कश्मीर में सामने आया एक और कठुआ जैसा मामला! सौतेली मां और भाई समेत छह गिरफ्तार, फेक पत्रकारों इस बार नहीं चिल्लाओगे?

कश्मीर के बारामुला में नौ साल की बच्ची के साथ हैवानियत की हद को भी पार करने वाली घटना हुई! ये घटना इतनी वीभत्स है कि शैतान की भी रूह कांप जाए लेकिन कठुआ पर जिन पत्तलकारों ने दिन रात हिन्दुओं को बदनाम करने के लिए ट्वीटर पर अभियान चला रखा था उनका कलेजा नहीं पसीजा! आखिर कैसे कोई मां इतनी निष्ठुर हो सकती है?

माँ तो दूर कैसे कोई औरत इस हद तक गिर सकती है कि अपनी आंखों के सामने अपने ही नाबालिग बच्चों को कुकर्म के लिए प्रेरित करे? मानवता को लहूलुहान करने वाली इससे लोहमर्षक घटना हो ही नहीं सकती! लेकिन ये घटना एक मुसलिम परिवार के लोगों द्वारा अंजाम दी गयी है इसलिए मीडिया ने एक हैडलाइन के साथ अखबार का एक कोना दे दिया! और ख़ामोशी ओढ़ ली! अब कहाँ गए कठुआ पर जार-जार रोने वाले बॉलीवुड के भांड, जिनको भारतीय होने पर शर्म आ रही थी जो प्ले कार्ड दिखा कर पूरी दुनिया में भारत और हिन्दुओं को बदनाम करने के लिए उतर आये थे!

कश्मीर के बारामुला जिले में एक और कठुआ मामला सामने आया है। जिस प्रकार कठुआ में मासूम आठ साल की बच्ची की सामूहिक बलात्कार करने के बाद बेरहमी से हत्या कर दी थी, उसी प्रकार इस बार बारामुला में नौ साल की बच्ची की गैंगरेप करने के बाद निर्दयतापूर्वक हत्या कर दी गई। कठुआ मामले को जहां सांप्रदायिक रंग देकर असली अपराधी को बचा लिया गया, वहीं बारामुला आपराधिक मामले में पुलिस ने असली आरोपी को धर दबोचा है। इसे कहते हैं प्रशासन। ध्यान रहे कि इस समय जम्मू एवं कश्मीर में राज्यपाल शासन है जबकि उस समय पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती का शासन था। जहां इस मामले को अपराध के रूप में लिया गया है वहीं कठुआ मामले को राजनीतिक लाभ-हानि में फंसाने के साथ ही महबूबा मुफ्ती ने सांप्रदायिक रंग देकर हिंदुओं को बदनाम करने का खेल खेला। सवाल उठता है कि जो लिबरल ब्रिगेड पत्रकार कठुआ मामले के माध्यम से हिंदुओं और देश को बदनाम करने का कोई कोर कसर नहीं छोड़ा, क्या आज उन्हें सांप सूंघ गया है?

मुख्य बिंदु

* बारामुला में सौतेली मां पर नौ साल की बच्ची से अपने बेटे से गैंगरेप करवाने का आरोप

* क्या अभी तक इस मामले पर फेक पत्रकारों की तरफ से ट्वीट की बारिश हुई है? नहीं न?

गौरतलब है कि बारामुला में एक सौतेली मां पर अपनी 9 साल की बच्ची का अपने ही बेटे समेत पांच लड़कों से गैंग रेप करा कर उसकी निर्मम हत्या कराने का आरोप है। बच्ची के अपहरण, गैंगरेप और हत्या करने के मामले में पुलिस ने एक महिला समेत छह लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस का कहना है कि बच्ची की सौतेली मां ने अपने 14 साल के बेटे और अन्य तीन से बच्ची का रेप करवाया। रेप कराने के समय वह खुद मौजूद थी।

