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Ashwini upadhyay, एक ऐसा व्यक्तित्व जो राष्ट्र हित में अपनी Govt और सुप्रीम कोर्ट से टकराने से भी नहीं हिचकते!

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चित्रांश सक्सेना। भारत के संविधान में कुछ विकृतियों को उजागर करते और जनता के समक्ष स्पष्टता से विचार रखते हैं अश्विनी उपाध्याय। जागरूकता अभियान छेड़ते और समाज एवं देशहित में कई याचिकाएं दायर करने के साथ ही वरिष्ठ एडवोकेट अश्वनी उपाध्याय जी को भारत में “PIL MAN OF INDIA” के नाम से भी हम जानते है। उच्चतम न्यायालय में वरिष्ठ वकील होने के साथ अश्विनी उपाध्याय ने कई विषयों पर जनहित याचिकाएं दायर की हैं जिसमें से कुछ Police Reform, Judicial Reform, Education Reform, Electoral reform, Police Reform अथवा Governance Reform पर याचिका हैं। भारत की कुछ ऐतिहासिक फैसले जैसे कि तीन तलाक, अनुच्छेद 370, निकाह हलाला एवं कई महत्वपूर्ण फैसलों में इनकी याचिकाओं ने अहम भूमिका निभाई है।

इंडिया स्पीक्स डेली से चर्चा में अश्विनी जी ने अपने कुछ PIL पर विस्तार से विवरण दिया और अभी तक के अपने सफर नामा की झलक दी। अश्विनी उपाध्याय को हम सभी उनके देश हित के लिए समर्पित कार्यों से जानते हैं और यही कारण है कि वह विपक्ष और सरकार सभी का खुलकर सामना भी करते हैं। अश्विनी उपाध्याय ने पांच अहम कानूनों की मांग न्यायपालिका के समक्ष रखी है।

इन कानूनों के बारे में जब पूछा गया तो उन्होंने बताया- सरकार और न्यायपालिका के समक्ष हमने समान शिक्षा कानून की मांग रखी है: सभी धर्म और राज्यों के लिए समान शिक्षा, समान नागरिकता: सभी धर्म समुदाय और नागरिकों को समान न्याय की व्यवस्था के लिए, घुसपैठ नियंत्रण कानून: अवैध घुसपैठ एवं रोहिंग्या मुसलमानों को तत्काल रोकने और निकालने के लिए, जनसंख्या नियंत्रण: भारत में तेजी से बढ़ती जनसंख्या को रोकने के लिए। उनका कहना है भारत की व्यवस्था में बदलाव लाने के लिए न्याय प्रणाली में यह पांच मुख्य कानूनों का बदलाव लाना आवश्यक है।

अश्विनी उपाध्याय ने अपने जीवन के कुछ अनुभव साझा किए और अपने शुरुआती दिन एवं PIL MAN OF INDIA के सफर पर जानकारी दी। अश्वनी उपाध्याय जी प्रयाग में प्ले बड़े और फूनपुर से सेकेंडरी स्कूल कर कानपुर से इंजीनियरिंग की डिग्री प्राप्त की। इसके पश्चात Hero और Maruti जैसी ऑटोमोबाइल कंपनियों में भी जॉब करी।

अश्विनी जी इसी दौरान अरविंद केजरीवाल से मिले जब वे Maruti में जॉब कर रहे थे, उस समय भी मुलाकात अरविंद केजरीवाल से हुई। “ मारुति सब PSU था और क्योंकि मैं समाज के लिए कुछ करना चाहता था इसलिए मैंने Law कर ली। तभी हम केजरीवाल जी से मिले और फिर अन्ना आंदोलन हुआ हम सब ने उस में भाग लिया। उन्होंने एक नया झांसा दिया कि लोकपाल आएगा, और भ्रष्टाचार खत्म हो जाएगा।

हम Day 1 से उनसे कह रहे थे कि यह असंभव है क्योंकि लोकायुक्त भी उन्हीं कानून के भीतर काम करेंगे। उनका कहना था कि एक बार लोग इखट्टा हो जाए, तब हम Judicial Reform, Police Reform की मांग करेंगे। परंतु ऐसा कुछ नहीं हुआ बाद में हमको समझ आया, इनको पार्टी बनानी थी और ले देकर सत्ता चाहिए थी”। एडवोकेट अश्विनी उपाध्याय ने सवाल किया आज लोकपाल आने के बाद, राज्यों में लोकायुक्त, केंद्र में लोकपाल काम कर रहा है लेकिन एक भी ऐसा डिपार्टमेंट बता दीजिये, तहसील बता दीजिये जहां भ्रष्टाचार कम हुआ हो और मुकदमों की सुनवाई जल्दी हुई हो”।

अश्विनी उपाध्याय ने आज के पुलिस सिस्टम पर सवाल उठाते हुए कहा कि पुलिस सिस्टम अंग्रेजों ने लोगों को सुरक्षा देने और अपराध कम करने के लिए नहीं बल्कि Tax जमा करने के लिए बनाया था। आज भी कई राज्यों में DM को कलेक्टर बुलाया जाता है”। वे कहते हैं कि “थाने अंग्रेजों के समय भी वसूली का केंद्र थे और आज भी वसूली का केंद्र बने हुए हैं।अभी सुना हमने महाराष्ट्र में 100 करोड़ की वसूली हर महीने के इंस्पेक्टर कर रहा था”।

