Author: Ravi Kumar Bhadra

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कविता- तय कर लो, जाना किधर है…

तय कर लो! जाना किधर है एक तरफ काँटों का रास्ता पर तरफ दूसरी उजाले की चमक है सोच लो चलना किधर है एक तरफ नरम घास सा रास्ता तरफ दूसरी अँधेरे का असर...

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