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इमरान खान के लिए भारत की कोई महिला पत्रकार बिना अंगिया पहने चली जाए तो फिर उसका उद्देश्य साक्षात्कार लेना नहीं, बल्कि ‘कुछ और’ है!

वामपंथ ने हमेशा, विरोधियों के चरित्र का हनन किया है, जबकि इनका खुद का चरित्र बहुत गिरा हुआ है। इसलिए मैंने कांगी-वामी के चरित्र का मनोवैज्ञानिक विश्लेषण करने का बीड़ा उठाया है ताकि कांटे को कांटे से निकाल सकूं।

पूर्व में राहुल गांधी के अधोवस्त्र-विहीन मनोविज्ञान को लोगों ने काफी सराहा था। आज पढि़ए एक वामपंथी भारतीय महिला पत्रकार के अधोवस्त्र विहीन प्रदर्शन पर, जो उसने इमरान खान के समक्ष किया था! हालांकि मैंने उस महिला की पहचान को गुप्त रखा है और उसकी तस्वीर को भी एडिट कर दिया है ताकि महिला की गरिमा बनी रहे। लेकिन ये वामपंथी किसी की गरिमा का ख्याल नहीं रखते, आप सब ने पीएम मोदी पर उनकी पत्नी को लेकर हमला और फिर एक लड़की की जासूसी कराने की कहानी के झूठ के रूप में आप इसे वर्तमान में पढ़ और देख चुके हैं! फिर से कहूंगा, नैतिकतावादी इस पोस्ट से दूर रहें, क्योंकि मैं कहीं से भी नैतिकता का ठेकेदार नहीं हूं! मैं शराब का नशा उतारने के लिए नसों में शराब चढ़ाने वाला पत्रकार हूं! धन्यवाद!

बहुत बड़े यौन मनोविज्ञानी हुए हैं हेवलॉक एलिस। उनकी एक किताब है- Psychology of sex. मेरा मानना है कि आधुनिक यौन-मनोविज्ञान को समझने के लिए सभी को इस किताब को जरूर पढ़ना चाहिए। उन्होंने रति-क्रीड़ा को समझाने के लिए इस किताब में ढेर सारे उदाहरण दिए हैं। इसी में एक उदाहरण में वह कहते हैं कि जब महायुद्ध चल रहा था तो हेग नगर के एक निवासी ने हिर्शफेल्ड को बताया कि जब वहां अंग्रेज सेना रहा करती थी तो कई सौ डच लड़कियां अंग्रेज सैनिकों की मोहक तथा तेज चाल से मुग्ध होकर गर्भवती हो गयी।

ऐसा नहीं कि सैनिकों के चलने से लड़कियां गर्भवती हुईं, बल्कि इसके जरिए यौन वैज्ञानिक हमें यह समझाने की कोशिश कर रहा है कि सैनिकों की चाल के आकर्षण से लड़कियां सुध-बुध खो जाती थीं।

एक दूसरा उदाहरण पक्षियों से…

उन्होंने रतिक्रीड़ा को समझाने के लिए पक्षियों और पशुओं का भी सहारा लिया। चिडि़यों के मनोहर पंख, उनका गायन, आत्मप्रदर्शन, ठुमक-ठुमक कर चलना, नर्तन आदि सभी बातें रतिक्रीड़ा के ही अंग हैं। यह मानो एक तरीक है जिससे नर चिडि़या, मादा चिड़ी को यौन रूप से प्रेरित करता है और उसके अंदर साहचर्य के लिए कामना जगाता है। यही बात सारी सभ्यता में देखी जाती है, वह चाहे मनुष्य हो, पशु हो या पक्षी।

इमरान खान और बिना अंगिया की महिला पत्रकार

पाकिस्तान में जब से पूर्व क्रिकेटर इमरान खान चुनाव जीते हैं, भारत की कुछ महिलाओं की दशा डच लड़कियों और आत्मप्रदर्शन में लीन पक्षियों की भांति हो गयी हैं। देश की एक मशहूर सोशलाइट लेखिका, जो सेमी-पोर्न लिखती रही है, इमरान से गले लगने के लिए बेचैन और उतावली है। वहीं, देश की एक मशहूर महिला पत्रकार अपना अधोवस्त्र विहीन (अंगिया) तस्वीर को पोस्ट कर इमरान से अपनी अंतरंगता का खुलेआम प्रदर्शन कर रही है।

इमरान खान के बारे में कहा जाता है कि जब वह क्रिकेटर थे तब लड़कियां और महिलाएं उन पर जान छिड़कती थीं और उनसे अंतरंग संबंध बनाने के लिए उतावली रहा करती थीं। इसकी पुष्टि इससे भी होती है कि इमरान खान की जिंदगी में ढेर सारी महिलाएं आयी। कितनी सारी उन्होंने शादियां की। उनकी एक पत्नी ने तो किताब लिखकर बताया कि भारत में इमरान खान की पांच नाजायज संतानें हैं, जो उन महिलाओं से पैदा हुई हैं जो इमरान खान के साथ एक रात के संबंध को जीने वाली रही हैं। दुनिया के अन्य हिस्सों में भी इमरान के प्रति महिलाओं की यही दीवानगी रही है।

