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Category: भारत निर्माण

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अंधा युग

भारतवासी  याद   करें  ,  धृतराष्ट्र  के  कुशासन  को ; खुद भी डूबा वंश भी डूबा, आग लगा दी  शासन को । धृतराष्ट्र जन्म से अंधा था,पर आज अक्ल  के अंधे हैं ; राष्ट्रधर्म  की ...

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यह पुस्तक लोगों को झकझोरने वाली कृति है।

पुस्तक का नाम: आधुनिक जीवन शैली के रोग, कारण एवं निवारण लेखक: वैद्य राजेश कपूर प्रकाशक: गवाक्ष प्रकाशन, सोलन, हिमाचल प्रदेश पृष्ठ: 160 मूल्य: 300 रूपए यह पुस्तक लोगों को झकझोरने वाली कृति है।...

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कायरता व भ्रष्टाचार

नेता  और  पुलिस  है   कायर ,  ओतप्रोत  है  भ्रष्टाचार ; आतंकवाद फल फूल रहा है , जगह जगह है अत्याचार । आतंकवाद की जड़ है भारत , जगह-जगह उसके स्कूल ; महामूर्ख  अपनी  सरकारें ...

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महामूर्ख हिंदू (भाग- 5)

महामूर्ख  है  हिंदू   इतना ,  हरदम  अत्याचार  है  सहता ; जाने  कैसे  नेता   चुनता  ?  उनके  हाथों  लुटता  रहता । दाढ़ी वाले  बाबा  सुन लो , विनाश काले  विपरीत बुद्धि: ; इसका मतलब सही...

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महामूर्ख हिंदू (भाग- 4)

मोहनदास  करमचंद   गांधी ,  कौम   का  गद्दार था ; राष्ट्रधर्म  का  पक्का  दुश्मन  , गुंडों  का  वो यार था । ईश्वर अल्लाह एक कर दिया , हिंदू को गुमराह किया ; जबकि दोनों अलग-...

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महामूर्ख हिंदू (भाग-3)

गजवा- ए- हिंद  का  खतरा बढ़ता , देश हो रहा है बरबाद; इसमें सबसे बड़े दो कारण ,तुष्टीकरण व अल्पसंख्यकवाद। इन   दोनों   को   जो   भी   बढ़ाये ,  ऐसे  नेता  हैं  गद्दार ; ऐसे  नेता ...

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महामूर्ख हिंदू (भाग -2)

पृथ्वीराज  भी  महामूर्ख  था  ,  गौरी  को  जिंदा  छोड़ा ; उसकी इसी एक गलती ने ,देश के गौरव  का रुख मोड़ा । इसी तरह  कई बार  हुआ है  , मूरख  हिंदू कभी न चेता...

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एक साधारण स्त्री को बचकर रहना चाहिए छद्म बौद्धिक फेमिनिस्ट से

एक साधारण स्त्री को बचकर रहना चाहिए छद्म बौद्धिक फेमिनिस्ट से,क्योंकि उनके दिमागों में भरी होती है विष्ठा,यौन कुंठा,रात्रि में विकृत भावों से पी गयी मदिरा कीगंदी हंसी!एक साधारण स्त्री को बचकर रहना चाहिए,...

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महामूर्ख हिंदू ( भाग- 1)

महामूर्ख   है   हिंदू   इतना ,  सागर  की  गहराई  जितना ; इसी वजह से बहुसंख्यक हो,अन्याय झेलता रहता कितना। जातिवाद  में फंसा  हुआ है , इसी  वजह से  पिटा हुआ है ; निहित  स्वार्थ  में...

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चाणक्य और चंद्रगुप्त

भरे   पड़े  चाणक्य   देश   में ,  चंद्रगुप्त  को  ढूंढो ; हिंदू  नेता  विफल  हो  गये , नेतृत्व नया अब ढूंढो । ऐसा  हो  नेतृत्व , राष्ट्र  की  हर दम  करे जो चिंता ; तुष्टीकरण,...

