फिल्म समीक्षा : चिट्टी का अपग्रेडेड वर्जन ‘2.0’ आपको हैरानी में डाल देगा!



Vipul Rege
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पक्षी विज्ञानी ‘पक्षी राजन‘ दुनिया को मोबाइल के खतरों से आगाह करता है लेकिन कोई उसकी बात नहीं सुनता। अपने पक्षियों की मौत से दुखी पक्षी राजन आत्महत्या कर लेता है। उसकी ‘आत्मा का ओरा‘ किसी तरह विशेष शक्तियां प्राप्त कर लेता है। अब पक्षी राजन शरीर की कैद से आज़ाद है। दुनिया से हर मोबाइल मिटा देना उसका मकसद बन चुका है। पक्षी राजन शहर में मौजूद लाखों मोबाइल को हथियार बना लेता है। वह ऐसी शक्ति बन गया है, जिसे काबू करने की क्षमता सेना में भी नहीं है। ऐसे माहौल में डॉ वसीगरन अपने डिस्मेंटल रोबोट चिट्टी को एक्टिव करता है। चिट्टी ही पक्षी राजन से लड़ सकता है क्योंकि वह मनुष्य नहीं है।

रजनीकांत और अक्षय कुमार की बहु प्रतीक्षित फिल्म ‘2.0’ सिनेमाघरों में लग चुकी है। रजनी, अक्षय और निर्देशक शंकर की सितारा वैल्यू के दम पर फिल्म शुरूआती दौर में अच्छे दर्शक खींच रही है। 541 करोड़ के असंभव बजट से बनी इस फिल्म को परदे पर देखना अविस्मरणीय अनुभव है। 29 नवंबर का दिन इतिहास में इसलिए याद किया जाएगा कि भारत में ऐसी फिल्म प्रदर्शित हुई, जिसकी तकनीक का स्तर किसी भी दृष्टिकोण से हॉलीवुड की महंगी फिल्मों से कम नहीं रहा था। इस फिल्म का बॉक्स ऑफिस पर जो भी हश्र हो लेकिन ये पक्का है कि ऐसी साइंस फिक्शन भारत में अब तक नहीं बनी है। तकनीक में यह पहले भाग से भी बढ़कर है।

‘2.0’ से दर्शकों ने बहुत अपेक्षाएं लगा रखी थी। अरबों रुपयों से बनी ये फिल्म क्या उन अपेक्षाओं पर खरी उतर सकेगी। फिल्म निर्माण के मापदंडों पर खरी उतरने के साथ क्या ये बॉक्स ऑफिस पर अपना जलवा लम्बे समय तक कायम रख सकेगी। फिल्म प्रदर्शित होने के साथ ही नकारात्मक समीक्षाओं ने दर्शक को संशय में डाल दिया है। बेशक फिल्म में कुछ कमियां हैं लेकिन उसके बावजूद ये भरपूर मनोरंजन करती है। दर्शक मनोरंजन के लिए ही तो फिल्म देखने जाता है। जानदार वीएफएक्स इफेक्ट्स फिल्म की यूएसपी है। इसके आगे रजनीकांत और अक्षय कुमार की स्टार इमेज भी फीकी पड़ जाती है। कम्प्यूटर जनित विशेष प्रभाव वाले दृश्य और शंकर का निर्देशन इस फिल्म के असली सितारें हैं।

शंकर की खासियत है कि वे दृश्यों में डिटेलिंग बहुत बेहतर ढंग से करते हैं। पक्षी राजन के प्रतिशोध वाले दृश्य बहुत प्रभावी सिद्ध हुए हैं। इसके अलावा उन्होंने पक्षी राजन की कैरेक्टर बिल्डिंग अद्भुत ढंग से की है। पक्षी राजन पक्षियों से प्यार करता है। शैतान बनने के बाद उसका प्रतिशोध भी पक्षियों की तरह ही होता है। जैसे उसके छीने गए लाखों मोबाइल पक्षियों की तरह झुण्ड बनाकर आते हैं। शंकर का निर्देशन दर्शक को कहानी सहज ही खींच लेता है। दर्शक पक्षी राजन की संवेदनाओं से जुड़ जाता है।
रजनीकांत की बढ़ती उम्र अब मुख्य नायकों का किरदार करने वाली नहीं रही है। फिल्म में उनके अधिकांश एक्शन दृश्य कम्प्यूटर जनित पात्र ने किये हैं। अब उन्हें मुख्य नायकों वाली भूमिका त्याग देनी चाहिए। शारीरिक रूप से फिट न होने के कारण वे इस कैरेक्टर के लिए मिसफिट लगते हैं। फिल्म का पहला भाग दस वर्ष पूर्व प्रदर्शित हुआ था। तब के और अब के रजनीकांत में बहुत परिवर्तन आ चुका है। अभिनय के मामले में वे कुछ कम नहीं रहे हैं। अक्षय कुमार ने संजीदगी से अपना किरदार निभाया है। ये भूमिका पहले अर्नाल्ड श्वाजनेगर को ऑफर हुई थी लेकिन फीस पर असहमति के कारण बात नहीं बनी। हालांकि अक्षय कुमार ने इस कैरेक्टर को कहीं से भी हल्का नहीं होने दिया है।

इसे विरोधाभास ही माना जाए कि कॅरियर के उतार पर सुपरस्टार रजनीकांत ने अब तक की सबसे महंगी फिल्म को कन्धों पर ढोने की जिम्मेदारी उठाई है। निर्देशक एस.शंकर निर्देशित ‘2.0’ का बजट 541 करोड़ है। इतने बड़े बजट की फिल्म को फायदा कमाने के लिए चलना नहीं ‘उड़ना‘ पड़ेगा। फिल्म का कंटेंट और दर्शकों का क्रेज इसे अच्छी शुरुआत दिला चुका है। विडंबना ये है कि ‘2.0’ जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए 600 करोड़ कमा जाए, फिर भी इसे एक औसत सफलता ही माना जाएगा।

एक अच्छी कहानी, हॉलीवुड की टक्कर के स्पेशल इफेक्ट्स, कसा हुआ स्क्रीनप्ले, रजनीकांत और अक्षय कुमार जैसे दमदार सितारों से सजी ये फिल्म दर्शक का प्यार न पाए तो फिर कौनसी फिल्म पाएगी। ये फिल्म तर्कवान दर्शकों के लिए नहीं है। ये उन दर्शकों के लिए हैं जो किसी भारतीय फिल्म में तकनीक का स्तर विश्व सिनेमा की टक्कर का देखना चाहते हैं। ये सप्ताहांत ‘2.0’ को आजमाने में कोई बुराई नहीं है। इसका अपग्रेडेड वर्जन आपको ‘ठगेगा‘ नहीं बल्कि टिकट की पूरी कीमत वसूल करवाएगा।

URL:  2.0 Is The 8th Highest Opening Film Of 2018 In Hindi

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Vipul Rege
Vipul Rege
पत्रकार/ लेखक/ फिल्म समीक्षक पिछले पंद्रह साल से पत्रकारिता और लेखन के क्षेत्र में सक्रिय। दैनिक भास्कर, नईदुनिया, पत्रिका, स्वदेश में बतौर पत्रकार सेवाएं दी। सामाजिक सरोकार के अभियानों को अंजाम दिया। पर्यावरण और पानी के लिए रचनात्मक कार्य किए। सन 2007 से फिल्म समीक्षक के रूप में भी सेवाएं दी है। वर्तमान में पुस्तक लेखन, फिल्म समीक्षक और सोशल मीडिया लेखक के रूप में सक्रिय हैं।