कश्मीर में पाक प्रायोजित आतंकवादियों का समर्थक है एमनेस्टी इंडिया!

एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया देश में आर्थिक गड़बड़िया फैलाने में ही संलिप्त नहीं है बल्कि जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवादी घटनाओं का भी समर्थन करता रहा है। मानवाधिकार को ढाल बनाकर आम लोगों के नाम पर भारतीय सुरक्षा बलों की आलोचना करना उसकी आदत बनी हुई है। एमनेस्टी इंडिया ने कभी भी आतंकवादी वारदातों के लिए पाकिस्तान की आलोचना नहीं की बल्कि मानवाधिकार की आड़ लेकर भारत और भारतीय सुरक्षाबलों की आलोचना करने में थोड़ी भी देर नहीं लगाती।

मुख्य बिंदु

* एमनेस्टी इंडिया को पाक प्रायोजित आतंकी घटना के तहत आमलोगों की हत्या करने वाले आतंकियों का मानवाधिकार दिखता है

* आमलोगों को बचाने के लिए आतंकवादियों से लोहा लेने वाले भारतीय सुरक्षाबलों के जवानों का मानवाधिकार नहीं दिखता है

* आर्थिक मामले की गड़बड़ी में ही नहीं बल्कि देश की सुरक्षा को नुकसान पहुंचाने के मामले में रहे हैं संलिप्त

एमनेस्टी इंडिया के प्रमुख आकार पटेल जैसे स्वघोषित मानवाधिकारियों को आमलोगों की हत्या करने वाले आतंकवादियों का तो मानवाधिकार दिखता है लेकिन आमलोगों की सुरक्षा के लिए ही आंतकियों से लोहा लेने वाले सुरक्षाबलों का कोई मानवाधिकार नहीं दिखता है।

21 अक्टूबर को कश्मीर के गुलगांव में आतंकियों के साथ भारतीय सुरक्षाबलों की हुई मुठभेड़ के दौरान एक घर में आतंकवादियों ने बम विस्फोट कर दिया। इससे वहां के सात आमलोगों की मौत हो गई थी। इस मामले को लेकर एमनेस्टी ने सरकार से भारतीय सुरक्षाबलों के खिलाफ स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच करने की मांग की है। उसने पाकिस्तान द्वारा भेज गए आतंकवादियों के लिए न तो पाकिस्तान की निंदा की न ही विश्व संगठन से उसके खिलाफ जांच करने की मांग की। जबकि यह एक आतंकवादी घटना थी। लेकिन उसने भारत सरकार से भारतीय सुरक्षाबलों के खिलाफ जांच करने की मांग की है। इतना ही नहीं एमनेस्टी इंडिया हमेशा से ही कश्मीर मसले पर पाकिस्तान का पक्ष लेता रहा है।

तभी तो देश की सुरक्षा एजेंसियो ने एमनेस्टी इंडिया के खिलाफ गृह मंत्रालय को नकारात्मक रिपोर्ट सौंपी थी। एमनेस्टी इंडिया जैसे गैर सरकारी संगठन देश में अपनी गतिविधियों को इसलिए फैलाना चाहते हैं ताकि वक्त पड़ने पर पाकिस्तान के इशारे पर उसका एजेंडा फैलाया जा सके। एमनेस्टी इंडिया के प्रमुख आकार पटेल ने भी अपने आकाओं को खुश करने के लिए इस मामले में भारतीय सुरक्षा एजेंसियो पर ही सवाल उठाया है। उसका कहना है कि पाकिस्तान प्रायोजित आतंकी भले ही मुठभेड़ में भारतीय सुरक्षाबलों को मार दे तब भी सुरक्षाबलों को वहां के स्थानीय लोगों को बचाने के लिए आतंकवादियों पर प्रहार नहीं करना चाहिए। इन जैसे तथाकथित मानवाधिकारियों को आतंकियों का मानवाधिकार तो दिखता है लेकिन जिस देश में रहते हैं वहां के सुरक्षबलों का मानवाधिकार नहीं दिखता है।

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URL: Amnesty India supporter of Pakistan-sponsored terrorists in Kashmir

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