महाभारत पर फिल्म बनाने के लिए विवादित किताब को आधार बनाना चाहते हैं आमिर खान

सन 2008 में कोलकाता की लेखिका चित्रा बनर्जी दिवाकरुणी की किताब ‘ पैलेस ऑफ़ इल्यूजन्स’ बेस्ट सेलर रही थी।  ये किताब महाभारत पर आधारित है। किताब में महाभारत की घटनाओं को द्रौपदी के नजरिये से लिखा गया है। लेखिका की क्रांतिकारी कलम से जन्मी ‘पांचाली’ महाभारतकालीन व्यवस्थाओं पर प्रश्न करती है। वह शत्रु दल के एक व्यक्ति के प्रति आकर्षण रखती है। उसका और कृष्ण का नाता ऐसा नहीं है, जैसा महाभारत में लिखा गया है। देश को जानना आवश्यक है कि अभिनेता आमिर खान अपने मेगा प्रोजेक्ट के लिए चित्रा बनर्जी की इसी किताब का सहारा ले रहे हैं। वे इस किताब की सहायता से महाभारत की आधुनिक व्याख्या करना चाहते हैं। 

जब आमिर खान ‘ठग्स ऑफ़ हिन्दोस्तान’ की शूटिंग में व्यस्त थे तो साथ ही साथ ‘महाभारत’ पर बनने वाले प्रोजेक्ट पर भी काम कर रहे थे। बीच में ये ख़बरें आई कि उन्होंने ये प्रोजेक्ट निरस्त कर दिया है। हालांकि ठग्स के बुरी तरह पिटने के बाद उन्होंने यू टर्न मारते हुए फिर से महाभारत पर फिल्म बनाने की इच्छा प्रकट कर दी। एक हज़ार के इस प्रोजेक्ट को मुकेश अम्बानी द्वारा धन उपलब्ध करवाने की खबरे आती रही लेकिन अब तक अम्बानी की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।

चर्चा ये है कि महाभारत पर बनने जा रही फिल्म का मूल ढांचा ही उस किताब पर बनाया जाएगा, जिसमे द्रौपदी दुश्मन खेमे के व्यक्ति के प्रति आकर्षण रखती है। इस तथ्य का कोई ऐतिहासिक प्रमाण नहीं है लेकिन ये एक बेस्टसेलर लेखिका की किताब से निकला तथ्य है। महाभारत पर फिल्म बनाने के लिए एक किताब का सहारा लिया जा रहा है। वह भी ऐसी किताब जो लेखिका के आधुनिक नजरिये से लिखी गई है और इसमें कुछ तथ्य बहुत विवादित हैं। सुना है ‘ठग्स ऑफ़ हिन्दोस्तान’ फ्लॉप होने के बाद आमिर खान बहुत तेज़ी से महाभारत पर काम कर रहे हैं। वे आनन-फानन में कृष्ण की भूमिका निभाकर पिछली असफलता पर पर्दा डालना चाह रहे हैं।

इस प्रकरण में आमिर खान बड़ी भूल कर रहे हैं। वे स्क्रिप्ट तैयार करने के लिए एक विवादास्पद किताब का सहारा ले रहे हैं। जबकि इस महान ग्रन्थ पर फिल्म बनाने से पूर्व एक मेगा रिसर्च की आवश्यकता होगी। लगभग एक साल तक शोध करने के बाद ही फिल्म की स्क्रिप्ट का काम शुरू होना चाहिए।  महाभारत का ये प्रोजेक्ट आमिर खान से ज्यादा समय चाहता है और आमिर समय देने के लिए तैयार नहीं दिखाई दे रहे हैं। उनकी शोध टीम बनी या नहीं बनी, इसकी कोई खबर नहीं है।

आमिर इतने व्यग्र हैं कि आज ही कृष्ण की भूमिका करना चाहते हैं। लेकिन क्या वे जानते हैं कि ये कदम उनके कॅरियर पर हमेशा के लिए फुल स्टॉप लगा सकता है। कृष्ण का किरदार करने के लिए ऐसा अभिनेता चाहिए, जो आज तक परदे पर नहीं आया। आमिर खान के साथ उनकी पिछली फिल्मों के किरदार जुड़े हुए हैं।  उनकी इमेज ऐसी नहीं कि वे ये भूमिका कर सके। यदि वे कृष्ण बनते हैं तो दर्शकों को परदे पर ‘आमिर खान’ के ही दर्शन होंगे। वे द्रौपदी के किरदार के लिए दीपिका पादुकोण को बेहतर मानते हैं। ‘पद्मावती’ की इमेज ऐसे ही ब्रेक नहीं होने वाली।  दर्शक शायद ही उनको इस किरदार के लिए स्वीकार कर सकेंगे।

आमिर खान को नहीं लगता कि यदि ये फिल्म एक किताब के आधार पर बनाई गई तो उनका और उनके प्रोडक्शन हाउस का अस्तित्व हमेशा के लिए मिट सकता है।  देश का हिन्दू समाज अचानक प्रतिक्रियावादी दिखाई देने लगा है तो ऐसी ही फिल्मों का निर्माण उसका बड़ा कारण है। पद्मावत फिल्म के समय देश का माहौल खराब हुआ लेकिन फिल्म उद्योग ने सबक नहीं लिया। वे सबक क्यों लेंगे। ख़राब माहौल के कारण ही तो उनकी फिल्म जबरदस्त ढंग से कामयाब हुई थी।

यदि इस फिल्म पर सरकार संज्ञान नहीं लेती तो आगे का समय बहुत कठिन होने जा रहा है। ये एक आम विषय पर बनी होती तो कोई समस्या नहीं होती लेकिन ये उस ग्रन्थ पर बनने जा रही है, जो हिन्दुओं के लिए सम्मान का विषय है। इसे रोकने का बस एक ही रास्ता है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय तुरंत संज्ञान लेकर आमिर खान को तलब करे। उनसे फिल्म से जुड़ी हर जानकारी मांगी जाए। यदि ऐसा नहीं किया जाता तो फिल्म को प्रदर्शित होने से कोई रोक नहीं सकेगा। आमिर खान एन्ड कम्पनी कोर्ट में जाकर फिल्म क्लियर करवा लेगी।  समय आज करने का है तो आज ही किया जाना चाहिए।

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Vipul Rege

पत्रकार/ लेखक/ फिल्म समीक्षक पिछले पंद्रह साल से पत्रकारिता और लेखन के क्षेत्र में सक्रिय। दैनिक भास्कर, नईदुनिया, पत्रिका, स्वदेश में बतौर पत्रकार सेवाएं दी। सामाजिक सरोकार के अभियानों को अंजाम दिया। पर्यावरण और पानी के लिए रचनात्मक कार्य किए। सन 2007 से फिल्म समीक्षक के रूप में भी सेवाएं दी है। वर्तमान में पुस्तक लेखन, फिल्म समीक्षक और सोशल मीडिया लेखक के रूप में सक्रिय हैं।

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