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कश्मीर मामले को ज्यादा उलझा रहा है वाम दलों का अलगाववादी प्रेम !

रासबिहारी । पिछले ढाई महीने से कश्मीर घाटी हिंसा की आग में सुलग रही है। आतंकवादी बुरहान वानी के सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में मारे जाने के बाद कश्मीर में हिंसा के कारण लगातार कर्फ्यू लगा रहा है। ऐसे माहौल में सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल ने कश्मीर घाटी का दौरा किया और विभिन्न राजनीतिक दलों और नागरिकों से बातचीत की। प्रतिनिधिमंडल में 20 दलों के 26 सांसद शामिल थे।

प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने की। प्रतिनिधिमंडल में वित्त मंत्री अरुण जेटली, प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह, राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद, लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खडगे, वरिष्ठ कांग्रेस नेता अंबिका सोनी, केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान लोजपा,जदयू नेता शरद यादव, माकपा महासचिव सीताराम येचुरी और भाकपा नेता डी राजा शामिल हैं। राकांपा के तारिक अनवर, तृणमूल कांग्रेस के सौगत राय, शिवसेना के संजय राउत और आनंदराव अडसुल, तेलगूदेशम पार्टी के टी नरसिंहन, अकाली दल के प्रेमसिंह चंदूमाजरा, बीजद के दिलीप टिर्की, एआईएमआईएम के असदुद्दीन ओवैसी,एआईयूडीएफ के बदरद्दीन अजमल और मुस्लिम लीग के ई अहमद भी हैं। प्रतिनिधिमंडल में टीआरएस के जितेंद्र रेड्डी, आरएसपी के एन के प्रेमचंद्रन, अन्नाद्रमुक के पी वेणुगोपाल, द्रमुक के तिरचि शिवा, वाईएसआर-कांग्रेस के वाई बी सुब्बा, राजद के जयप्रकाश यादव, आप के धर्मवीर गांधी और इंडियन नेशनल लोकदल के दुष्यंत चौटाला ने कश्मीर घाटी का दौरा किया।

पहले दिन प्रतिनिधिमंडल ने समाज के विभिन्न वर्गों से संबंधित करीब 30 समूहों में आये करीब 200 सदस्यों से मुलाकात की तथा जम्मू कश्मीर के वर्तमान हालात को लेकर आम समाधान तक पहुंचने के लिए उनका दृष्टिकोण सुना। केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह के नेतृत्व वाले प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य धारा के वर्गों से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल के पांच सदस्यों का एक समूह उससे अलग होकर अलगाववादियों से मिलने गया। चार सांसद,माकपा महासचिव सीताराम येचुरी, सीपीआई नेता डी राजा,जदयू नेता शरद यादव और आरजेडी के जयप्रकाश नारायण समूह से अलग हुए और गिलानी से मिलने के लिए उनके आवास पर गए।

गिलानी के आवास के गेट सांसदों के लिए खोले ही नहीं। गिलानी ने उन्हें खिड़की से देखा लेकिन सांसदों से मिलने से इनकार कर दिया। एआईएमआईएम नेता असदुद्दीन ओवैसी हुर्रियत कान्फ्रेंस के उदारवादी धड़े के नेता मीरवाइज उमर फाररूक से चश्मा शाही उप जेल में अलग से मिलने के लिए गए जहां उन्हें बंद रखा गया है। मीरवाइज ने ओवैसी से संक्षिप्त मुलाकात की जिस दौरान मात्र दुआ सलाम हुई। ओवैसी के असफल प्रयास के बाद येचुरी, यादव, राजा और नारायण वाला एक समूह मीरवाइज से मिला।

