed the liaison with the Italian agencies, their reach would not be limited to the RAW,but may extend to the PM’s house.

Next, when after terrorism broke out in Punjab and the security agencies advised Indira Gandhi to travel in bullet proof car,she wanted the Ambassador car made bullet-proofed. As India developed this capability only much later in 1985, a German company was chosen for the job. Want to know who brokered the contract with the German company.Walter Winci, the husband of one of Sonia’s sisters, Anushka! The RAW suspected that he got a small commission out of it. But the more critical was that a sensitive security work was given through Sonia’s brother. Look at the Italian influence Sonia had brought in even when Indira was alive.

It is the same Walter Winci who, two years later, in 1986, insisted and received cash payment made by the Indian government. This was for arranging training by Italian security for SPG, which had been established in 1984 for the protection of the Prime Minister, Rajiv Gandhi. The cash payment was first attempted through the RAW official posted at Geneva.Walter Winci refused to come to Geneva to receive that cash and wanted the RAW official to send it to Milan in Italy. Winci ‘assured’ the RAW official that that he had ‘good contacts’ in ‘Swiss’ and‘Italian’ customs and he would not be checked. The RAW official would not budge. The recalcitrant official was finally told to tell Winci that the operation had been cancelled. But the money was delivered to Winci through the Indian Embassy in Rome.Want to know what for the cash was to be sent. For funding the traveling expenses of the Italian security officials to come to India and train Indian SPG commandos. This is the payment B.G Deshmukh, who was then the cabinet secretary, has mentioned in his latest book. But this training ended in a fiasco. The Italian trainers treated the SPG trainees rudely, and even slapped one of them. The RAW brought this to the notice of Rajiv and told him such ill-treatment may develop a grudge in the minds of the SPG against Rajiv which might be a security risk. Panicked Rajiv forthwith called off the training by Italians arranged by Walter Winci.

After Rajiv was assassinated Sonia began openly relying on Italian and Western security for Rahul and Priyanka when they travelled to Europe.When Rajiv went to Paris in the year 1985 along with Sonia a RAW official proficient in French was asked to go to France to liaise with the French security agencies. At Leon in France,the SPG officials panicked as Rahul and Priyanka were missing. But Winci told them not to worry. He told them that they were in the safe care of Jose Valdemaro, the husband of another sister of Sonia, Nadia Winci told them that the two had been taken to Madrid in Spain, where Valdemaro hails from, by train and the Spanish authorities were taking care of them. The Indian security officials were stunned that, not they, butthe Spanish and Italian security agencies were aware of the Madridvisit of Rahul and Priyanka. It is not just that Sonia did not want to troublethe Indian security system. It was simply that he did not trust them. You wantmore clear evidence of her distrust of India,here it is.

In the year 1986 the RAW official stationed at Geneva was told by Jack Kunzi, the Commissioner of Police at Geneva that the VIP children had returned safely to Italy after their visit to Geneva.Who were the VIP children? The RAW official had no clue. He knew nothing about their visit. The Swiss police official who was the RAW official’s good friend told him their names. You have any doubt who they could be? They were Rahul and Priyanka. They had come to Geneva by car with Walter Winci, said the Swiss official. He also informed the RAW official that he was in the picture and the RAW official was not. He said that the Italian foreign office was the co-ordinator. It had informed the Swiss foreign office, who in turn informed the Swiss police. Jack Kunzi taunted the RAW official who was his friend, ‘your Prime Minister’s wife does not seem to trust you or your embassy. She gets the security for her children co-ordinated by Italians”. Humiliated, the RAW official makes the usual complaint to his boss. The boss files the complaint. There ends the story of humiliation of India in Switzerland and Italy.Remember this kind of information spreads like wildfire in geo-politics through global spy network. That Sonia did not trust the Indian officials, or the Indian embassies, or the Indian security is now a matter of global geo-political information. Want to know more on this, read on.

After Rajiv’s assassination, the RAW official who was in charge of security arrangements abroad for SPG protectees which included Sonia, Rahul and Priyanka, knew less about her and her children’s travel plans than western intelligence and security agencies. The Indian agencies knew nothing or very little. George, her secretary used to directly communicate to western agencies through Italian Embassy in Delhi and the Italian foreign office in Rome.The upright officer informed the RAW chief before he retired that the western agencies were better informed of Sonia’s and her children’s travel plans than the Indian agencies. He charged that this had created the unfortunate impression that Sonia did not trust the Indian agencies. The complaint went to Narasimha Rao who was the Prime Minister then. He felt unhappy that George,that is Sonia, was informing the Italian embassy, not the Indian agencies, buthe could do nothing about it. You ask him now. Even now he will not tell the truth. But the RAW official would.

So she was linked to the Italian spies and was familiar with bringing about spy connections, a highly skilled and scary business, as early as the early 1980s. Yet she pretended, even now does, to be an innocent house wife. She brought in her family into the security matters of India even when Indira was alive. She forced Italian security on India even when Rajiv Gandhi was alive. She openly distrusted Indian security and diplomatic system and privately liaised with the Italian diplomatic system for her security. If she did this when Indira was alive; if she went as far when Rajiv was alive; if she did this when she was out of the congress and out of power, what will she do when put in power? Or what she will not. Yet she pretends to die for India.This is not real Sonia. The whole western world, not exactly the friends of India, knows about her. But not we, in India.We do not know the real Sonia.

नोट: इस पोस्ट के तथ्यों की पुष्टि ISD नहीं करता है! यदि इन तथ्यों की पुष्टि हो गयी तो ISD अपने पाठकों को अलग से विस्तृत रिपोर्ट देगा। इस रिपोर्ट की सत्यता का हमारा कोई दावा नहीं है और न ही किसी की मानहानि की ही कोशिश है। हम बस डेढ दशक पहले लिखे गये एक लेख, जिसका मूल लिंक गुम है, उसे ही सामने लाने की कोशिश कर रहे हैं।

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