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India Speak Daily > Blog > समाचार > देश-विदेश > आखिर ज्योति यादव को फैज़ल जैसों से इतनी मोहब्बत क्यों है?
देश-विदेश

आखिर ज्योति यादव को फैज़ल जैसों से इतनी मोहब्बत क्यों है?

Sonali Misra
Last updated: 2020/05/20 at 11:47 AM
By Sonali Misra 168 Views 8 Min Read
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8 Min Read
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वह महिलाओं के लिए लिखने का दावा करती हैं! वह कथित रूप से दलितों और पिछड़ों के लिए लिखने का दावा करती हैं और वह कथित पितृसत्ता के खिलाफ लिखने का दावा करती हैं. पहले तो भारत में कई स्त्रीवादियों को यह पता ही नहीं होगा कि आखिर यह पितृसत्ता है क्या? खैर, यह मामला थोडा अलग हो जाएगा. पर यह अलग होते हुए भी यही रहेगा, भ्रामक, विषय से भटकाने वाला और गोल गोल घुमाकर अंतत: भारतीय समाज को बदनाम करने वाला. ज्योति यादव की भारतीय समाज विरोधी सोच अत्यंत घातक है. या कहें कोई भी मामला हो वह उसे भारत या भारतीय समाज को खलनायक बनाकर पेश कर देती हैं. मामला यहाँ पर कोई भी हो, हमने देखा था कि बॉयज लाकर रूम में भी अंतत: वह भारतीय समाज के खिलाफ जहर उगलती हुई नज़र आई थीं. फिर जब अंत में यह साबित हुआ कि वह अश्लील चैट लड़की ने की थी, वह कुछ नहीं बोली थीं.

मजे की बात यह है कि जिस पितृसत्ता की बात वह करती है और जिस पितृसत्ता की बुराई करते हुए वह अघाती नहीं हैं, वह पितृसत्ता भी उनकी धर्म आधारित पितृसत्ता है. जब भी कभी कठघरे में मुस्लिम होगा, तब वह सफाई देने के लिए मैदान में उतर आती हैं. जिन दिनों वह बॉयज लाकर्स रूम के बहाने भारतीय हिन्दू समाज को कोस रही थीं, उन्हीं दिनों उन्ही के पोर्टल के लिए लिखने वाली एक होनहार एवं मुस्लिम पत्रकार रिजवाना तबस्सुम ने बनारस में आत्महत्या कर ली थी और उसके लिए एक स्थानीय सपा नेता को उत्तरदायी ठहराया गया था. अब देखिये ज्योति यादव ने उस मुस्लिम सपा नेता के खिलाफ कुछ नहीं कहा. उन्होंने यह नहीं कहा कि शमीम ऐसा था, या वैसा था या पितृसत्ता का प्रतीक है. बल्कि प्रिंट ने बहुत ही महीन रेखा खींचते हुए कहीं न कहीं रिजवाना को ही कसूरवार ठहरा दिया है. जब प्रिंट की टीम यह लिखती है कि प्रिंट की पत्रकार ने आत्महत्या कर ली तो वह यह भी साथ में लिखती है कि यह मामला प्रेम का हो सकता है. दि प्रिंट (The Print) की रिपोर्ट में लिखा है कि “पुलिस का कहना है कि रिज़वाना अपने घर पर एक नोटिस बोर्ड पर ‘शमीम नोमानी जिम्मेदार हैं’ लिखकर छोड़ गई हैं.मामला प्रेम-प्रसंग से संबंधित भी हो सकता है. नाम न छापने की शर्त पर रिजवाना के एक दोस्त ने बताया कि शमीम और रिजवाना में काफी समय से दोस्ती थी लेकिन अचानक क्या हुआ इसकी किसी को जानकारी नहीं.” कितनी आसानी से ज्योति यादव जैसी स्त्रीवादियों ने रिजवाना की आत्महत्या के लिए उसी को दोषी ठहरा दिया और प्रेम प्रसंग में आत्महत्या के लिए उकसाने वाले शमीम नोमानी को अपनी तरफ से क्लीन चिट दे दी. जो ज्योति यादव उस शमीम नोमानी के खिलाफ एक भी शब्द खर्च नहीं करती हैं, वही ज्योति यादव आज उस फैज़ल सिद्दीकी के बचाव में उतर आई हैं, जिसने एक बेहद ही आपत्तिजनक एवं स्त्रियों के खिलाफ बेहद ही अपमानजनक एवं एक तरह से तेज़ाब के हमले को सही ठहराते हुए टिकटोक वीडियो अपलोड किया था.

https://twitter.com/jyotiyadaav/status/1262357670134251521

वह उसके बचाव में लिखती हैं “टिकटॉक स्टार फैजल सिद्दिकी का वीडियो कट कर के दिखाया जा रहा है. वीडियो की शुरुआत में वो पानी/शराब पी रहा है, वही लड़की के मुंह पर फेंकता है. इसका एसिड से कोई लेना देना नहीं है.

लड़की के मेकअप को एसिड अटैक का आधार ना बनायें, उसी मेकअप में उसने कई वीडियोज किये हैं.”