पुलिस रिपोर्ट के मुताबिक बारामुला में उरी के रहने वाले मुश्ताक अहमद ने 2003 में स्थानीय महिला फहमीदा से शादी की थी। दोनों का एक बेटा भी है। लेकिन 2008 में मुश्ताक ने झारखंड की खुशबू से शादी कर ली, उसी से 9 साल की बेटी थी पीड़िता। मुश्ताक का अपनी बेटी से ज्यादा प्यार करने के कारण फहमीद उससे बदला लेना चाहती थी। पुलिस ने बताया कि फहमीद उस वक्त मौजूद थी जब पांच लोगों ने बच्ची के साथ बलात्कार किया। बलात्कार के बाद बच्ची की बेरहमी से हत्या कर दी गई, पहचान छिपाने के लिए उसके चेहरे पर तेज़ाब डाल कर शव को जंगल में फेंक दिया।

बारामुला की यह घटना इतनी वीभत्स है कि शैतान की भी रूह कांप जाए लेकिन कठुआ पर जिन पत्तलकारों, वामी ब्रिगेड ने दिन रात हिन्दुओं को बदनाम करने के लिए ट्वीटर पर अभियान चला रखा था उनका कलेजा नहीं पसीजा! सवाल उठता है कि कठुआ मामले में आसमान को सिर पर उठाने वाले वामी ब्रिगेड आज कहां हैं? आज कहां है द प्रिंट के संपादक शेखर गुप्ता तथा बरखा दत्त जैसे पत्रकार, जिन्होंने कठुआ मामले में साजिश के तहत ट्वीट कर हिंदुओं को अपमानित करने का खेल खेला था। कहां गई जेएनयू में पढ़ने के नाम पर इस मामले का दोहण कर पैसे कमाने वाली शाहिला रशीद जैसी एक्टिविस्ट। आज क्यों नहीं उनकी जवान खुल रही है।

इस मामले को देखते हुए आप कठुआ मामले को आसानी से समझ सकते हैं और उस मामले में की गई साजिश को भी समझ सकते हैं। ध्यान रहे कि जब पति से बदला लेने के लिए एक महिला अपनी सौतेली बेटी को अपने ही सगे बेटे से गैंगरेप करवाने के साथ निर्मम हत्या कर सकती है। तो क्यों नहीं हिंदुओं को बदनाम करने के लिए इसी प्रकार की साजिश रची जा सकती है? यह सवाल इसलिए क्योंकि कठुआ मामले में अभी तक जो भी सबूत सामने आए हैं वह इसी प्रकार की किसी साजिश की ओर इशारा करते हैं। इस मामले ने कठुआ मामले को लेकर तत्कालीन जम्मू एवं कश्मीर की महबूबा मुफ्ती सरकार पर भी सवाल खड़ा कर दिया है। जिस प्रकार वारामुला मामले को पुलिस ने एक अपराध के रूप में सुलझाने की चेष्टा की है इसी प्रकार कठुआ मामले को क्यों नहीं सुलझाया गया। आखिर क्यों पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने दखल देकर जांच को प्रभावित किया?

वारामुला मामले के आलोक में कठुआ मामले को लेकर वामी पत्रकारों की करतूत से लेकर त्तत्कालीम महबूबा सरकार की साजिश तक के खिलाफ कई सवाल हैं जिसका जवाब मिलना जरूरी है। कठुआ मामले का सही जवाब तो तभी मिल सकता है जब उसकी जांच सीबीआई से कराई जाए। तभी तो अभी तक इस मामले के आरोपी अभी तक सीबीआई जांच के आदेश के इंतजार में हैं। जबकि इस मामले में खेल करने वाले चैन से सो रहे हैं। क्योंकि न तो उन्हें अपराधियों की गिरफ्तारी से मतलब था न ही पीड़ितों को न्याय दिलाने से, उन्हें तो सिर्फ हिंदुओं के खिलाफ अभियान चलाकर अपना उल्लू सीधा करना था।

URL: A woman, her son and three others have been arrested in the gang-rape and murder of a nine-year-old girl in north Kashmir

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