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बाल सरंक्षण आयोग ने ‘बॉम्बे बेगम्स’ पर रोक लगाने के लिए कहा, जावड़ेकर खामोश हैं

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एकता कपूर की समलैंगिक संबंधों पर आधारित फिल्म के बाद अब ‘बॉम्बे बेगम्स’ पर विवाद उठ खड़ा हुआ है। ये विवाद इतना बड़ा है कि बाल सरंक्षण आयोग को इसमें दखल देना पड़ा है। भारत के सूचना व प्रसारण मंत्री के दिशा-निर्देश रंग लाने लगे हैं। ओटीटी पर प्रदर्शित हो रही वेब सीरीज पर कानून न बनाने का ये परिणाम हुआ है कि इस ताज़ा सीरीज के एक दृश्य में एक तेरह वर्ष की लड़की को पार्टी में कोकीन लेते हुए दिखाया गया है। बाल सरंक्षण आयोग ने फिल्म की स्ट्रीमिंग पर रोक लगाने के लिए कहा है और फिल्म की विषयवस्तु से जुड़ी जानकारी मांग ली है।

इस मंच से जिस बात की आशंका प्रकट की गई थी, वह सत्य होती दिखाई दे रही है। सूचना व प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर द्वारा लाए गए दिशा-निर्देश मनोरंजन उद्योग को स्वयं लागू करने होंगे। उस पर सरकार का कोई नियंत्रण नहीं होगा। सरकार ने अपने नियमों में ये तक स्पष्ट नहीं किया है कि आपत्तिजनक कंटेट पाए जाने पर सरकार अपनी ओर से क्या कार्रवाई कर सकती है।

महिला दिवस पर इस बार ओटीटी पर दो फ़िल्में प्रदर्शित की गई। इन दोनों के ही कंटेंट अत्यंत आपत्तिजनक हैं। ‘बॉम्बे बेगम्स’ नारी स्वतंत्रता के नाम पर सिगरेट, शराब और कोकीन लेना सीखा रही है। स्पष्ट है कि केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों का ओटीटी पर कोई असर नहीं हो रहा है। केंद्र को समझना चाहिए कि अब पानी सिर से ऊपर जा चुका है। ट्वीटर पर लोग प्रकाश जावड़ेकर से कार्रवाई करने की मांग कर रहे हैं।

इन लोगों को शायद मालूम नहीं है कि जावड़ेकर जी इस मामले में एक पत्थर नहीं उठा सकते। उन्होंने कानून बनाया ही नहीं है। जब कानून नहीं बना तो किस आधार पर इस फिल्म की स्ट्रीमिंग रोकी जा सकेगी? यदि इस वेब सीरीज का निर्माता और नेटफ्लिक्स आज न्यायालय की शरण में चले जाए तो न्यायालय उनका ही  पक्ष देखेगा, सरकार का नहीं।

जावड़ेकर द्वारा तथाकथित निर्देशों की घोषणा हुए पंद्रह दिन भी नहीं बीते और पता चल गया कि ये तो वाकई में बिना नाख़ून और बिना दांत का शेर है। क्या अब भी केंद्र मनोरंजन उद्योग पर सख्त कानून लाने के बारे में सोचेगा, या ऐसी और फ़िल्में आने की प्रतीक्षा की जा रही है।

लोगों के आक्रोश की ये कीमत है कि केंद्र सरकार के इस मंत्री ने ट्वीटर पर सैकड़ों लोगों के जवाब तक देना उचित नहीं समझा है। इन मंत्री महोदय की चुप्पी बता रही है कि ये सांस्कृतिक आतंकवाद को मौन रहकर बढ़ावा दे रहे हैं। प्रधानमंत्री को ये सब दिखाई नहीं दे रहा। बहुत आश्चर्य की बात है। आखिर ये सब कौन रोकेगा। मेरे देश की शक्तिशाली सरकार बॉलीवुड के आगे इतनी बेबस क्यों है।

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Vipul Rege

पत्रकार/ लेखक/ फिल्म समीक्षक पिछले पंद्रह साल से पत्रकारिता और लेखन के क्षेत्र में सक्रिय। दैनिक भास्कर, नईदुनिया, पत्रिका, स्वदेश में बतौर पत्रकार सेवाएं दी। सामाजिक सरोकार के अभियानों को अंजाम दिया। पर्यावरण और पानी के लिए रचनात्मक कार्य किए। सन 2007 से फिल्म समीक्षक के रूप में भी सेवाएं दी है। वर्तमान में पुस्तक लेखन, फिल्म समीक्षक और सोशल मीडिया लेखक के रूप में सक्रिय हैं।

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