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ओटीटी पर आ गई एक और भारत विरोधी फिल्म

भारत में एक वर्ग है जो अपने देश की घृणा पर पलता आया है। यहाँ कुछ लेखक हैं जो भारत की संस्कृति पर प्रहार करते हैं। यहाँ कुछ फिल्मकार हैं, जो भारत की बुराइयों को ही फिल्माते हैं, उनके लिए भारत में कोई अच्छाई नहीं है। ऐसे लोग अब अधिक तीव्रता से भारत पर आक्रमण कर रहे हैं। ओटीटी प्लेटफॉर्म के रूप में उन्हें ऐसा मंच मिल गया है, जिस पर भारत सरकार का कोई नियंत्रण नहीं है। इस प्लेटफॉर्म पर अब मीरा नायर अपनी फिल्म दिखाने जा रही है। एक भारत विरोधी और हिंदुत्व विरोधी लेखक विक्रम सेठ के उपन्यास ‘अ सूटेबल बॉय’ पर मीरा नायर फिल्म बना रही हैं। इसका प्रोमो देखने के बाद आप भी मानेंगे कि भारतीय संस्कृति पर मीरा नायर का ये सबसे बड़ा रचनात्मक हमला होगा।

इससे पहले कि आप मीरा नायर की ‘अ सूटेबल बॉय’ देखने का मन बनाए, आपको निर्देशक मीरा और लेखक विक्रम सेठ का बैकग्राउंड जानना आवश्यक है। यदि भारत सरकार का सूचना व प्रसारण मंत्रालय युद्धस्तर पर इस फिल्म को रोकने का प्रयास नहीं करता तो देश में इसके कारण माहौल खराब होने की पूरी आशंका दिखाई दे रही है।

सिर्फ सरकार ही नहीं, सोशल मीडिया पर भारत के नागरिकों को आवाज़ ऊँची करनी होगी। विक्रम सेठ के उपन्यास की पृष्ठभूमि 1951 के भारत से ली गई है। स्वतंत्रता के बाद उठकर खड़ा होने का प्रयास करता भारत कई समस्याओं से घिरा हुआ था। विक्रम सेठ का उपन्यास उस दौर के चार परिवारों की कहानी प्रस्तुत करता है।

इस कहानी में 1952 का लोकसभा चुनाव है। हिंदू-मुस्लिम तनाव है। विवाहेतर संबंध हैं। निम्न वर्ग पर किया गया कथित संघर्ष है, जिसके कोई प्रमाण कभी नहीं मिलते। आपने कभी मीरा नायर की ‘सलाम बॉम्बे’ और ‘कामसूत्र’ देखी होगी तो जानते होंगे कि मीरा नायर की सोच में भारत कैसा दिखाई देता है।

भारतीय होने के बावजूद उनका भारतीयता से कोई नाता क्यों नहीं है। इसका जवाब जानने के लिए आपको मीरा के अतीत में झांकना होगा। उड़ीसा के राउरकेला में पैदा हुई मीरा के पिता प्रशासनिक सेवा में थे और माँ एक सामाजिक कार्यकर्ता थी। बचपन में कॉन्वेंट में पढ़ी और बाद में हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से शिक्षा प्राप्त की।

पहले यूरोपियन पति को तलाक देकर एक राजनीतिक लेखक महमूद मरदानी से दूसरा विवाह किया। उनका लालन-पालन ऐसे वातावरण में हुआ, जहाँ सनातन धर्म की कोई शिक्षाएं उन्हें नहीं दी गई थी। वैसे भी उस दौर में बिकाऊ इतिहासकारों ने सनातन को बदनाम शुरू कर दिया था। मीरा जैसी आधुनिका इन तथाकथित शिक्षाओं से कैसे दूर रहती।

52 साल के विक्रम सेठ अंग्रेजी भाषा के विख्यात लेखक हैं। उनके लिखे उपन्यास बड़े कीर्तिमान स्थापित कर चुके हैं। वैसे तो उत्तरप्रदेश में उनका निवास है लेकिन अब वे इंग्लैंड में निवास करते हैं। उनकी माँ भारत की पहली महिला जज थीं। विक्रम सेठ अपनी लेखनी की तरह ही बेबाक हैं। वे जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में श्रोताओं के सामने वाइन पीने से नहीं झिझकते। ऐसा करने से उनका ब्रिटिश मन संतुष्ट होता है। उनके बारे में कहा जाता है कि वे समलैंगिक हैं। वे खुलेतौर पर समलैंगिकता के समर्थन में बोलते रहे हैं।

