राफेल पर राहुल के सारे झूठ को एयर मार्शल एसबीपी सिन्हा ने किया तार-तार!

अपने निहित स्वार्थ के लिए देश के हित की कीमत पर रक्षा सौदे के बहुराष्ट्रीय कंपनियों को लाभ पहुंचाने के लिए राफेल डील पर सवाल उठाने वाले राहुल गांधी का हर झूठ का तत्काल पर्दाफाश हुआ है। लेकिन राहुल गांधी मानने को तैयार नहीं हैं। राफेल डील को चुनावी मुद्दा बनाने को आतुर राहुल गांधी ने फेक न्यूज फैलाने में महारत हांसिल अखबार द हिंदू के फेक प्लॉट के आधार पर फिर से शुक्रवार को राफेल का मुद्दा उठाया। इस बार उन्होंने द हिंदू अखबार में छपे अर्धसत्य खबर को आधार बनाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला किया और आरोप लगाया कि राफेल डील के दौरान पीएमओ ने समानांतर बातचीत कर अनिल अंबानी को फायदा पहुंचाया। लेकिन इस बार राहुल गांधी और द हिंदू तथा उस ग्रुप के चेयरमैन एन राम के झूठ को राफेल प्राइसिंग कमेटी के पूर्व अध्यक्ष एयर मार्शल एसबीपी सिन्हा ने बेनकाब किया है। रिपब्लिक भारत के अर्नब गोस्वामी के साथ सिन्हा के एक्सक्लुसिव इंटरव्यू में न सिर्फ राहुल गांधी के अब तक के सारे झूठ बेनकाव हुए हैं बल्कि राफेल डील को लेकर कई खुलासे भी हुए हैं।

राहुल गांधी के झूठ के आधार को ही निराधार साबित कर दिया

राहुल गांधी ने जिस हिंदू अखबार के फेक न्यूज के आधार पर रक्षा मंत्रालय द्वारा आपत्ति जताने का आरोप लगाया उसे एयर मार्शल ने एसबीपी सिन्हा ने निराधार साबित कर दिया। उन्होंने कहा कि राफेल डील को लेकर रक्षा मंत्रालय को कोई आपत्ति नहीं थी। उन्होंने कहा द हिंदू अखबार में छपे ‘आर्टिकल में सारे तथ्य गलत तरीके से पेश किए गए हैं।’ इसके साथ ही उन्होंने कहा कि राफेल डील को लेकर जो सरकारी खरीद की प्रक्रिया शुरु हुई वह रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) के अनुमति के बाद होती है। और रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) के अध्यक्ष स्वयं रक्षा मंत्री होते हैं । ऐसे में रक्षा मंत्री इसके खिलाफ कैसे हो सकते हैं ?’ इसलिए जो लोग ये अफवाह फैला रहे हैं कि राफेल डील को लेकर रक्षा मंत्रालय ने आपत्ति दर्ज कराई थी, वे देश और देश की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।

नोट लिखने वाले शख्स का राफेल डील से कोई संबंध ही नहीं

पहली बात ये कि जो नोट है उसका अस्तित्व पर ही संदेह है, क्योंकि यह नोट लिखने वाले डिप्टी सेक्रेटरी एयर एसके शर्मा न तो इंडियन निगोसिएशन टीम के सदस्य थे ना ही इनका राफेल निगोसिएशन से कोई लेनादेना था। यह एमओडी के ऑफिसर थे जो बाकी कॉन्ट्रैक्ट निगोसिएशन में भाग लेते थे। लेकिन राफेल निगोसिएशन में उनकी कोई भूमिका नहीं थी। यह नोट उन्होंने क्यों लिखा और किसके लिए लिखा। यह एक अगल विषय है। और खत में उन्होंने जो मुद्दे उठाए हैं, ये मुद्दे इंडियन निगोसिएशन टीम के मामले थे। क्योंकि इंडियन नेगोसिएशन टीम में कभी चर्चा ही नहीं हुई है। ये एमओडी की फाइन नोटिंग है जो मैं पहली बार हिंदू न्यूज पेपर में देख रहा हूं’।

इसके साथ ही उन्होंने कहा कि ‘राफेल निगोसिएशन टीम में 7 अधिकारी थे। मैं उस टीम का चैयरमैन था। उस टिम में मेरे अलावा एयरफोर्स के एयरवाइस मार्शल समेत पांच भारत सरकार के संयुक्त सचिव थे। इसके अलावा रक्षा मंत्रालय फाइनेंस और रक्षा उत्पाद के अधिकारी थे। हमलोगों ने जो कुछ किया वह सामूहिक फैसले के आधार पर किया है। इस टीम में चिट्ठी लिखने वाले एसके शर्मा कहीं नहीं थे।’
इससे साफ हो गया है कि जिस व्यक्ति के नोट को द हिंदू अखबार ने एक्सक्लूसिव बताकर देश में राफेल पर फिर से बवंडर खड़ा करना चाहता था और जिसके आधार पर राहुल गांधी ने दोबारा ट्वीट कर भाजपा और मोदी सरकार पर निशाना साधना शुरु कर दिया था, दरअसल उस शख्स का राफेल सौदा से कोई संबंध ही नहीं था।

