Category: जन अदालत

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सुप्रीम अदालत में अर्बन नक्सल मानसिकता को पनपने से पहले ही जस्टिस मिश्रा ने उखाड़ दिया!

सुप्रीम कोर्ट ने देश के प्रधानमंत्री की हत्या की साजिश रचने वाले अर्बन-नक्सलियों को सलाखों के पीछे भेजे जाने का रास्ता साफ कर दिया है। तीन जजों की बेंच में से मुख्य न्याधीश जस्टिस...

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व्यभिचार कानून- मी लार्ड! ये तो कम्प्लीट दिवालियापन है!

अभिरंजन कुमार। धारा-497 के मौजूदा स्वरूप का मैं भी समर्थन नहीं करता, लेकिन अदालत ने इसे तर्कसंगत बनाने के बजाय इसे ख़त्म करके सही नहीं किया है। मेरी राय में अदालत का यह फैसला...

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समलैंगिकता के बाद अब समाज में व्यभिचार बढाएंगे मी-लॉर्ड!

वाह मीलॉड! पहले समलैंगिकता अपराध नहीं और अब इतनी आजादी कि जानवर की प्रत्येक नागरिक किसी से भी यौन संबंध बना सकते हैं! न पति की पत्नी के प्रति कोई जिम्मेदारी न पत्नी की...

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प्रधानमंत्री कार्यालय में बैठे कांग्रेसी अधिकारी के खिलाफ सुब्रमनियन स्वामी ने खोला मार्चा!

भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए भ्रष्टाचारियों के खिलाफ कार्रवाई करने को लेकर आगे बढ़ने वाली जांच एजेंसियों के काम में दखल देने वाला भी कम दोषी नहीं होता है। आरोप है कि मनी...

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बड़े कर्जदारों को बचाने के लिए उनके पक्ष में फैसला देने वाला सुप्रीम कोर्ट सवालों से परे क्यों?

देश आज जिस नन परफार्मिंग एसेट (एनपीए) संकट से जूझ रहा है उसके लिए जितना सरकार या भ्रष्टाचारी मंत्री जिम्मेदार है उससे कहीं कम हमारी न्याय व्यवस्था को चलाने वाला सुप्रीम कोर्ट भी नहीं...

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मां भारती के नाम पर पंचक्रांति महाभियान के तहत एक अक्टूबर को भारत बंद का आह्वान!

भारतीय जनता पार्टी के नेता तथा सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील अश्विनी उपाध्याय ने देश हित में केंद्र सरकार से पांच मांगों को लेकर एक अक्टूबर को भारत बंद का आह्वान किया है। इस...

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अप्राकृतिक यौनाचार को पल भर में प्राकृतिक बना देने वाले माई लॉर्ड और उनका खेल!

भारत की सुप्रीम कोर्ट ने एक फूंक मारा और आईपीसी की किताब से अप्राकृतिक यौनाचार की धारा 377 फूर्र हो गया। अब कुछ भी अप्राकृतिक नहीं रह गया! पांच जजों की संवैधानिक पीठ ने...

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पाखंड उजागर….शहरी नक्सल के आतंक को ‘सेफ्टी वाल्व’ कहने वाले माननीय न्यायधीश पुणे पुलिस की सलाह पर आग बबूला हो उठे!

क्या असहमति के नाम पर हिंसात्मक विरोध और आतंक को जायज ठहराया जा सकता है? अगर नहीं तो फिर कोर्ट में पुणे पुलिस की सलाह पर सुप्रीम कोर्ट के किसी जज को यह कहना...

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सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश, विदेशी फंडेड NGO और शहरी नक्सलियों का गठजोड़!

जिस प्रकार सुप्रीम कोर्ट ने गिरफ्तार हुए पांच नक्सल समर्थकों को घर में नजरबंद करने का आदेश देकर राहत दी है, उससे एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश और नक्सल समर्थकों विशेषकर नरेंद्र...

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आंतकवाद का मानवाधिकार बनाम मानवाधिकार का आतंकवाद!

बाबू बेरागी। भीमा कोरेगांव से लेकर सुदूर बस्तर के सुकमा जिले तक, प्रधानमंत्री मोदी की राजीव गांधी की तरह हत्या के षड्यंत्र से लेकर माओवादियों द्वारा सुरक्षा बलों के जवानों के साथ निरीह आदिवासियों...

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शहरी नक्सलियों की गिरफ्तारी और सुप्रीम कोर्ट की ढाल!