समूह जेकेएलएफ प्रमुख यासीन मलिक से भी मुलाकात करने के लिए गया जो हुमामा में बीएसएफ शिविर में हिरासत में है। मलिक ने सांसदों से कहा कि दिल्ली आने पर वह उनसे बातचीत करेंगे। समूह ने हुर्रियत के पूर्व अध्यक्ष अब्दुल गनी भट से भी मुलाकात का प्रयास किया लेकिन भट ने भी उनसे बात करने से इनकार कर दिया। भट ने नेताओं का स्वागत किया लेकिन स्पष्ट कर दिया कि यह निर्णय किया गया है कि प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों के साथ कोई बातचीत नहीं होगी। इससे पहले दिन में अलगाववादियों ने सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के महबूबा मुफ्ती के आमंत्रण को ठुकरा दिया। अलगाववादियों ने ऐसे कदम को ‘छल’ करार दिया और जोर देकर कहा कि यह ‘मूल मुद्दे के समाधान के लिए पारदर्शी एजेंडा आधारित वार्ता’ का कोई विकल्प नहीं हो सकता।

सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल की जम्मू-कश्मीर के दौरे के बाद दिल्ली में गृहमंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में सभी दलों ने घाटी में शान्ति और वार्ता की अपील की गई। सभी दलों ने यह भी कहा कि एक सभ्य समाज में हिंसा के लिए कोई स्थान नहीं है। सभी दलों ने केंद्र तथा राज्य सरकार से आग्रह किया कि वो राज्य में शांति बहाली के लिए सभी पक्षों से बात करे। सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल में शामिल माकपा महासचिव सीताराम येचुरी ने प्रतिनिधिमंडल के दौरे को विफल बताया। हम हुर्रियत नेताओं से इसलिए मुलाकात करना चाहते थे ताकि वो जम्मू-कश्मीर की जनता को बता सकें कि वो बातचीत करना चाहते हैं। सीताराम येचुरी ने कहा कि हम हुर्रियत नेताओं से इसलिए मुलाकात करना चाहते थे ताकि वो जम्मू-कश्मीर की जनता को बता सकें कि वो बातचीत करना चाहते हैं। उन्होंने भारत पाकिस्तान से लगे सीमावर्ती इलाकों को लेकर भी कहा कि सीमा के आसपास रहे रहे लोगों के लिए बेहतर व्यवस्था करने की जरूरत है। सीताराम येचुरी कश्मीर के अलगाववादी नेताओं से बातचीत के लिए दवाब डालते रहे हैं। कुछ और नेता भी अलगाववादियों से बातचीत की सलाह देते रहे हैं।

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सरकार की सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल भेजने की कवायद को विफल तो बताया जा रहा है पर इस कोशिश से कश्मीर में पाकिस्तान की शह पर हिंसा फैलाने वाले पूरी तरह उजागर हो गए हैं। अलगाववादी नेताओं ने पाकिस्तान को खुश करने और आतंकवादियों के डर से ही सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात नहीं की। अलगाववादियों के संगठन हुर्रियत कान्फ्रेंस को कश्मीर घाटी में भारत विरोधी भावनाएं भड़काने के लिए पाकिस्तान लंबे से आर्थिक सहायता दे रहा है। भारत-पाकिस्तान के बीच बातचीत करने की कोशिशों को पाकिस्तान हमेशा पलीता लगाता रहा है। दोनों के देश के बीच होने वाली वार्ता से पहले पाकिस्तान हुर्रियत कान्फ्रेंस के नेताओं को बातचीत करने के लिए बुलाता रहा है।

पाकिस्तानी के इसी रवैये के कारण नाराज भारत ने पिछले साल अगस्त में दोनों देशों के विदेश सचिवों के बीच वार्ता रद्द कर दी थी। वार्ता से पहले भारत में पाकिस्तान के उच्चायुक्त ने अलगाववादी नेताओं को बातचीत के लिए बुलाया था। कश्मीर की आजादी के नाम पर अलगाववादियों ने ऑल पार्टी हुर्रियत कॉन्फ्रेंस का गठन किया था। 9 मार्च 1993 को को गठित किए इस संगठन में 28 दल शामिल थे। इनमें जमायत-ए-इस्लामी, मुस्लिम कॉन्फ्रेंस, पीपुल्स लीग, पीपुल्स कॉन्फ्रेंस, इत्तेहाद-ए-मुसलमीन, अवामी कॉन्फ्रेंस और जेकेएलएफ इत्यादि प्रमुख हैं। पाकिस्तान के दखल को लेकर 2003 में संगठन के दो टुकड़े हो गए थे। पाकिस्तान समर्थक अलगाववादी नेता अली शाह गिलानी ने तहरीक-ए-हुर्रियत के नाम से 7 अगस्त 2004 को अपना अलग संगठन बना लिया। गिलानी आतंकवादियों को समर्थन देते रहे हैं।

