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भारत में धर्मांतरण को बढ़ावा देने वाले अमेरिकन ‘NGO’ ने नरेंद्र मोदी सरकार के सामने घुटने टेके!

मोदी सरकार के सख्त नियमों के बाद धर्मान्तरण व राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में लिप्त एनजीओ को मिलने वाला खाद-पानी बंद हो गया है। भारत में 344 NGOs को प्रतिवर्ष 292 करोड़ रुपये डोनेट करने वाला, अमेरिकी एनजीओ ‘Compassion International’ ने भारत में अपनी गतिविधियां बंद करने की घोषणा कर दी है। 10 महीने पहले गृह मंत्रालय ने इस एनजीओ को भी निगरानी सूची में डाला था। NGO के उपाध्यक्ष द्वारा विदेश सचिव एस जयशंकर से मिलने के बावजूद नियमों को ढीला कराने में उसे सफलता नहीं मिली है।

जैसा के हम पहले भी बता चुके है कि भारत में मोदी सरकार बनने के बाद एनजीओ की गतिविधियां अचानक तेज हो गयी थीं। भारत में एनजीओ की गतिविधियां सदा से सन्देश की भूमिका में रही है इस बात का अंदाजा सिर्फ इस बात से लगाया जा सकता है 2007 2010 के बीच अकेले अरविन्द केजरीवाल के एनजीओ ‘कबीर’ को तीन सालों में लगभग छियासी लाख की मदद सिर्फ ‘फोर्ड फाउंडेशन’से मिली है।

भारत के एनजीओ में मदद के नाम पर जो पैसा चंदे के रूप में विदेशों से आता हैं उसमें अमेरिका की तरफ से मिलने वाली सहायता राशि सबसे ज़्यादा है! अमेरिका सहित बाकी यूरोपीय देशो का भारत के यह प्रेम केवल सेवाभाव और मदद के लिए हो ऐसा कहना मुश्किल है। अमेरिकी एनजीओ ‘Compassion International’ की बेबसाईट में उसका उद्देश्य लिखित है “गरीबी में रह रहे बच्चे जिम्मेदार और संपन्न ईसाई युवा बनें इस लिखित सन्देश से आप अंदाजा लगा लीजिये कि भारत में धर्मांतरण के खेल को यह संस्थायें खुल कर खेल रही है!उनकी मदद के पीछे निहित स्वार्थ को न पिछली सरकारों ने ध्यान दिया और न यह जानने की कोशिश कि इतनी भारी भरकम रकम का कहाँ पर और किस मकसद से निवेश हो रहा है?

गौरतलब है कि सरकार ने गैर सरकारी संस्थाओं (एनजीओ) से सम्बंधित बड़ा फैसला लेते हुए 20,000 एनजीओ का एफसीआरए(FCRA) लायसेंस कैंसिल कर दिया है। सरकार ने इन गैर सरकारी संस्थाओं को विदेशी चंदा नियमन कानून के प्रावधानों के उल्लंघन का दोषी पाया हैं। भारत में कानूनन 33,000 एनजीओ हैं जिसमें से अब सिर्फ कानूनन 13 हजार एनजीओ ही विदेशी फंड ले सकते हैं।

सूत्रों के मुताबिक सरकार पिछले एक साल से एनजीओ की कार्य प्रणाली को लेकर समीक्षा चल रही थी, वैसे मोदी सरकार ने अवैध रूप से चल रहे बहुत सारे विदेशी फंडेड एनजीओ का एफसीआरए पंजीकरण रद्द किया है, लेकिन इसके बावजूद 2014-15 के बीच विदेश से करीब 22 हजार करोड़ रुपया भारत के एनजीओ के खाते में आया है! सबसे अधिक पैसा देश की राजधानी दिल्ली के एनजीओ के खातों में आ रहा है, जिसमें क्रिश्चियन मिशनरीज आधारित एनजीओ सबसे आगे हैं! मोदी सरकार ने वह किया जो काफी पहले हो जाना चाहिए थे अब तक विदेशों के पैसों में चलने वाले एनजीओ देश में धर्मान्तरण का बहुत बड़ा कांड कर चुके हैं!

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