अश्लीलता और भद्देपन का प्रदर्शन

उस महिला पत्रकार ने इमरान की जीत के बाद अपना एक पूर्व तस्वीर इमरान के साथ डाला है। पूर्व में वह इमरान खान के घर पर उसका साक्षात्कार लेने गयी थी। उसके साथ एक अन्य महिला पत्रकार भी है। उस महिला पत्रकार के पहनावे से लग रहा है कि ठंढ़ के मौसम में इमरान का साक्षात्कार लिया गया है, क्योंकि उस महिला ने जैकेट पहन रखे हैं।

जबकि दूसरी महिला ने स्वेटर या जैकेट तो छोडि़ए, जो वस्त्र पहन रखा है, वह भी उसके शरीर की पारदर्शिता को उभार रहा है। इसी तस्वीर में यह स्पष्ट होता है कि महिला ने अंदर अंगिया नहीं पहनी है, जिसके कारण उनके शरीर कर उभार बेहद अश्लील और भद्दे तरीके प्रदर्शित हो रहा है।

यहां यह बता दूं कि यह तस्वीर झूठी नहीं है, बल्कि खुद उस महिला ने अपने एक सोशल प्लेटफॉर्म से इसे शेयर किया है। चूंकि इंडिया स्पीक्स उस महिला पत्रकार की पहचान को उजागर नहीं करना चाहता, इसलिए उनके और उनके साथी के चेहरे को ब्लर कर दिया गया है। उनके वस्त्र के रंग भी बदल दिए गये हैं ताकि उनकी पहचान उजागर न हो सके। इमरान खान को यथावत रखा गया है। हालांकि महिला पत्रकार ने खुद ही अपनी तस्वीर जारी की थी, इसलिए हमें इसे छुपाने की भी जरूरत नहीं थी, फिर भी वह यदि अपना सम्मान नहीं करती, तो हमें तो एक महिला के नाते उनका सम्मान करना ही चाहिए, इसलिए हमने पहचान छुपाया है। वैसे भी यह केवल एक महिला का विश्लेष्ण नहीं, बल्कि उन जैसी अनेक सोशलाइट महिलाओं की मनोवृत्ति का विश्लेषण है।

महिला पत्रकार की तस्वीर और एलिस व फ्रायड का विश्लेषण?

हैवलॉक लिखते हैं कि इस प्राणी जगत में जहां भी स्त्रियों और पुरुषों का अस्तित्व है, रतिक्रीड़ा की संभावना हमेशा बनी रहती है। यौन मिलन के लिए यौन उत्तेजना की पराकाष्ठा धीरे-धीरे आती है, लेकिन उसके पहले कई प्रक्रियाएं करनी होती है, आत्मप्रदर्शन ऐसी ही एक क्रिया है।

सभ्यता के उच्चतम सोपानों में भी मानसिक सतह पर हम इसे देख सकते हैं। एलिस लिखते हैं कि स्त्रियांे में कामुकता विशेष-विशेष समय पर जोर मारती है और यह लगातार दीप्त नहीं रहती है। यह वह मानसिक प्रवृत्ति है, जिसमें रतिक्रीड़ा का प्रयास सुप्त रूप से मौजूद रहता है।

उस तस्वीर को यदि देखें तो एक महिला जहां संस्कारी रूप से जैकेट पहने हुए है, और वह इमरान खान से दूर खड़ी है। वहीं दूसरी महिला इमरान खान से एकदम चिपक कर खड़ी है। उसके चेहरे पर बेशर्म मुस्कुराहट है। अंगिया विहीन उसका एक उरोज इमरान के शरीर की ओट में दबा है तो दूसरा, बाहर अश्लील ढंग से झांक रहा है।

उस महिला के भाव-भंगिमा को देखकर साफ लगता है कि वह जानबूझ कर बिना अंगिया पहने इमरान खान के घर पहुंची थी। यहां यह भी ध्यान देने वाली बात है कि यह साक्षात्कार इमरान के कार्यालय नहीं, बल्कि उनके घर पर हुआ था, जिसका खुलासा खुद उस महिला ने किया है! घर? यानी गोपन का अवसर! कार्यालय यानी सार्वजनिकता का एहसास!

संभवतः महिलाओं के अंदर इमरान खान के प्रति आकर्षण का असर इस महिला पत्रकार के अवचेतन मन पर भी हो, इसलिए जानबूझ कर उसने साक्षात्कार के लिए उसके घर जैसे गोपनीय जगह को चुना और वहां अपने गोपन अंग को अनावृत्त करके गयी ताकि अवसर मिलने पर आपस में गोपनीय संबंध कायम हो सके! यह एक तरह से अपने साथ अंतरंगता के लिए अवसर उपलब्ध कराने का प्रतीकात्मक प्रकटीकरण था।