हाल ही में हुर्रियत नेता सैयद अली शाह गिलानी के सबसे बड़े बेटे डॉ. नईम के बैंक खातों की जांच की हैं। एनआईए की टीम उसके करीब 20 बैंक खातों की जांच कर रही है। इनमें कुछ गड़बड़ियां मिली हैं। घाटी में गड़बड़ी फैलाने के लिए लोगों के खातों में पैसे भेजे जाने की सूचनाएं मिलने के बाद एनआईए ने कार्रवाई की है। चार सांसद, माकपा महासचिव सीताराम येचुरी, सीपीआई नेता डी राजा, जदयू नेता शरद यादव और आरजेडी के जयप्रकाश नारायण के लिए घर के दरवाजे न खोलने वाले अलगाववादियों के सरदार सैयद अली शाह गिलानी ने पाकिस्तान केा दोस्त बताते हुए कहा कि उन्होंने एक बार फिर से साबित किया कि वे हमारे साथी हैं। गिलानी ने कहा कि पाकिस्ताान और उसके लोग हमारे दर्द को समझते हैं।

पाकिस्ताकन और उसके लोगों ने हमारे संघर्ष को नैतिक, राजनीतिक और कूटनीतिक सहयोग दिया है। गिलानी ने मीडिया को भेजे एक खत में कहा कि कश्मीर आजादी के करीब है। आजादी की लड़ाई का वर्तमान चरण आजादी के लक्ष्य के काफी करीब ले गया है। अब आजादी नजरों के सामने हैं। गिलानी ने यह खत प्रेस कांफ्रेंस की इजाजत न मिलने के कारण मीडिया को भेजा था। इस खत में गिलानी ने बुरहान वानी को शहीद बताया। सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में बुरहान वानी की मौत के बाद खुद गिलानी को दीवारों पर भारत विरोधी नारे लिखते देखा गया था। भारत के खिलाफ बयान देने का गिलानी का लंबा इतिहास है। भाजपा के राष्ट्रीय सचिव राम माधव ने पाकिस्तानी आतंकवादी कमांडर सैयद सलाहुद्दीन और हुर्रियत नेता सैयद अली शाह गिलानी को कश्मीर हिंसा का मास्टर माइंड बताया है। उन्होंने कहा है कि सलाहुद्दीन ने गिलानी के माध्यम से घाटी में अस्थिरता पैदा करने की योजना बनाई थी।

हाल ही में एक टीवी चैनल के साथ साक्षात्कार में राम माधव ने कहा कि दो माह से जारी अस्थिरता से घाटी पिछले छह वर्षो के दौरान सबसे खराब दिनों से गुजर रही है। इससे पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार पर कोई खतरा पैदा नहीं हो रहा है। गुलाम कश्मीर के मुजफ्फराबाद में बैठा सलाहुद्दीन कश्मीर में प्रदर्शन को भड़का रहा है। यह उससे प्रभावित लोगों द्वारा किया जा रहा है। गिलानी घाटी में प्रचार संभाल रहे हैं। इस बात में कोई संदेह नहीं है।

भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने भी सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के कश्मीर दौरे से पहले एक लेख में अलगाववादी नेताओं से बातचीत ने करने की बात कही थी। उन्होंने लिखा था कि कश्मीर के अलगाववादी नेता भारत को अपना सबसे बड़ा दुश्मन कहते रहे हैं। पाकिस्तान से मिलने वाले धन से ही अलगाववादी नेता भारत विरोधी गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं। कश्मीर की आजादी के लिए लड़ने वाले और आतंकवादियों को समर्थन देने वाले नेताओं से भारत को क्यों बातचीत करनी चाहिए। उन्होंने कहा है कि देश हित और देश की सुरक्षा सर्वोपरि है।जब बात बोली से न बने, तब गोली का प्रयोग करने में कोई बुराई नहीं है। उन्होने ट्वीट भी किया कि कि बिल्ली आंख बंद करके दूध पीती है और उसे लगता है उसे कोई नहीं देख रहा। आतंक के पनाहगार अब बख्शे नहीं जाएंगे।कैलाश ने आगे लिखा है कि लातों के भूत कभी बातों से नहीं मानते हैं,अलगाववादी नेताओं से बात कोई करने की आवश्यकता नहीं है। आतंकवादियों का साथ देने वाले के साथ भी आतंकवादी जैसा सुलूक होना चाहिए।

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कश्मीर घाटी का जायजा लेने गए सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल भेजने की योजना जम्मू कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की पहल पर बनी। अलगाववादियों से बातचीत की वकालत करने वालों को महबूबा मुफ्ती की इस बात पर गौर करने की जररूत है कि केवल पांच फीसदी लोगों ने बाकी 95 फीसदी लोगों को जीना हराम कर दिया है। इसके साथ ही कश्मीर जारी हिंसा के बीच महबूबा मुफ्ती ने एक बार फिर कहा कि एक तरफ जहां वे घाटी में बच्चों को हिंसा में शामिल होने के लिए भड़का रहे हैं वहीं यह सुनिश्चित करने में लगे हैं कि उनके अपने बच्चे विदेश या राज्य के बाहर पढ़ें। अलगाववादियों के बारे में महबूबा ने कहा कि वे बच्चों को तो गोलियों, पेलेट गन्सढ और आंसू गैस का सामना करने के लिए कहते हैं लेकिन खुद एक पुलिसकर्मी से डरते हैं। अलगाववादियों के बारे में यह भी खुलासा हुआ है कि कश्मीर में हिंसा फैलाने वाले लोग अपने बच्चों को किस तरह जेहाद से दूर रख रहे हैं।

कुछ समय पहले पाकिस्तान में भारत विरोधी आतंकवादियों के बच्चों के लिए कॉलेजों में कोटा तय करने का खुलासा हुआ है। हिजबुल मुजाहिदीन के चीफ कमांडर सैय्यद सलाहुद्दीन के कहने पर पाकिस्तान में ऐसे इंतजाम किए गए हैं। जम्मू कश्मीर में सक्रिय आतंकवादियों के परिजनों को वजीफे भी दिए जा रहे हैं। सलाहुद्दीन की सलाह पर ही मेडिकल कॉलेज, इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट कॉलेज में आतंकवादियों के बच्चों की पढ़ाई के इंतजाम किए गए हैं। पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई ऐसे आतंकवादियों के बच्चों के खर्च का इंतजाम करता है। खुद सलाहुद्दीन के चारों बेटे सरकारी नौकरी में हैं। सलाहुद्दीन का एक बेटा सईद मुईद श्रीनगर में एक सरकारी विभाग में आइटी इंजीनियर है। इस साल फरवरी में पांपोर हमले में सुरक्षाबलों ने उसे सुरिक्षत बचाया था। सईद अली शाह गिलानी का पूरा खानदान अच्छी नौकरी में है।

