Category: इतिहास

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छल से वेदांत के बहाने डॉ राधाकृष्णन ने ईसायत को स्थापित करने का किया था प्रयास!

कल शिक्षक दिवस था। देश के पहले उपराष्ट्रपति डॉ राधाकृष्णन की याद में मनाए जाने वाले इस दिवस के दिन उनके असली चेहरे को उजागर करना ठीक नहीं लगा। वैसे इंडिया स्पीक्स के प्रधान...

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अचरज…कैलाश पर्वत की तलहटी में एक दिन होता है ‘एक माह’ के बराबर!

कैलाश की दिव्यता खोजियों को ऐसे आकर्षित करती रही है, जैसे खगोलविद आकाशगंगाओं की दमकती आभा को देखकर सम्मोहित हो जाते हैं। शताब्दियों से मौन खड़ा कैलाश संसार के पर्वतारोहियों और खोजियों को चुनौती...

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भारतीय शिक्षा प्रणाली- पाठ्यपुस्तक लिखने वालों को काटे हुए है एक विचारधारा का कीड़ा!

सूर्य सिद्धांत स्पष्ट करता है कि – “सर्वत्रैय महीगोले स्वस्थामुपरिस्थितम्। मन्यन्ते खेयतो गोलस्तस्यक्कोर्ध्वक्कवोप्यध:” अर्थात यह पृथ्वी गोल है इसलिये हम सभी अपने अपने स्थान को उपर ही समझते हैं। यह पृथ्वी वृहद शून्य के...

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गुलामी के चाबुक और युद्ध के नश्तर सहे तब जाकर बना आज का समर्थ भारत!

1962 का साल भारत भूमि की देह पर बड़ी सी खरोंचे छोड़ गया था। पड़ोसी ने पीछे से वार किया। देश का तत्कालीन प्रधानमंत्री चीन की मक्कारी भांपने में नाकाम रहा। नाकामी ऐसी कि...

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वामपंथी और तथाकथित बुद्धिजीवियों ने प्राचीन भारतीय विमान प्रौद्योगिकी पर तथ्यहीन शोध पत्र के झूठ को फैलाया!

मेरे आलेख “वैमानिक शास्त्र – कल्पना और विचारधारा” से असहमत मित्र ने एक शोधपत्र भेजा – “अ क्रिटिकल स्टडी ऑफ द वर्क – वैमानिक शास्त्र (साईंटिफिक ओपीनियन, 1974, पृ 5-12)” तथा इसे इंडियन इंस्टीट्यूट...

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वैदिक विमान- जब दुनिया ठीक से नेकर सिलना नहीं जानती थी, भारतीय ग्रंथों में सैंकडो बार वायु-मार्ग और विमान शब्द का हुआ था प्रयोग!

वैमानिक शास्त्र में मेरी जिज्ञासा थी। इसका कारण पुष्पक विमान नहीं बल्कि वामपंथी खेमे के पत्र-पत्रिकाओं व वेबसाईट पर प्रकाशित वे आलेख थे जिनमें से कुछ के शीर्षक हैं “चालीस साल पहले ही खुल...

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9 अगस्त की क्रांति, कम्युनिस्टों का देशद्रोह और नेहरू की अंग्रेज भक्ति!

आज 9 अगस्त है। आज ही के दिन 1942 में महात्मा गांधी ने ‘अंग्रेजों भारत छोड़ो’ को क्रियान्वित किया था। आज राहुल गांधी की कांग्रेस पार्टी जिस कम्युनिस्ट पार्टी के साथ सांठगांठ कर सत्ता...

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पृथ्वी के 4200 साल ‘मेघालयन काल’ के नाम से जाने जाएंगे।

भू-वैज्ञानिकों ने पृथ्वी के पिछले 4,200 सालों को नया नाम दिया है। अब इस अवधि को ‘मेघालयन काल’ के नाम से जाना जाएगा। इसका आरंभ एक भयानक सूखे के साथ हुआ था। करीब दो...

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प्राचीन भारत अतिशयोक्ति का भंडार या षड्यंत्र का शिकार? पढ़िये चीनी प्रोफेसर का अद्भुत विश्लेषण!

Pak L. Huide। जो देश अपने इतिहास पर गर्व नहीं कर सकता वह कभी तरक्की नहीं कर सकता। चीनी मूल के कनाडा में रहने वाले टोरंटो विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर पाक एल ह्यूडी(Pak L....

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मुसलमान और ईसाई जगन्नाथ मंदिर में घुसने के लिए इतने उतावले क्यों?

उड़ीसा की पुरी स्थित जगन्नाथ मंदिर में गैर हिंदुओं के प्रवेश को लेकर एक हिंदू वकील मृणालिनी पाधी ने याचिका दायर की है। भले ही याचिका किसी हिंदू ने दायर की हो लेकिन आरोप...