उनकी किताबों में भी ऐसे पात्र नज़र आ जाते हैं जो इस तरह की मनोविकृति के शिकार होते हैं। वे कश्मीर में धारा 370 ख़त्म करने के विरोध में बोलते हैं। वे अखलाख की ह्त्या के बाद उस गिरोह का साथ देते हैं, जो सरकार द्वारा दिए गए सम्मान वापस कर अपने आकाओं को खुश कर रहे थे। उनकी ये मनोदशा आपको उनके उपन्यास ‘अ सूटेबल बॉय’ में दिखाई देगी। उनके इन कार्यों के लिए उन्हें सरकार एक बार पद्मश्री से सम्मानित कर चुकी है।  

मीरा नायर की ये फिल्म बहुत से विवाद पैदा करने वाली है। खासतौर से हिन्दू-मुस्लिम एंगल और इसमें फिल्माए गए बोल्ड दृश्यों के कारण ये फिल्म विवाद पैदा करेगी।  वैसे भी मीरा की फिल्मों पर भारत में बहुत विवाद होता रहा है लेकिन सरकारों ने उनकी बेहया फिल्मों को पूरी सुरक्षा प्रदान करती आई है।  सन 2012 में तत्कालीन सरकार ने मीरा को उनकी नंगी फिल्मों के लिए पद्मभूषण देकर सम्मानित किया था।

जिस तरह कामसूत्र को लेकर उन्होंने विश्वभर में भारत की अश्लील छवि बनाई थी, वैसे ही अब वे विभाजन के बाद वाले भारत की गंदी छवि दुनिया के सामने पेश करेंगी। जैसे कि मैंने ऊपर लिखा, सरकार को इस फिल्म पर रोक लगाने के लिए तुरंत प्रयास करने होंगे। हालांकि सूचना व प्रसारण मंत्रालय से ऐसी अपेक्षा नहीं की जा सकती।

 उल्टा ये हो सकता है कि मंत्री श्री प्रकाश जावड़ेकर अगले वर्ष एक सराहनीय फिल्म बनाने के लिए मीरा नायर को एक और पुरस्कार देने की घोषणा कर दे। अब तक यही तो होता आया है। देश को गाली देने वाले, हिंदुत्व को बदनाम करने वाली फ़िल्में बनाने वालों को, ऐसे लेखकों को राष्ट्रीय पुरस्कार दिए जाते हैं।

ये वेब सीरीज बीबीसी के ‘बीबीसी वन’ पर दिखाई जाएगी। क्या ये बात भारत का राष्ट्रवादी वर्ग नहीं जानता कि बीबीसी भारत विरोधी पत्रकारिता को कई वर्षों से अंजाम दे रहा है। भारत का राष्ट्रवादी वर्ग जान ले कि विक्रम सेठ के बीबीसी में बहुत मधुर संबंध हैं।

इसे बीबीसी नेटवर्क पर लाने में उनकी महती भूमिका हो सकती है। ये इस बात का संकेत है कि भारत विरोधी तत्व अब भयानक ढंग से सक्रिय हो उठे हैं। यदि सीमाओं पर हमारे प्रहरी जूझ रहे हैं तो इस सांस्कृतिक आतंकवाद से जूझने की जिम्मेदारी हमारी ही बनती है।

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Vipul Rege

Vipul Rege

पत्रकार/ लेखक/ फिल्म समीक्षक पिछले पंद्रह साल से पत्रकारिता और लेखन के क्षेत्र में सक्रिय। दैनिक भास्कर, नईदुनिया, पत्रिका, स्वदेश में बतौर पत्रकार सेवाएं दी। सामाजिक सरोकार के अभियानों को अंजाम दिया। पर्यावरण और पानी के लिए रचनात्मक कार्य किए। सन 2007 से फिल्म समीक्षक के रूप में भी सेवाएं दी है। वर्तमान में पुस्तक लेखन, फिल्म समीक्षक और सोशल मीडिया लेखक के रूप में सक्रिय हैं।

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1 Comment

  1. Avatar Abhay says:

    वर्तमान में हमारे देश को जातिगत आधार पर दिये जाने वाले आरक्षण का दंश झेलना पड़ रहा है, हर किसी प्रदेश में किसी न किसी जाति को आरक्षण चाहिए। जाति गत आधार पर दिया जा रहा आरक्षण ही यह बताता है कि जिन्हें यह आरक्षण दिया जाता है वह शिर्फ उन जातियों की तुष्टिकरण की राजनीति के चलते और उनके साथ प्राचीन काल से ही होते आए गलत व्यवहार की भरपाई करने का एक माध्यम है।

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