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अमिताभ बच्चन के हाथ में अब सूरज नहीं, काल का कोयला है

जब अमिताभ बच्चन का उदय हुआ तो फिल्मों में एक नई बात और जोड़ दी गई थी, जो बच्चन से पहले फिल्मों में नोटिस नहीं की गई थी। अमिताभ की एंट्री फिल्म में बहुत मायने रखती थी। वे किसी फिल्म के दृश्य में पहली बार दिखाई देते थे तो वह दृश्य बड़ा प्रभावी बनाया जाता था।

उस एंट्री पर सिक्कों की इतनी बौछार होती थी कि अमिताभ का चेहरा सिक्कों से ढँक जाता था। इस बार कौन बनेगा करोड़पति के नए सीजन की शुरुआत से पूर्व उन्होंने एक प्रोमो में इसी ‘एंट्री’ से अपने नाराज़ प्रशंसकों को लुभाने का प्रयास किया। केबीसी की इस एंट्री को वैसे ही असरदार बनाया गया, जैसे उनकी फिल्मों में वे एंट्री लेते हैं।

बच्चन के चमकते दृढ़ चेहरे पर प्रकाश आ जा रहा है और वे एक कविता बोलते दिखाई देते हैं। कविता में बहुत से आशय छुपे बैठे हैं। एक अर्थ तो ये निकलता है कि कोविड 19 से आक्रामक प्रचार युद्ध करने के बाद बच्चन विजेता की भांति लौटे हैं।

या कविता का आशय ये है कि सुशांत सिंह राजपूत की हत्या का काला प्रेत उनके शो की लोकप्रियता को डंसने के लिए तैयार बैठा है और वे अपनी पुरानी ‘एंट्री’ वाली शैली का सहारा ले रहे हैं। सोमवार को केबीसी के नए सीजन का पहला एपिसोड प्रसारित हुआ।

मैंने पहले कभी इस बेहतरीन शो के लिए दर्शकों को इतना उदासीन नहीं देखा। केबीसी चलता था तो पड़ोस के घर से उसकी थीम ट्यून का संगीत सुनाई देता था लेकिन कल मैंने ऐसा कुछ महसूस नहीं किया। ऐसा अंदेशा है कि अमिताभ बच्चन का ये लोकप्रिय शो पहले ही दिन धराशायी हो गया।

लाखों लोगों ने इसका बहिष्कार किया है। दो वर्ष पूर्व की ही बात है, जब अमिताभ बच्चन का प्रसिद्ध शो ‘कौन बनेगा करोड़पति’ अपने पहले एपिसोड के साथ रेटिंग के शिखर पर जा विराजमान हुआ था। सन 2018 में केबीसी ने 6 मिलियन इम्प्रेशन्स के साथ अपना पिछला कीर्तिमान ध्वस्त कर दिया था।

इस धमाकेदार एंट्री की खबरों से टीवी और इंटरनेट पट गए थे। कल से मैं ऐसी ही खबर खोज रहा हूँ लेकिन अब तक एक भी मेरे हिस्से नहीं आई है। केबीसी का प्रारंभ ऐसे मद्धम स्वर में हुआ है, जो इसके निर्माताओं के लिए तनाव की स्थिति लाएगा। केबीसी शुरु होने से पूर्व बच्चन ने एक मार्मिक कविता पढ़कर एक प्रोमो शूट किया था।

इस प्रोमो को पचास हज़ार से अधिक व्यू नहीं मिले। सुपरस्टार बच्चन के लिए पचास हज़ार व्यूज शर्मनाक कहे जाएंगे। फिर हम नीचे कमेंट बॉक्स में जाते हैं तो लोगों के नफरती संदेश पढ़ने को मिल जाते हैं। अधिकांश लोग उनसे नाराज़ है कि सुशांत सिंह राजपूत की हत्या पर वे कुछ नहीं बोले। फिर उनकी अभिनेत्री पत्नी के बयान ने बाकी का काम कर दिया।

सोमवार को इस शो के धड़ाम हो जाने का एक कारण जया बच्चन की बयानबाज़ी भी है। इस बार केबीसी चुपके से शुरू हुआ है। उसका जाना-पहचाना ओरा खो गया है। केबीसी शुरु होने से पूर्व आमजन में जो चर्चाओं का दौर चलता था, वह भी अब नहीं है। कोरोना के इस मध्यकाल में केबीसी का तो स्वागत होना चाहिए था।

अमिताभ बॉलीवुड के गंभीर मुद्दों पर तटस्थ बने रहते हैं, जो कि उनकी व्यावसायिक ब्रांड इमेज को सूट भी करता है। इस इमेज के लिए वे उस इमेज को भूल गए, जो उनकी फिल्मों से उपजी थी। वे भारत के आम जनमानस के लिए एक एंग्री यंग मैन थे जो कहीं भी अन्याय होते देख नहीं सकता था।

उसके मुक्के अव्यवस्था और अन्याय की पीठ पर बरसते थे। अब वे अपनी उस छवि से विपरीत हैं। वे एक मॉडल हैं, जो हर चौथे विज्ञापन में प्रोडक्ट का लाभ गिनाता दिखाई देता है। क्या उन्हें ये विश्वास है कि सुशांत प्रकरण में जो उनको अपयश मिला है, वे उससे उबर जाएंगे।

क्या आम जन का गुस्सा केवल इस बात से शांत हो जाएगा कि एंग्री यंग मैन सुशांत की हत्या पर आवाज़ उठाने के बजाय केबीसी के पहले शो में उनकी आखिरी फिल्म दिल बेचारा का गाना दर्शकों को सुना दे। क्या इस कवायद से उनका गुस्सा शांत हो सकेगा।

वे अपनी कविता में कहते हैं विपदा में मन के पल का हथियार चलाना पड़ता है, अपने हिस्से का सूरज भी खुद उगाना पड़ता है, फिर वापस आना पड़ता है। केबीसी की ज़मीन पर आ गिरना क्या इस बात को नहीं दिखाता कि आपके हिस्से का सूरज अब कोयला बन चुका है।

महाअभिनेता की व्यवसायिक चुप्पी उनके लिए काल बनकर आई है। इस काल के कोयले को जलाकर सूरज नहीं बनाया जा सकेगा। हिन्दी फिल्म उद्योग के आधार स्तंभ ही उसके ढहने का कारण बन रहे हैं।

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Vipul Rege

Vipul Rege

पत्रकार/ लेखक/ फिल्म समीक्षक पिछले पंद्रह साल से पत्रकारिता और लेखन के क्षेत्र में सक्रिय। दैनिक भास्कर, नईदुनिया, पत्रिका, स्वदेश में बतौर पत्रकार सेवाएं दी। सामाजिक सरोकार के अभियानों को अंजाम दिया। पर्यावरण और पानी के लिए रचनात्मक कार्य किए। सन 2007 से फिल्म समीक्षक के रूप में भी सेवाएं दी है। वर्तमान में पुस्तक लेखन, फिल्म समीक्षक और सोशल मीडिया लेखक के रूप में सक्रिय हैं।

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