अश्विनी उपाध्याय ने कई बड़े विषय पर जनहित याचिकाएं दायर की हैं जिनपर ऐतिहासिक फैसले सुनाए भी गए।  भारत के मुस्लिम समाज में महिलाओं ने जब अश्विनी उपाध्याय जी के तीन तलाक की याचिका पर समर्थन किया तो पूरे देश में इसमें बदलाव का स्वागत किया और मुस्लिम महिलाओं को न्याय मिला। ऐसे ही अश्विनी उपाध्याय ने अनुच्छेद 30, अनुच्छेद  370, निकाह हलाला, Election reform, Judicial Reform, Uniform Civil Code, Uniform Education, धर्मांतरण जैसे महत्वपूर्ण विषयों के खिलाफ कई याचिकाएं दायर की हैं।

अश्विनी जी ने बताया कि अभी तक उन्होंने 100 से भी अधिक याचिकाएं दायर करी हैं। भारत में शिक्षा सुधार के लिए अश्विनी उपाध्याय ने 9 याचिकाएं दायर की है जिसमें common syllabus common syllabus, एक राष्ट्र एक शिक्षा बोर्ड, समान शिक्षा अधिका, हर तहसील में केंद्रीय विद्यालय का निर्माण, आठवीं कक्षा तक हिंदी, संस्कृत और संविधान की पढ़ाई अनिवार्य, ncert की पुस्तक अनिवार्य होनी चाहिए और राष्ट्रीय शिक्षा आयोग का गठन प्रस्तावित किया था।

 भारत के संविधान में समान नागरिक संहिता की ओर इंगित किया गया है। अश्वनी जी ने बताया क्योंकि संविधान इसके स्पष्ट परिभाषा नहीं देता इसी कारण इसके पक्ष में खड़े लोग और विरोध में खड़े लोग भी सही से नहीं जानते। समान नागरिक संहिता पर अश्वनी उपाध्याय ने पांच याचिकाएं दायर की हैं। अश्विनी जी कहते हैं “मैंने टुकड़ों में (याचिकाएं) फ़ाइल की हैं। पहले एलिमेंट: शादी की उम्र सामान साल होनी चाहिए अभी क्या हो रहा है शादी के लिए लड़की की आयु 18 साल और लड़की की आयु 21 साल होनी चाहिए।

मैंने वह ‘चैलेंज’ किया और सुप्रीम कोर्ट ने इसे स्वीकार किया। दूसरा है सामान तलाक के आधार: हिंदू के लिए अलग, मुसलमान के लिए अलग, ईसाई के लिए अलग। सुप्रीम कोर्ट ने उसको स्वीकार किया। तीसरी PIL मैंने दायर की सामान रखरखाव यानी गुजारा भत्ता सब को एक समान मिलना चाहिए। मुसलमान को 3 महीने का मिलता है, हिन्दू में 10 साल का भी मिलता है। फिर चौथी PIL मैंने दायर किया सामान दत्तक ग्रहण एवं संरक्षण: गोद लेने का अधिकार और बच्चे पालने का अधिकार भी सामान होना चाहिए।

ये नहीं हिंदू के लिए अलग, पार्सी के लिए अलग… मैंने पांचवी PIL दायर किया: सामान उत्तराधिकार और विरासत जिसमें गोद लेने का और बच्चे पालने का अधिकार सभी को समान रूप से मिलना चाहिए। हिंदू हो, मुसलमान हो, पार्सी, ईसाई और सुप्रीम कोर्ट ने इसे भी एक्सेप्ट कर लिया। यह मामला भी सुप्रीम कोर्ट में लंबित है केंद्र का इसमें जवाब नहीं आया”।

इसके साथ ही अश्विनी उपाध्याय को उच्चतम न्यायालय में बड़ी जीत हासिल हुई है जब रोहिंग्या मुसलमान और अवैध घुसपैठियों पर अश्विनी द्वारा दायर की गयी याचिका पे फैसला सुनाते हुए न्यायालय ने सरकार को एक साल के भीतर सभी अवैध घुसपैठियों और रोहिंग्या मुसलमानों को “आइडेंटफी, डिटेन, डिपोर्ट” कर सरकार कार्यवाही करे। अश्विनी जी बताया कि संविधान के १२२ अंग्रेजी कानूनों के विरुद्ध 8 अगस्त को वे होली जलाएंगे। “भारत छोड़ो आंदोलन” की उन्नासी वर्षगांठ पर संविधान के घटिया अंग्रेजी कानूनों का दिल्ली में जंतर मंतर पर 10 बजे विरोध प्रदर्शन करेंगे।

अश्विनी उपाध्याय ने वोहरा कमिटी के महत्वपूर्ण प्रकाशन पर जाँच के लिए याचिका भी दायर की। किन्तु सुप्रीम कोर्ट ने इसे ख़ारिज करते हुए जाँच को न्याय कमिटी को देने की सलाह दी। उपाध्याय जी ने केंद्रीय गृह सचिव को वोहरा कमिटी की जाँच के लिए विधि आयोग से संपर्क करने की स्वतंत्रता प्रदान की।

जिसके पश्चात उपाध्याय ने देश की सी.बी.आई., एन. आई. ए. जैसी जाँच सम्बंधित संस्थाओं को वोहरा कमिटी रिपोर्ट पर उचित कार्यवाही एवं जाँच की माँग भी रखी। ऐसे कई राष्ट्र हित विषयों को अश्विनी उपाध्याय समय-समय पर जनता के समक्ष रखते हैं और जागरूक करते आये हैं। इनपर आरोप लगे कि पार्टी में होने के कारण सरकार के पक्ष में याचिकाएँ दायर करते हैं किन्तु जब इनकी कार्यशैली के बारे में जाने तो सरकार और विपक्ष दोनों को प्रश्नों के घेरे में खड़ा करते आये हैं।

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