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क्यों न नेहरु के नाम पर बने फुटबाल स्टेडियमों का दोबारा नामकरण हो, नेहरु ने ही किया था भारतीय फुटबॉल का बेड़ा गर्क!

फीफा वर्ल्ड कप फुटबॉल टूर्नामेंट का कल समापन हुआ। अक्सर लोगों के मन में सवाल उठता है कि भारत जैसा बड़ा देश आखिर इस प्रतियोगिता में क्यों नहीं है? दरअसल इसके पीछे एक कहानी...

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अमेरिकी पुरातत्वविद ने माना कि ताजमहल एक हिंदू भवन है।

भारत के मशहूर इतिहासकार पुरुषोत्तम नागेश ओक ने ताजमहल को हिंदू संरचना साबित किया था। तब नेहरूवादी और मार्क्सवादी इतिहासकारों ने उनका खूब मजाक उड़ाया था। जबकि पीएम ओक की ही परिकल्पना थी कि...

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दो अंग्रेज सर्जन जो नहीं कर पाए, वह सुश्रुत प्रणालि के जानकार एक भारतीय कुम्हार ने कर दिया! ऐसी थी हमारी चिकित्सा प्रणाली।

सुश्रुत शल्य चिकित्सा पद्धति के प्रख्यात आयुर्वेदाचार्य थे। इन्होंने सुश्रुत संहिता नामक ग्रंथ में शल्य क्रिया का वर्णन किया है। सुश्रुत ने ही प्लास्टिक सर्जरी और मोतियाबिंद की शल्य क्रिया का विकास किया था।...

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एक महान भारतीय योद्धा जिसके कारण पूर्वोत्तर भारत की तरफ आंख उठा कर भी नहीं देख पाया औरंगजेब!

आपको यह तो ज्ञात होगा कि एनडीए (NDA) में जो बेस्ट कैडेट होता है, उसको एक गोल्ड मैडल दिया जाता हैं। लेकिन क्या आपको यह ज्ञात हैं कि उस मैडल का नाम ‘लचित बोरफुकन’...

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कर्म कभी पीछा नहीं छोड़ता, मुगलों के कुकर्म का फल उनकी पीढियां आज भोग रही हैं!

वैसे तो भगवान कृष्ण ने गीता में अर्जुन से कहा था कि कर्म कभी किसी का पीछा नहीं छोड़ता, कर्म के अनुरूप फल भुगतना पड़ता है। वहीं एक कहावत है कि भगवान की लाठी...

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भारत का प्राचीन इतिहास काफी गौरवशाली है! वैदिक काल में घोड़ों द्वारा खींचे जाने वाले रथों का वर्णन मिलता है!

उत्तर प्रदेश के सोनौली में जो पुरातात्विक अवशेष मिले हैं इससे यह साबित हो गया है कि हमारा प्राचीन इतिहास काफी गौरवशाली रहा है। अभी तक जैसे मेसोपोटामिया या हड़प्पा की संस्कृति को सबसे...

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पुराविद महाभारत का काल ईसापूर्व अधिकतम 900 वर्ष स्वीकारते हैं, जबकि पुराणों के अनुसार ईसा से 3102 वर्ष पूर्व तो कलियुग का ही आरम्भ हुआ है। आखिर ये अंतर क्यों?

बीते दिनों उत्तर प्रदेश के बागपत जिले का सनौली गांव पुरातात्विक खोजों के कारण चर्चा में रहा। डॉ. धर्मवीर शर्मा ने सनौली का उत्खनन कराकर सबसे पहले इसे विश्व के सम्मुख रखा था। किन्तु...

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आपातकाल का धूमकेतु राजनारायण!

रामबहादुर राय। राजनारायण और इंदिरा गांधी में एक समानता है। सिर्फ एक ही। नहीं तो ये दोनों राजनीति के दो समानान्तर पथ हैं। जो मिलते नहीं, साथ–साथ अपने–अपने जीवन मूल्यों से संचालित होते रहे...

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आपातकाल की बरसी: इंदिरा ने हमेशा ही लोकतंत्र के खिलाफ काम किया!

देश के लोकतंत्र पर आघात करने वाला आपाताकाल को लगे हुए 43 साल गुजर गए, लेकिन देश के लोकतंत्र को बनाए रखने के लिए वह नजारा आज भी याद आ ही जाता है। आपातकाल...

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अंग्रेजों ने क्यों और कैसे किया भारत की गुरुकुल प्रणाली को नष्ट?

इतिहास के पन्नों से : अंग्रेजों ने गुरुकुल परम्परा को तबाह किया! “भारत से ही हमारी सभ्यता की उत्पत्ति हुई थी। संस्कृत सभी यूरोपियन भाषाओं की माँ है। हमारा समूचा दर्शन संस्कृत से उपजा...

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