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हाथरस केस में बड़ी साज़िश का पर्दाफाश! उप्र में जातीय दंगे कराने के लिए हुआ ‘इस्लामिक फंडिंग’!   

नागरिक कानून की आड़ में जब देशभर में सांप्रदायिक दंगे कराने की योजना असफल हो गई तब हिंदुओं के बीच जातीय दंगे कराने की योजना तैयार की गई है। इस काम में मदद कथित तौर पर विपक्षी पार्टियां, देश विदेश के यूरोपीय तथा इस्लामिक संगठन और कुछ मीडिया ग्रुप कर रहे हैं। जांच एजेंसियों ने दावा किया है कि हाथरस कांड की आड़ में उत्तर प्रदेश की योगी और केंद्र की मोदी सरकार को दुनिया भर में बदनाम करने की साजिश रची गई थी।

इसके तहत उत्तर प्रदेश में सवर्ण-दलित के नाम पर जातीय दंगे कराने के लिए हाथरस पीड़िता की मौत वाली रात ही एक ‘वेबसाइट’ बनाई गई थी। प्रारंभिक जांच के बाद इस वेबसाइट के तार Amnesty international से जुड़ रहे हैं। इस बात के पुख्ता सबूत मिले हैं कि इस वेबसाइट को इस्लामिक देशों से जमकर फंडिंग की गई थी। साथ ही कई और अहम चौंकाने वाले सुराग लगे हैं जिसकी वास्तविकता के बारे में अभी छानबीन की जा रही है।

जांच एजेंसियो का कहना है ‘जस्टिस फॉर हाथरस विक्टिम डॉट कार्ड डॉट को” नाम से तैयार हुई वेबसाइट में फर्जी आईडी से हजारों लोगों को जोड़ा गया था। इस बेवसाइट पर विरोध प्रदर्शन की आड़ में देश और प्रदेश में दंगे कराने और दंगों के बाद बचने का तरीका बताया गया। हाथरस पीड़िता को मदद के बहाने इस वेबसाइट के जरिए दंगों के लिए लगातार फंडिंग की जा रही थी जबकि फंडिंग की बदौलत अफवाहें फैलाने के लिए मीडिया और सोशल मीडिया के दुरूपयोग के सुराग भी जांच एजेंसियों को मिले हैं।

जांच एजेंसियों का कहना है की यूपी में बड़े पैमाने पर जातीय दंगे कराने के लिये रातों रात  ‘दंगे की वेबसाइट’ बनाई गई जबकि इसी वेबसाइट पर बताया गया कि उत्तर प्रदेश और अन्य प्रदेशों में कैसे दंगे कराए जाएं तथा दंगों के बाद बचने का क्या तरीका इस्तेमाल करना है‌। हाथरस पीड़िता और उनके परिजनों को मदद के लिए कथित तौर पर चंदा राशि मांगी गई जबकि आशंका है कि कथित मदद के बहाने दंगों के लिए फंडिंग की गई और इसी फ़ंडिंग की बदौलत अफ़वाहें फैलाने के लिए मीडिया और सोशल मीडिया के दुरूपयोग भी किया जा रहा है। 

जांच एजेंसियों को इस फर्जी वेबसाइट की डिटेल्स और अन्य कई पुख्ता जानकारी हाथ लगी है। दावा किया गया है कि सीएए हिंसा में शामिल उपद्रवियों और राष्ट्रविरोधी तत्वों ने मोदी और योगी से बदला लेने के लिए इस तरह की दंगे की वेबसाइट तैयार की जबकि वेबसाइट में बताया गया है कि किस तरह चेहरे पर मास्क लगाकर पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों को विरोध प्रदर्शन की आड़ में निशाना बनाना है।

आशंका है कि हाथरस कांड को लेकर हिंदू समाज में फूट डालने और संपूर्ण देश में नफरत का बीज बोने के लिए आनन-फानन में रणनीति तैयार की गई। इस वेबसाइट में कई बेहद आपत्तिजनक कंटेंट है जिसके बाद जांच एजेंसियों ने इस वेबसाइट को ब्लॉक करा दिया है।

जांच एजेंसियों का कहना है कि यह रणनीति तैयार की गई थी कि मीडिया और सोशल मीडिया के जरिए किस तरह फेक न्यूज फैलाना है, इसके लिए फोटो शाप्ड तस्वीरों, अफवाहों, एडिटेड विजुल्स का जमकर इस्तेमाल करना है ताकि व्यापक तौर पर दंगे भड़काया जा सके।

नफरत फैलाने के लिए दंगों के मास्टर माइंड ने कुछ मीडिया संस्थानों और सोशल मीडिया के महत्वपूर्ण एकाउंटों का इस्तेमाल किया और, इसके लिए  मोटी रकम खर्च की गई थी। इसके सबूत इससे भी मिलते हैं कि एक बड़े हिंदी-अंग्रेजी चैनल की रिपोर्टर पीड़िता के भाई को फर्जी वीडियो शूट करने के लिए उकसाने वाला ऑडियो भी वायरल हुआ था। तो एक दूसरे और वामपंथी ग्रुप से जुड़े चैनल की महिला रिपोर्टर धरने के धंधे पर भी उतर गई थी। Anti-CAA प्रदर्शन में जैसे शिल्ड के लिए महिलाओं को आगे किया गया था, उसी तरह आरोप है कि न्यूज चैनलों ने अपनी महिला रिपोर्टरों को आगे कर इस साजिश को अंजाम दिया।

जांच एजेंसियों का कहना है कि भले ही वेबसाइट बनाने वाले मास्टरमाइंड का अभी नाम पता नहीं चल पाया है लेकिन इस बात की पुख्ता जानकारी मिली हैै कि सीएए उपद्रव के दौरान हिंसा में शामिल रहे पीएफआई और एसडीपीआई जैसे संगठनों ने बेवसाइट तैयार कराने में अहम भूमिका निभाई है। 

खुफिया एजेंसियों का दावा है कि वेबसाइट के जरिए गलत सूचनाएं प्रचारित कर माहौल बिगाड़ने की कोशिश की गई और जांच एजेंसियों के छापे के बाद फ़िलहाल वेबसाइट बंद हो गई है लेकिन पुलिस के पास इसके सारे कंटेंट मौजूद हैं । रविवार की देर रात जैसे ही छापेमारी शुरू हुई थी । उसके बाद रात को ही यह वेबसाइट बंद हो गई।  इस बीच  हाथरस के सियासी घमासान में सीआरपीसी की धारा 144  का उल्लंघन करने के लिए भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आजाद और 400-500 अज्ञात लोगों के खिलाफ आईपीसी और महामारी रोग अधिनियम में प्राथमिकी दर्ज की गई जबकि अभी सूचना है कि एक और दलित कांग्रेस नेता उदित राज हाथरस जाकर राजनीतिक रोटी सेकने के फिराक में है । 

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Archana Kumari

राजधानी दिल्ली में लंबे समय तक अपराध संवाददाता के रूप में कार्य का अनुभव। अर्चना विभिन्न समाचार पत्रों तथा न्यूज़ चैनल में काम कर चुकी हैं। फिलहाल स्वतंत्र पत्रकारिता।

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1 Comment

  1. Monalika Shrivastav Gupta says:

    Sir, aaj ka vishleshan bohut hi saral bhasha main, bohut satik hua. Pata nahi, main chat room main bhaag kyu nahi le paa rahi. Par aapke sare live main upasthit hoti hu.
    Prashanshniy..

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