शहरी नक्सलियों को वीआईपी ट्रीटमेंट देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने असहमति को ‘सेफ्टी वाल्व’ कहा है। उम्मीद करता हूं माननीय इंडिया स्पीक्स और उसकी टीम के जरिए आम जनता की आवाज को भी आप...

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न्यायपालिका के खिलाफ बयान देने के लिए कोर्ट फिक्सर प्रशांत भूषण पर अवमानना की याचिका दर्ज!

न्यायपालिका के खिलाफ अनाप शनाप बयान देने तथा अनर्गल आरोप लगाने की वजह से वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण के साथ दो राष्ट्रीय न्यूज चैनलों के खिलाफ अवमानना याचिका दायर की गई है। जिन दो...

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खुद मीडिया के शरणागत माई लार्ड मीडिया में जाने वाले को भेजेंगे जेल!

अब सुप्रीम कोर्ट को यह पसंद नहीं की NRC मामले पर कोई भी जिम्मेदार अधिकारी मीडिया के पास जाकर बयान दे। जस्टिस रंजन गोगई की अध्यक्षता वाली पीठ ने कड़ी फटकार लगाते हुए NCR...

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जनप्रतिनिधियों के लंबित आपराधिक मामले फास्ट ट्रैक कोर्ट भेजने के विरोध में उतरे कांग्रेस विधायक!

कांग्रेस के विधायक कानूनी रास्ते से ही सही लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट के कार्य में भी हस्तक्षेप करना शुरू कर दिया है। मध्य प्रदेश के एक कांग्रेस विधायक ने जनप्रतिनिधियों (विधायकों और सांसदों) से...

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यदि सरकार ने जनसंख्या नियंत्रण के लिए कठोर कानून नहीं बनाया तो अपने ही सरकार के खिलाफ भाजपा प्रवक्ता करेंगे आमरण अनशन!

आबादी के बढ़ते स्तर को देखें तो इसमें भारत का बहुत बड़ा योगदान है। जिस देश ने दुनिया में सबसे पहले परिवार नियोजन योजना प्रारम्भ की आज वो सरकारी आंकड़ों के अनुसार दुनिया का...

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यदि संविधान को तत्काल सौ प्रतिशत लागू नहीं किया तो 20-25 साल के बाद भारत की स्थिति बहुत खतरनाक हो जाएगी; अश्विनी उपाध्याय

साथियो… देश की एकता और अखंडता के लिए देश के संविधान को शत-प्रतिशत लागू करना बहुत जरूरी है, अगर तत्काल संविधान को सौ प्रतिशत लागू नहीं किया तो 20-25 साल के बाद भारत की...

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यूपी शिया केंद्रीय वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष वसीम रिजवी ने समान नागरिक संहिता का किया समर्थन!

एक बार फिर देश में समान नागरिक संहिता पर बहस छिड़ने वाली है। लेकिन इस बार सरकार की तरफ से नहीं न ही भारतीय जनता पार्टी की ओर से इस मुद्दे को उठाया गया...

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इस देश में लोकतंत्र नहीं भीड़तंत्र है! जो संविधान में है, वह लागू नहीं है और जो संविधान में नहीं है वह भीड़ के दबाव में लागू है!

साथियों, हमारे देश में लोकतंत्र की नहीं बल्कि भीड़तंत्र है। यदि भीड़ इकट्ठी हो जाए तो सुप्रीम कोर्ट का फैसला बदल दिया जाता है! अगर भीड़ इकट्ठी न हो तो मूल संविधान को भी...

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अल्पसंख्यकों के नाम पर दोहरी नीति क्यों? दशकों से कई राज्यों में बहुसंख्यक मुसलिमों को मिल रहा अल्पसंख्यकों का लाभ!

देश के जिन आठ प्रांतों में हिंदू अल्पसंख्यक है उनमें लक्ष्यद्वीप, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मिजोरम, मेघालय, मणिपुर, जम्मू-कश्मीर और पंजाब शामिल है।लेकिन इनमें से किसी राज्य में हिंदुओं को अल्पसंख्यक होने का दर्जा नहीं...

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आठ राज्यों में हिंदुओं को मिल सकता है अल्पसंख्यक का दर्जा! मुल्ले-मौलवी और पादरी कर रहे हैं विरोध!

देश के जिन आठ राज्यों में हिंदुओं की जनसंख्या कम है वहां उन्हें अल्पसंख्यक का दर्जा मिल सकता है। राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग (National minority commission) ने इस संदर्भ में फैसला करने का मन बना...

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