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अपने ही दर्शक को चिकोटी काटने के लिए अरबाज़ खान ने टीवी शो बनाया

विपुल रेगे। ‘पिंच’ का अर्थ हिन्दी में होता है चिकोटी काटना। फिल्म निर्माता अरबाज़ खान के टीवी शो का नाम ‘पिंच’ ही है। शो के नए प्रोमो सामने आए हैं। ऐसा लगता है कि बॉलीवुड अपनी ट्रोलिंग से परेशान होकर एक मंच खोज रहा था, जहाँ से वह ट्रोलर्स को जवाब दे सके। पिंच के द्वारा फ़िल्मी सितारें उन लोगों पर भड़ास निकालेंगे, जो उन्हें ट्वीटर पर किसी न किसी मुद्दे को लेकर ट्रोल करते हैं।

अरबाज़ ख़ान के भाग्य में सलमान ख़ान जैसा सितारा न होता तो वे इस बुढ़ाती आयु में भी स्ट्रगलर ही बने रहते। कितने आश्चर्य की बात है कि इस शो को चलाने के लिए भी उनको अपने भाई की आवश्यकता पड़ गई। इस शो को वायरल करने के लिए सलमान का एक बयान मीडिया में उछाल दिया गया है। इस बयान में सलमान खान बिग बॉस के घर को अय्याशी का अड्डा कहने पर नाराज़ हो रहे हैं।

अरबाज़ खान को ऐसा क्यों लगता है कि वे अपने टीवी शो ‘पिंच’ द्वारा दर्शकों को चिकोटी काट सकते हैं। आख़िरकार उनका इरादा तो ऐसा ही लगता है। अरबाज़ ट्रोलर्स और प्रशंसक के बीच का अंतर इस शो के द्वारा बताने का प्रयास करेंगे। क्या ऐसा संभव है कि वे ट्रोलर्स और प्रशंसकों के वर्ग को पहचान सके। इस शो में ट्रोलर्स से परेशान फ़िल्मी सितारें अपना विरोध प्रकट करते दिखाई देते हैं।

आश्चर्य की बात है कि वे अपनी बात कहने के लिए रजत शर्मा या प्रणय राय के चैनल में नहीं गए और उन्होंने अरबाज़ के साथ मित्रवत वातावरण में अपनी बात कहनी चाही। फिल्म निर्देशक फराह खान इस शो में कह रही है ‘नेपोटिज्म की बातें करते हो लेकिन देखना तो आपको शाहरुख़ की बेटी और करीना के बेटे को ही है। क्या फराह खान को वास्तव में ऐसा लगता है कि शाहरुख़ खान की औसत सुंदरी बेटी को दर्शक देखना चाहते हैं।

https://youtu.be/wcP2vjWnoMQ

शाहरुख की बेटी में ऐसी क्या अपील है, उन्होंने ऐसा क्या किया है जो लोग उन्हें देखना और उनके बारे में जानना चाहेंगे। या करीना कपूर के बेटे को देखने के लिए दर्शक मरे जा रहे हैं ? करीना कपूर का अबोध बालक तो उसी के अभिभावकों की मीडिया अटेंशन वाले शौक के चलते ट्रोल किया जाता है। सलमान खान कैसे कह सकते हैं कि बिग बॉस के घर में कभी अय्याशी जैसे हालात नहीं बने।

ऐसा तो उनके शो में कई बार हो चुका है। फिल्म निर्माता और निर्देशक फरहान अख्तर अरबाज़ से बात करते हुए कहते हैं ‘प्रशंसक अच्छे होते हैं लेकिन ट्रोलर्स आपको छोड़ते नहीं। ‘ बात वही आती है कि प्रशंसक कब ट्रोलर बन जाएगा, कहा नहीं जा सकता। अनिल कपूर कहते हैं कि आपको जिस चीज की नॉलेज नहीं है, उस पर टिप्पणी करने की आवश्यकता नहीं है।

सच ही कहा अनिल कपूर ने। वे अनुराग कश्यप के साथ पिछली फिल्म में वायुसेना की वर्दी डालकर आए थे। उस वर्दी को पहनकर उन्होंने एक नाइट बार में ठुमके भी लगाए। यदि वायुसेना का सम्मान और शौर्य उन्हें पता होता तो वे अपनी फिल्म में ऐसी छिछोरी हरकत नहीं करते। ये सारा मजमा इसलिए लगाया गया है कि फिल्म स्टार्स जवाब देना चाहते हैं। वे जानते हैं कि इस समय नब्बे प्रतिशत दर्शक वर्ग उनसे क्रोधित है और इसके बावजूद ऐसा शो लेकर आए हैं, जिसमे दर्शक को ही कटघरे में खड़ा किया जाएगा।

मेरे विचार में तो उन्हें एक ऐसा शो लाना चाहिए, जिसमे बॉलीवुड के निर्माता-निर्देशक और कलाकार इस बात के लिए क्षमा मांगे कि उनकी नंगी, जातिवादी, देशविरोधी, सेना विरोधी फिल्मों ने देश और समाज की छवि संसार में खराब कर डाली है। अरबाज़ ऐसा एक शो बना दे तो उस फिल्म उद्योग का बहुत भला हो जाएगा, जो अब अरब सागर में भरभराकर डूबने ही वाला है।  

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Vipul Rege

पत्रकार/ लेखक/ फिल्म समीक्षक पिछले पंद्रह साल से पत्रकारिता और लेखन के क्षेत्र में सक्रिय। दैनिक भास्कर, नईदुनिया, पत्रिका, स्वदेश में बतौर पत्रकार सेवाएं दी। सामाजिक सरोकार के अभियानों को अंजाम दिया। पर्यावरण और पानी के लिए रचनात्मक कार्य किए। सन 2007 से फिल्म समीक्षक के रूप में भी सेवाएं दी है। वर्तमान में पुस्तक लेखन, फिल्म समीक्षक और सोशल मीडिया लेखक के रूप में सक्रिय हैं।

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