इरफ़ान हबीब असली इतिहास पढें, मुगलों की किताब में दर्ज है कि हिंदुओं की पहचान मिटाने के लिए उन्होंने बदले थे शहरों के नाम!

आज जब उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने इलाहाबाद का नाम बदलकर प्रयागराज किया है तो एक बार फिर इरफान हबीब जैसे इतिहासकार अब राजनीति करने उतर आए हैं। राजनीति उसी मामले पर की जाती है जब आप बैकफुट पर हों। अब जब प्रयागराज के बहाने भारतीय इतिहास की असलियत सामने आने लगी है तब वे इसे यूपी सरकार का एक स्टंट बताते हैं।

इरफान हबीब ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य़नाथ के इस कदम को एक खतरनाक मिसाल स्थापित करना बता रहे हैं। इस संदर्भ में इरफान हबीब ने ट्वीट कर लिखा है कि यह एक खतरनाक मिसाल है। इसका धर्म और इतिहास से कोई लेना-देना नहीं है। प्रयाग और इलाहाबाद का अस्तित्व सदियों से एक साथ चलता आ रहा है। इसके नाम बदलने को लेकर लोगों ने कभी कोई मांग भी नहीं की है। योगी सरकार ने लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करने के लिए इलाहाबाद का नाम बदल कर प्रयागराज किया है ताकि एक अलग मुद्दे पर प्रदेश के लोगों का ध्यान भटकाया जा सके।

अगर सरकारी संरक्षण में रचना की बजाय सही मायने में भारत का इतिहास लिखा गया होता तो यह हकीकत देश के सामने बहुत पहले आ गई होती कि किस प्रकार मुगलों ने हिंदू पहचान मिटाने की कोशिश की थी। मुगलों ने हिंदुओं की पहचान मिटाने के लिए ही देश के सभी धार्मिक स्थलों का नाम बदलने का प्रयास किया था। कुछ में सफलता मिली और कुछ में नहीं मिली। कुछ लोग जानकारी के अभाव में आज भी प्रयागराज को लेकर भ्रम फैलाते हैं कि अकबर ने प्रयाग का नाम इलाहाबाद रखा था। जबकि सच्चाई यह है कि अकबर ने तो उसका नाम इलाहाबास किया था इलाहाबाद तो उसका पोता यानि जहांगीर का बेटा शाहजहां ने किया था। इतना ही नहीं मुगल वंश के कई शासकों ने भारत के कई धार्मिक शहरों के नाम बदलने का प्रयास किया। मसलन औरंगजेब ने तो मथुरा का नाम इस्लामाबाद, वारणसी का नाम मोहम्मदाबाद और सोमनाथ का नाम बदलकर मूसाबाद कर दिया था।

इससे साफ जाहिर होता है कि किस प्रकार मुगल शासकों ने हिंदू के सभी पवित्रस्थलों की पहचान मिटाने का प्रयास किया था। लेकिन हिंदुओं ने पूरजोर विरोध कर अपने कुछ पवित्रस्थनों की पहचान बनाए रखा। वास्तविक में मुगल हिंदुओं के पवित्रस्थलों के बहाने हिंदुओं की पहचान पर आघात किया था ताकि उसे ही नष्ट कर दिया जाए।

आज जिस इतिहास को इतिहासकार इरफान हबीब झुठला रहे हैं असल में सही इतिहास वही हैं, झूठ का इतिहास उन्होंने लिखा है। उन्होंने कहा है कि प्रयाग और इलाहाबाद नाम सदियों से एक साथ चला आ रहा है। जबकि सच यह है कि प्रयाग नाम पौराणिक काल से चला आ रहा है जबकि इलाहाबाद मध्यकालीन भारतीय इतिहास का हिस्सा बना। क्या वे मानेंग कि आज जो मक्का मुसलिमों का माना जाता है वह दरअसल हिंदुओं का है? क्या वह मानेंगे शाहजहां ने न केवल प्रयाग का नाम बदल कर इलाहाबाद किया बल्कि उन्होंने हिंदुओं के 76 मंदिरों को ध्वस्त करने का आदेश भी जारी किया था। शाहजहां ने न केवल तीर्थस्थलों को ध्वस्त किया और उसका नाम बदला बल्कि वहां रहने वालों को भी या तो खत्म कर दिया या इसलाम में बदल दिया।

भारतीय इतिहास के मुताबिक अकबर अपने समय तक प्रयाग को प्रयाग ही बुलाता रहा। अकबर ने तो प्रयाग में एक किला का निर्माण कराया और उसका नाम इलाहाबास रखा। वह तो शाहजहां था जिसने प्रयाग का नाम बदल कर इलाहाबाद कर दिया।

URL: Changing name of holy cities Mughals effort to eradicate identity of Hindus!

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