हुर्रियत कांफ्रेंस के उदारवादी गुट के चेयरमैन मीरवाइज मौलवी उमर फारूक, कट्टरपंथी नेता गुलाम नबी सुमजी, अशरफ सहराई, मास मूवमेंट की मुखिया फरीदा समेत कई अन्य कट्टरपंथी नेताओं के बेटे-बेटियां और रिश्तेदार सरकारी नौकरी कर रहे हैं या व्यवसाय में लगे हैं। इनमें कई तो सरकारी नौकरियों में हैं। पाकिस्तान कश्मीर में शरीयत लागू करने की वकालत करने वाली पाकिस्तान समर्थक महिला अलगाववादी नेता आसिया अंद्राबी ने खुद आतंकी कमांडर से शादी की थी। उसका खाविंद डॉ. कासिम फख्तु जेल में पर बड़ा बेटा बिन कासिम चार साल पहले गुपचुप तरीके से मलेशिया में अपनी मौसी के पास रह कर इस्लामिक यूनिवर्सिटी में सूचना प्रौद्योगिकी की पढ़ाई कर रहा है।

आसिया के रिश्तेदार भी विदेशों में अच्छी नौकरी कर रहे हैं। यह भी गौर करने की बात है कि आखिर जेहाद से अलगाववादियों ने अपने बच्चों को क्यों दूर रखा है। ऐसे ही लोगों पर निशाना साधते हुए महबूबा मुफ्ती ने कहा कि समय हमेशा इस तरह का नहीं रहेगा लेकिन घाव बच्चों के दिलों में रहेंगे जो इन लोगों ने दिये हैं। लोगों को मेरे शब्द कड़वे लग सकते हैं लेकिन उन्हें बाद में समझ आएगा कि मैंने इसलिए कहा क्योंकि मैंने लोगों को रात में सड़कों पर घूमते और बच्चों को प्रदर्शनों में शामिल होने के लिए भड़काते हुए देखा।

अलगाववादियों के बारे में और भी चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। एक तरफ तो कश्मीर में सुरक्षा बलों पर पत्थर फेंकने के लिए उकसाने वाले अलगाववादी नेताओं को पाकिस्तान से पैसा मिलता है और दूसरी तरफ भारत सरकार से तमाम रियायतें मिल रही है। गृहमंत्रालय के अनुसार जम्मू कश्मीर और केंद्र सरकार हुर्रियत नेताओं की यात्रा, होटल और सुरक्षा पर 100 करोड़ रुपये से ज्यादा सर साल खर्च करती है। सरकार के पैसे से अलगाववादी पंच तारा होटलों में आराम फरमाते और सरकारी गाडि़यों में ही घूमते हैं। एक हजार से ज्यादा सरकारी सुरक्षाकर्मी उनकी सुरक्षा में तैनात रहते हैं। यह भी खुलासा हुआ है कि सरकारी पैसे से उनके खाने-पीने का इंतजाम होता रहा है। पिछले छह वर्षों में अलगाववादियों पर केंद्र और राज्य सरकार लगभग 700 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। 2010 से 2015 तक कश्मीर में अलगाववादियों के घर की सुरक्षा के लिए 18 हज़ार पुलिसकर्मियों को तैनात किया था।

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अलगाववादियों की सुरक्षा पर 309 करोड़ खर्च किए गए। अलगाववादियों के पीएसओ पर 150 करोड़ रुपये खर्च किए गए। अलगाववादियों के होटल बिल भरने के लिए राज्य सरकार ने पांच साल में 21 करोड़ रुपये खर्च किए। अलगाववादियों ने सरकारी गाडि़यों में घूमने के लिए 26 करोड़ का तेल फूंका।
कश्मीर अलगाववादी नेताओं के खिलाफ कश्मीर में भी नाराजगी बढ़ रही है। कुछ लोगों ने पिछले ढाई महीने से कश्मीर को हिंसा की आग झोंक दिया है। 75 से ज्यादा लोगों की मौत हुई और दस हजार से ज्यादा घायल हुए हैं। इनमें सुरक्षाकर्मियों की तादाद ज्यादा है। हिंसक घटनाओं में बढोतरी के बाद दक्षिणी कश्मीर के ग्रामीण इलाकों में तैनात सुरक्षाकर्मियों की संख्या बढ़ाई जा रही है। केन्द्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को कहा कि इस वर्ष सीमा पार से कश्मीर में घुसपैठ की घटनाओं में बढ़ोतरी हुई है।