मनोविश्लेषक फ्रायड कहते हैं कि अवचेतन मन के अंदर गोपन स्थल पर गोपनीयता के भंग होने की इच्छा हमेशा बंद रहती है जो अवसर पाकर कभी भी अनावृत्त होने का जोखिम ले सकती है! यानी ऐसे लोगों के अवचेतन पर आघात पड़ते ही वह सामने वाले को यौन-आमंत्रण दे सकती है और इसकी संभावना अकसर रहती है।

उक्त महिला पत्रकार की इमरान खान के साथ तस्वीर को यदि गौर से देखें तो अवचेतन पर आघात और उससे उत्पन्न मनोवेग की फ्रायडियन थ्योरी हमें सच के निकट खड़ी नजर आ सकती है।

ऐसे अवसर पर महिलाओं के पहनावे का मनोविज्ञान

हैवलॉक एलिस ने ऐसे अवसर पर महिलाओं के पहनावे का भी यौन-विश्लेषण में उपयोग किया है। वह लिखते हैं कि कपड़ों का विकास लज्जा का पोषण करता है। लज्जा एक तरफ तो पुरुष की कामेच्छा का दमन करती है तो दूसरी तरफ स्त्री के नाज-नखरे को सहारा देती है, जिसका उद्देश्य पुरुष को प्रलोभन देना है। उन्होंने उदाहरण दिया कि कई जंगली जातियां संपूर्ण रूप से नग्न रहकर भी लज्जा प्रदर्शित करती हैं। एलिस कहता है कि लज्जा शुरू से लेकर आखिर तक रति-क्रीड़ा का एक अनिवार्य अंग है। लज्जा के संयम और विलंब के बिना पुरुष और स्त्री में यौन-आकर्षण उत्पन्न नहीं हो सकती है। वह यह भी लिखता है कि अपने लज्जा के प्रदर्शन से स्त्रियां यह भांप जाती हैं कि पुरुष किस गुण का है और वह उसके प्रति किस हद तक आकर्षित है।

यदि हम उक्त तस्वीर में देखें तो महिला पत्रकार की निर्लज्ज हंसी में लज्जा का भाव बना हुआ है। यह उसकी अधमुंदी आंख एवं उसके अंगिया-विहीन एक उरोज की दशा को देखकर कोई भी आसानी से समझ सकता है। वहीं इमरान खान के चेहरे पर कठोरता का भाव है, जो उस महिला पत्रकार के एक अंग के अपने अंग से दबे होने को छुपाने के भाव से उपजा है। याद रखिए, उस वक्त तस्वीर खींची जा रही थी, इसलिए इमरान ने अपने चेहरे पर किसी तरह के लालित्य की जगह कठोरता के भाव को उभारा है ताकि वह जो दबा है, उनके चेहरे के भाव में प्रदर्शित न हो सके!

इसका सामाजिक विश्लेषण

यह साक्षात्कार वैसे तो इमरान खान की जीत से पहले का है, लेकिन जिस तरह से उस महिला ने इस तस्वीर और इसके बाद इमरान के पक्ष में अपने लेखन को उतारा है, वह दिखाता है कि वह इमरान की जीत से किस कदर उत्साहित और उत्तेजित है। वह इमरान की आलोचना करने वालों पर भूखी होकर टूट पड़ती है। इस तस्वीर को उसने जानबूझ कर अपनी और इमरान खान की अंतरंगता को दिखाने के लिए अपने अर्काइव से निकाला है। यह एक तरह का मनोरोग है, जिसे मनोविश्लेशण फ्रायड ने इच्छापूर्ति के अपने व्याख्यान के आधार पर समझाया है। फ्रायड ने कहा है, ऐसे लोग अपनी दमित इच्छा की खुलेआम पूर्ति करना चाहते हैं और ऐसा कई बार अपने स्वप्न में करते हैं।

मनोवैज्ञानिक मोल ने इस तरह के कृत्य को ‘पूर्वराग’ कहा है तो एलिस ने ‘यौन निर्वाचन’ और हावर्ड ने ’तरजीहात्मक यौन’। इस सबका तात्पर्य यही है कि कम सुंदर स्त्रियां सुंदर और कामुक पुरुषों द्वारा निर्वाचित होने यानी उनकी अंतरंगता पाने के लिए यह सब सारे उपक्रम करती है। उक्त तस्वीर को गौर से देखने पर साफ-साफ यह दृष्टिगोचर होता है एक महिला पत्रकार केवल पत्रकारिता के उद्देश्य से इमरान का साक्षात्कार लेने उसके घर गयी थी, तो उसके साथ ही दूसरी महिला पत्रकार का लक्ष्य इमरान खान के साक्षात्कार से अधिक उसके द्वारा निर्वाचित होना और उससे अंतरंग तरजीह पाना था। और उसकी तैयारी इसी को लेकर थी!

नोट: मनोविज्ञान से सम्बंधित अन्य खबरों के लिए नीचे पढें:

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URL: a women journalist exposed her Brest in front of Imran khan

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Sandeep Deo

Sandeep Deo

Journalist with 18 yrs experience | Best selling author | Bloomsbury’s (Publisher of Harry Potter series) first Hindi writer | Written 8 books | Storyteller | Social Media Coach | Spiritual Counselor.

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