सुप्रीम कोर्ट ने कहा, SC/ST Act का इस्तेमाल निर्दोषों को आतंकित करने के लिए नहीं किया जा सकता!

अवधेश कुमार मिश्र। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, SC/ST Act का इस्तेमाल निर्दोषों को आतंकित करने के लिए नहीं किया जा सकता! SC/ST Act मामले में जांच से पहले गिरफ्तारी पर रोक के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ केंद्र सरकार के पुनर्विचार याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की। सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर दिए गए अपने फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। इसके साथ ही दस दिन बाद इस मामले पर फिर सुनवाई करने की बाद कही है। सुनवाई के दौरान एटॉर्नी जनरल की दलील पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह खुद भी इस एक्ट के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन किसी बेगुनाहों को सजा ना मिले इसे देखना भी हमारा कार्य है।

मुख्य बिंदु

* सुप्रीम कोर्ट ने दस दिन बाद फिर सुनवाई करने की कही बात
* एक्ट के खिलाफ नहीं कोर्ट लेकिन बेगुनाहों को नहीं हो सजा
* सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ देश में हुई हिंसा में जा चुकी हैं 10 जानें

मालूम हो कि सुप्रीम कोर्ट ने 20 मार्च को अपने एक फैसले के तहत SC/ST Act के मामले में जांच से पहले गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ दलितों के वोट बैंक की राजनीति करने वाली राजनीतिक दलों के उकसावे पर विरोध के स्वर उठने लगे। राजनीतिक दलों के उकसावे पर ही कल भारत बंद के दौरान देश भर में 10 लोगों की मौत हो गई थी।

विरोध के सुर तेज होने पर दबाव में आई केंद्र सरकार ने भी सुप्रीम कोर्ट में अपने फैसले पर पुनर्विचार करने की याचिका दायर की। केंद्र सरकार की याचिका पर ही सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अपने दिए फैसले पर रोक लगाने से मना कर दिया है।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की मुख्य टिप्पणी!

* निर्दोषों को सजा से बचाने के लिए कोर्ट ने किये हैं सुरक्षा उपाय
* कानूनी उपचार नहीं मिलने वाला अपने आप में अकेला कानून
* मामला दर्ज होते ही आरोपी का गिरफ्तार होना अपरिहार्य हो जाता है
* एससी/ एसटी एक्ट में तो अग्रिम जमानत का भी प्रावधान नहीं है
* दोषी को जरूर सजा मिलनी चाहिए लेकिन बेगुनाहों को नहीं
*

प्रेरित दुर्भावना से झूठे आरोप के तहत किसी स्वतंत्रता नहीं छीन सकते!

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ सड़क पर प्रदर्शन कर रहे लोगों पर टिप्पणी करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जो लोग बेवजह प्रदर्शन कर रहे हैं शायद उन्होंने कोर्ट का फैसला पढ़ा ही नहीं। कोर्ट ने केंद्र सरकार द्वारा दायर पुनर्विचार याचिका पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि आखिर सरकार क्यों चाहती है कि बिना जांच के ही किसी मामले में किसी को गिरफ्तार किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सरकारी कर्मचारी पर ऐसे आरोप लगाए गए तो फिर वे कैसे काम कर सकते हैं?

पुनर्विचार के लिए केंद्र की दलील!

सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल करते हुए केंद्र सरकार ने कोर्ट से कहा है कि SC/ST Act के प्रावधान में किसी प्रकार की गाइडलाइन की जरूरत नहीं है। केंद्र सरकार की ओर से कोर्ट में एजी ने एक उदाहरण देते हुए बताया कि मुख्य न्यायाधीश और सुप्रीम कोर्ट के जजों पर दलितों को प्रताड़ित करने का आरोप लगा था। लेकिन आरोप सही नहीं होने की वजह से कोई कार्रवाई नहीं हुई । एजी ने कोर्ट को बताया कि इस फैसले से बाहर लोगों में काफी रोष है, इसलिए लोग प्रदर्शन कर रहे हैं। इस पर कोर्ट ने एजी गोयल को कहा कि वह सिर्फ कानूनी पक्ष को देखते हुए फैसला करेंगे, बाहर क्या हो रहा है उससे कोई लेना देना नहीं है?

केंद्र ने कोर्ट से कहा है कि जब संविधान में निहित अनुच्छेद 21 के तहत किसी के अधिकारों को सुरक्षित करना महत्वपूर्ण है तो तो फिर SC/ST समुदाय के लोगों को संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत छूआछूत प्रथा के खिलाफ अनुच्छेद 17 के तहत संरक्षण जरूरी हो ता है। केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से इस मामले की सुनवाई किसी चैंबर के वजाय खुली अदालत में सुनवाई होनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के इस सलाह को मानते हुए ही दस दिन बाद खुली अदालत में इसकी सुनवाई करने का फैसला किया है।

URL: attorney-general-said-no-stay-on-sc-st-protection-act

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