वर्ष 2015 में घुसपैठ की घटनाओं में कमी आई थी लेकिन इस वर्ष ये घटनाएं बढ़ी हैं। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि सेना और अर्धसैनिक बल इसे नियंत्रित करने में सफल रहे हैं। घुसपैठ की बढ़ती घटनाओं के कारण अर्ध सैनिक बलों की तादाद भी बढ़ाई जा रही है। दक्षिण कश्मीर के ग्रामीण इलाकों में भी अर्ध सैनिक बल भेजे जा रहे हैं। इससे हिंसा फैलाने वालों काबू किया जा सकेगा।

संकेत मिल रहे हैं कि केंद्र सरकार ने कश्मीर में शांति की बहाली के लिए अलगाववादी नेताओं के खिलाफ क़ी कार्रवाई की तैयारी कर ली है। अलगाववादी को मिल रही सुविधाएं भी बंद की जाएंगी। सरकारी खर्च बन्द करने के साथ ही पासपोर्ट रद्द किए जा सकते हैं। हुर्रियत कान्फ्रेंस के नेताओं द्वारा सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल को तवज्जो न देने के बाद केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने भी कार्रवाई के संकेत दिए हैं। सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के दौरे के समय ही उन्होंने कहा था कि हुर्रियत नेताओं का यह कदम जम्हूरियत, इंसानियत और कश्मीरियत के खिलाफ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अलगाववादी नेताओं के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा है। अफस्पा को लेकर सरकार ने फिलहाल कोई नरमी न दिखाने की बात की है। कश्मीर में ताजा हालातों से निपटने के लिए सख्ती की जरूरत है।

हैरानी की बात यह भी है कि कश्मीर में अलगाववादियों की ओर से केंद्रीय प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात से भी इन्कार किए जाने के बावजूद विपक्षी दल उनसे बातचीत के पक्ष में हैं। वामदलों ने तो पाकिस्तान को भी वार्ता में शामिल करने को कहा है। एक तो कांग्रेस के नेता देश की एकता और अखंडता के साथ समझौता न करने की बात कर रहे हैं और दूसरी तरफ अलगाववादियों को मिल रही सुविधाओं में कटौती न करने की बात कर रहे हैँ। लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खडगे ने खुद सर्वदलीय बैठक में यह मुद्दा उठाया।

सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल की बैठक में जम्मू कश्मीर की पीडीपी-भाजपा गठबंधन सरकार को लेकर कोई चर्चा बेशक न हुई हो पर इतना तो तय है कि विपक्षी दलों को यह सरकार रास नहीं आ रही है। नेशनल कांफ्रेंस के नेता उमर अबदुल्लाह भी अलगाववादियों के समर्थन में बयान दे रहे हैं। खासतौर पर वामदलों की अलगाववादियों की पसंद जानने की सलाह देने की राय बताती है कि ये दल कश्मीर में शांति लाने से ज्यादा मामले को उलझाने की रणनीति के काम कर रहे हैं।

पाकिस्तान की शह पर हिंसा फैलाने वाले, कश्मीर की आजादी के नारे लगाने वाले, पाकिस्तान का झंडा फहराने वाले, आतंकवादी की मौत पर मातम मनाने वाले, बच्चों को पत्थर फेंकने वाले, सासंदों को घर से वापस भेज देने वाले अलगाववादियों को विपक्षी दल इतनी तवज्जों क्यों दे रहे है? जब यह बात सामने आ गई है कि हाफिज और सलाहुद्दीन की शह पर अलगाववादी नेता भारत विरोधी घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं तो ऐसे में उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई कर अमन-चैन पसंद करने वाले लोगों को तरजीह देकर ही कश्मीर में शांति लाई जा सकती है।

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Ras Bihari

Ras Bihari

Senior Editor in Ranchi Express. Worked at Hindusthan Samachar, Hindustan, Nai Dunia.

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