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आशा पारेख को 2020 के दादा साहेब फाल्के अवार्ड के लिए चुना गया

विपुल रेगे। अपने ज़माने की बेहद ख़ूबसूरत और प्रतिभाशाली अभिनेत्री आशा पारेख को 2020 के दादा साहेब फाल्के अवार्ड के लिए चुना गया है। आशा पारेख को ये अवार्ड भारतीय सिनेमा में अपने अभूतपूर्व योगदान के लिए दिया जा रहा है। भारत में ये परंपरा रही है कि यहाँ पुरस्कार व्यक्ति के सक्रिय रहते हुए नहीं दिए जाते। आज आशा जी अस्सी की आयु को छूने जा रही हैं। अब उनका फिल्मों से जुड़ाव लगभग समाप्त हो चुका है। फाल्के पुरस्कार तो उन्हें बहुत पहले ही मिल जाना चाहिए था।

दादा साहेब फाल्के पुरस्कार भारतीय सिनेमा में योगदान के लिए दिया जाता है। ये योगदान किसी निर्देशक, अभिनेता, संगीतकार और गायक का हो सकता है। गत वर्ष ये पुरस्कार अभिनेता रजनीकांत को दिया गया था। यदि आज कोई मांग करे कि एस.एस.राजामौली या श्रीराम राघवन जैसे निर्देशक को फाल्के पुरस्कार दिया जाना चाहिए तो शायद इसे जल्दबाज़ी में उठाई मांग कह दिया जाएगा।

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भारत में ये परंपरा रही है कि किसी भी किसी भी सक्रिय व्यक्ति को पुरस्कार के योग्य नहीं समझा जाता है। दिवंगत लता मंगेशकर को भी ये अवार्ड उस समय दिया गया, जब वे अपनी स्वर्णिम प्रतिभा का अधिकांश दे चुकी थीं। यदि आप आज राजामौली को इस पुरस्कार के लिए चुन ले तो संभव है कि इससे उत्साहित होकर वे हमें और बेहतर मनोरंजन प्रदान करे, हमारे सिनेमा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रिय कर दे।

आशा पारेख आज 79 वर्ष की हो चुकी हैं और इस आयु में पुरस्कार देने का क्या अर्थ रह जाता है। अब तो सिनेमा उनके लिए भूली बात हो चुका है। नब्बे का दशक समाप्त होते-होते उन्होंने अभिनय भी छोड़ दिया था। पिछले वर्ष आशा जी हेलन और वहीदा रहमान के साथ अंडमान के समुद्र तट पर छुट्टियां मना रही थीं। उस समय किसी टूरिस्ट ने बिना बताए उनके फोटो ले लिए।

फोटो मीडिया में लीक हो गए तो आशा जी ने नाराजगी जाहिर की थी। स्पष्ट है कि सार्वजानिक जीवन से आशा जी विदा ले चुकी हैं और अब उनकी याद सरकार को आई है। ये लेट नहीं, बहुत लेट निर्णय माना जाएगा।  पुरस्कार होते ही क्यों हैं ? पुरस्कार घर में रखने की शील्ड या कप नहीं है। पुरस्कार आपको प्रेरणा देते हैं कि आप अपने क्षेत्र में और उत्कृष्ट कार्य करें। पुरस्कारों का और कोई अर्थ नहीं होता।

आशा जी को दिए जाने वाले फाल्के पुरस्कार का अर्थ अब बस इतना है कि एक दिन के लिए उनको ये याद दिलाना कि किसी ज़माने में आप चोटी की अभिनेत्री रही। आपके साथ काम करने के लिए बड़े स्टार लाइन लगाए रहते थे। काश आपको ये अवार्ड पहले दे दिया जाता। उस वक्त दे दिया जाता, जब आशा जी अपने कॅरियर के शिखर पर हुआ करती थी। भारत ये कब समझेगा कि प्रतिभा का दीप जब प्रज्जवलित होता रहे, तभी उसे सराहना मिलनी चाहिए। हालाँकि आशा पारेख जी को इंडिया स्पीक्स डेली की ओर से एक राष्ट्रीय महत्व का पुरस्कार मिलने के लिए बहुत शुभकामनाएं।

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Vipul Rege

पत्रकार/ लेखक/ फिल्म समीक्षक पिछले पंद्रह साल से पत्रकारिता और लेखन के क्षेत्र में सक्रिय। दैनिक भास्कर, नईदुनिया, पत्रिका, स्वदेश में बतौर पत्रकार सेवाएं दी। सामाजिक सरोकार के अभियानों को अंजाम दिया। पर्यावरण और पानी के लिए रचनात्मक कार्य किए। सन 2007 से फिल्म समीक्षक के रूप में भी सेवाएं दी है। वर्तमान में पुस्तक लेखन, फिल्म समीक्षक और सोशल मीडिया लेखक के रूप में सक्रिय हैं।

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