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फिर उसके आगे वह लिखती हैं

“डिस्क्लेमर: लड़के लड़कियों को लेकर टिकटॉक/इंस्टा/यूट्यूब पर पैट्रियार्की वाले वीडियोज बनते हैं, उनका समर्थन नहीं कर सकते. पर किसी बात को इस तरीके से घुमा देना भी सही नहीं है.”

अब जो ज्योति यादव का डिस्क्लेमर है उसे ध्यान से पढ़ा जाए. वह लिखती हैं कि किसी बात को इस तरीके से घुमा देना भी सही नहीं है. जब वह यह लाइन लिखती हैं तो क्या यह टाइप करते समय उनके हाथों ने उनका साथ दिया होगा? कई बार यह प्रश्न खुद से कर चुकी हूँ. जब वह यह लिखती हैं कि किसी बात को इस तरह घुमाना नहीं चाहिए तो वह अपने उन तमाम लेखों को भूल जाती हैं, जिसे वह घुमा घुमा कर पूरी जलेबी बनाकर यह भाजपा और हिंदुत्व को दोषी ठहराती हुई नज़र आती हैं. जैसा हम हाल ही में देख चुके हैं. जैसा अभी उनकी हाल ही में की जो उन्होंने मजदूरों के एक राज्य से गृह राज्य में जाने की यात्रा है उसकी रिपोर्ट में दिखता है. ज्योति यादव को किसी भाजपा सरकार के अलावा किसी का भी कोई दोष नज़र नहीं आता. वह कभी भी राज्य सरकारों पर दोष नहीं मढ़तीं, वह मोदी सरकार के प्रति इस कदर कुंठा से भरी हुई हैं कि हर खबर का अंत केवल और केवल मोदी विरोध ही होता है. जिन्हें हर बात अस्पष्ट पीड़ा में मोदी का प्रत्यक्ष हाथ दिखाई दे जाता है, उनकी दिव्य दृष्टि फैज़ल का दोष देखने के लिए बिलकुल भी तैयार नहीं है. वह फैजल को निर्दोष ठहरा रही हैं, उसी तरह जैसे उन्होंने रिजवाना के लिए आँखें मूँद ली थीं, उसी तरह उन्होंने उस विकृत मानसिकता के प्रति आँखें मूँद ली हैं, जो मानसिकता फैज़ल और फैजल जैसे लोग फैला रहे हैं. यह लोग जानबूझकर न केवल स्त्रियों के प्रति हिंसा को बढावा दे रहे हैं बल्कि उसके साथ हिन्दू और मुसलमानों के बीच नफरत भी फैला रहे हैं. फैजल के कई वीडियो सामने आए हैं, एक वीडियो में वह एक लड़की को पीटते हुए जैसे दिखाई देता है, लड़की से वह शादी की बात करता है तो लड़की कहती है कि वह माने फैजल मुसलमान है, लड़की के पापा नहीं मानेंगे. अगले ही दृश्य में लड़की का चेहरा सूजा हुआ और लाल दिखाई देता है और आवाज़ आ रही है कि पहले यह नहीं सोचा था.

दरअसल ज्योति यादव जैसे लोगों का एक ही उद्देश्य है, एजेंडा परक पत्रकारिता करना.उनका एक ही एजेंडा है, भाजपा विरोध के बहाने पूरी तरह से हिन्दुओं का और हिंदुत्व का विरोध! पूरी की पूरी भारतीय संस्कृति को गाली देना, भारत को नीचा दिखाना. समझ नहीं आता कि ज्योति यादव जैसी लड़कियों को फैज़ल जैसे लड़कों से इतनी सहानुभूति क्यों हैं? क्यों वह हर कुतर्क करके फैजल जैसों को बचाने के लिए जमीन आसमान एक करके कुतर्क खोजकर लाती हैं!

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TAGGED: Faisal Siddiqui, Jyoti Yadav, Tik Tok, TikTok
Sonali Misra May 20, 2020
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Sonali Misra
Posted by Sonali Misra
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सोनाली मिश्रा स्वतंत्र अनुवादक एवं कहानीकार हैं। उनका एक कहानी संग्रह डेसडीमोना मरती नहीं काफी चर्चित रहा है। उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति कलाम पर लिखी गयी पुस्तक द पीपल्स प्रेसिडेंट का हिंदी अनुवाद किया है। साथ ही साथ वे कविताओं के अनुवाद पर भी काम कर रही हैं। सोनाली मिश्रा विभिन्न वेबसाइट्स एवं समाचार पत्रों के लिए स्त्री विषयक समस्याओं पर भी विभिन्न लेख लिखती हैं। आपने आगरा विश्वविद्यालय से अंग्रेजी में परास्नातक किया है और इस समय इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय से कविता के अनुवाद पर शोध कर रही हैं। सोनाली की कहानियाँ दैनिक जागरण, जनसत्ता, कथादेश, परिकथा, निकट आदि पत्रपत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं।
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2 Comments 2 Comments
  • Avatar Mritunjya 2008 says:
    May 20, 2020 at 12:24 pm

    Jab maut aati hai to..

    Loading...
    Reply
  • Avatar Acharya Vatsa says:
    May 31, 2020 at 9:51 pm

    well said

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    Reply

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