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रामराज्य कहलायेगा

भ्रष्टाचार हिंदू का दुश्मन , अब सब मिलकर इसे हटाओ ; पुलिस व्यवस्था सुधर जायेगी , रामराज्य सा सारे पाओ । भ्रष्टाचार  जब   दूर  हटेगा  , नेता  अफसर  सही  करेंगे ; गुंडों  की  गुंडई ...

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राष्ट्र की आवश्यकता

आवश्यकता है  आज राष्ट्र  को , चरित्रवान  नेताओं  की ; भारतवासी  अनुसरण   करेंगे  ,  राष्ट्रभक्त  नेताओं   की । सब कुछ है इस देश में लेकिन , स्वार्थ बहुत ही ज्यादा है ; अपने  स्वार्थ ...

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मोदी मुक्त भाजपा लाओ

हिंदू  नेता  इतना  दब्बू  ,  गुंडों  को  कहता  है  अब्बू ; सब का डीएनए एक बताता,अकल से हो गया है ढब्बू। लड़ने से पहले ही हारा , रण को  छोड़  बीच से भागा ;...

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राष्ट्र का गौरव

यति  नरसिंहानंद  सरस्वती ,  हिंदू  राष्ट्र का  गौरव  हैं ; इनको  जो अपमानित  करते  , वे  तो  सारे  कौरव हैं । धर्म-युद्ध आसन्न है सर पर , भीषण  रक्तपात  होना है ; यति के...

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ओ! भारत के भाग्य विधाता

ओ! भारत के भाग्य विधाता कुछ अपना जलवा दिखलाओ जनगणमनअधिनायक तुम हो तुम अपना जौहर दिखलाओ सरकारों में चोर घुसे हैं, कानून व्यवस्था चौपट हो गई ; गद्दार बने हैं देश के हीरो ,बेशर्मी...

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अंतिम रण

बड़ेबहादुर शूरवीरकहलातेहैं,सत्ता पाते हीजिम्मी बन जाते हैं जेहादी से वे इतना घबराते हैं,कईतरहसे जजिया देते रहते हैं आबादीमें करीबचौथाई हैं,फिरभी अल्पसंख्यक बन जाते हैं नेताओं की ही ये कमजोरी है,डर के मारे सारे जिम्मी...

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सड़ी लाश फेंको

कहीं   नहीं   है   देश   सेक्यूलर ,  पूरा  मजहबवाद   है ; राष्ट्र विरोधी  तुष्टीकरण  है  , पूरा  अल्पसंख्यक वाद  है । देश की  बहुसंख्यक  आबादी ,  नेता  पल-पल  तोड़ रहे ; राष्ट्र  – विरोधी    जो   ...

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नाव डुबोता नाविक

हिंदू   छला  गया   है  हरदम ,  अपने   ही  नेताओं   से  ; अभी  भी  धोखा  खाता  रहता ,  इन  हिंदू  नेताओं   से । कश्मीर स्वर्ग था भारत  का , जो  हो  चुका  है स्वर्गवासी ;...

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आज़ादी

यह सच है कि हम स्वाधीन हैंअर्थात हम “स्व” के आधीन हैंलेकिन आखिर यह स्व है कौननश्वर तन या फिर यह चपल मनकदाचित इन दोनों में कोई नहीं है“स्व” तो हमारी अजर-अमर आत्मा हैनियामक...

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भारत के डेवलपमेंट में प्रकृति से निकलता रहा है रास्ता, क्या है विकास की परिभाषा?

Book Review: “विकास V/S डेवलपमेंट”लेखक: संजीव तिवारीपृष्ठ संख्या: 64प्रकाशक: हर्फ़ पब्लिकेशनमूल्य: ₹ 25 आज के समय में विकास को प्रकृति की बात करना केवल राजनीतिक मापदंड बन गया है। किंतु इस पुस्तक ने इसे...

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