ऑफेसेट पार्टनर को एक पैसा नकद नहीं दिया गया

जो राहुल गांधी शुरू से मोदी को बदनाम करने के लिए अनिल अंबानी को ऑफसेट पार्टनर बनाकर 30 हजार करोड़ रुपये देने के आरोप लगा रहे हैं उस पर सिन्हा ने कहा कि आफसेट पार्टनर को एक पैसा भी नकद नहीं दिया गया है। एसबीपी सिन्हा ने कहा कि ‘राफेल डील में ऑफसेट पार्टनर को कोई नकद पैसा नहीं दिया गया।’ इस संदर्भ में उन्हों कहा ‘मैं एक चीज स्पष्ट करना चाहता हूं कि ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी (ToT) और ऑफसेट दो अलग-अलग चीजें हैं। ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी आप पैसे देकर खरीदते हैं और ऑफसेट क्रेडिट देते हैं। ऑफसेट में पैसे नहीं लगते हैं, मैंने देखा इतने लोग बात कर रहे हैं कि इतना करोड़ पैसा उसको गया लेकिन ऑफसेट में पैसे नहीं लगते हैं। जब आप कोई प्रोक्योरमेंट करेंगे विद ऑफसेट या ऑफसेट के बिना तो आपकी कीमत थोड़ी बढ़ेगी, इसे ऑफसेट लोडिंग कहते हैं। ऑफसेट इम्प्लीमेंट करने में जो कंपनी को कीमत आती है उसे ऑफसेट लोडिंग कहते हैं।’

ध्यान रहे कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी शुरू से ही यह आरोप लगाते रहे हैं कि प्रधानमंत्री ने व्यक्तिगत रुचि लेकर रिलायंस डिफेंस के अनिल अंबानी को 30 हजार करोड़ रुपये उनकी जेब में पहुचा दिए। एसबीपी सिन्हा ने यह साफ कर दिया कि राफेल डील में कोई नकद लेनदेना हुआ ही नहीं है।

राहुल गांधी ने राफेल पर सवाल खड़ा कर वायु सेना की साख पर लगाया बट्टा

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने अपने निहित स्वार्थ के लिए जिस राफेल डील पर सवाल खड़ा कर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बदनाम करने की कोशिश की उससे वह नहीं जानते हैं कि देश की वायुसेना पर क्या प्रभाव पड़ा है। राहुल और कांग्रेस की यही नीयत रही है देश या उसकी वायुसेना की प्रतिष्ठा भी उनके लिए कोई मायने नहीं रखते हैं। उन्होंने राफेल के बहाने देश की वायुसेना की साख पर बट्टा लगा दिया है। इस संदर्भ में एयर मार्शल एसबीपी सिन्हा का कहना है ‘ इस प्रोग्राम में आकर दुनिया के सामने सच रखने की हिम्मत मैं इसलिए कर पाया क्योंकि ‘व्हाट्सएप पर एक मैसेज वायरल हो रहा था, जिसमें सारे वायु सैनिकों को बोल रहे थे कि आपके वायुसेना को लोगों ने बेच दिया है। इसलिए मैं आया हूं कि सारे वायु सैनिक को बता सकूं कि पिछले 39 साल से आप लोग मेरी क्रेडिबिलिटी और प्रोफेसनलिज्म के गवाह हैं। और मैं यह आप सबको को आश्वस्त करता हूं कि इस प्रक्रिया में किसी तरह की कोई गड़बड़ी नहीं हुई है। यह बिलकुल सही है।’

जहां तक द हिंदू अखबार समूह के चेयरमैन एन राम, जिसने पत्रकारिता की गरिमा को गिराते हुए सच्च को भी अपने हिसाब से झूठ बनाने का का काम किया है, का सवाल है तो उसके बारे में इंडिया स्पीक्स डेली के संस्थापक संपादक संदीप देव ने अपने ट्वीट में खुलासा किया है। उनका कहना है कि एन राम ने कभी गंभीर पत्राकारिता की ही नहीं। वह तो कम्युनिस्ट पत्रकार के वेश में हमेशा ही बिचौलिया की भूमिका निभाता रहा है। उनका कहना है कि जिस प्रकार राफेल डील पर उन्होंने फेक न्यूज किया है उससे साबित होता है कि वह एक बार फिर यूरोफाइटर की दलाली के लिए ही यह काम किया है।

इतना सबकुछ सुनने देखने के बाद तय तो आपको ही करना है कि आपका विश्वास किस पर है? देश की सेवा में हंसते-हंसते अपनी जान देने वाले वायु सेना के प्रतिष्ठित अधिकारी पर या फिर हमेशा से झूठ बोलते आ रहे कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पर?

राफेल प्राइसिंग कमेटी के पूर्व अध्यक्ष एयर मार्शल एसबीपी सिन्हा ने जिस प्रकार राफेल डील की सच्चाई से अपने वायु सैनिकों के साथ देश की जनता को अवगत कराई है इससे राफेल डील और राहुल गांधी के झूठ पर दूध का दूध और पानी का पानी हो गया है। वैसे तो देश की रक्षा मंत्री से लेकर प्रधानमंत्री तक यही कहते आ रहे हैं कि यह सौदा दो सरकारों के बीच का है इसलिए इसमें किसी प्रकार का सवाल खड़ा नहीं किया जाना चाहिए। देश के सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही इस डील को पारदर्शी और सही बता चुका है। फिर भी राहुल गांधी है कि इसे चुनावी मुद्दा बनाने से बाज नहीं आते। हालांकि अभी तक जितनी बार इस मसले को उठाने का प्रयास किया है उतनी ही बार मुंह की खानी पड़ी है।

URL : air marshal sinha said all allegation of rahul on rafale are baseless !

Keywords : rafale deal, rahul gandhi, The hindu

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