सीआईए का खुलासा: रूस के हाथों बिके थे इंदिरा से लेकर राजीव गाँधी के कई कांग्रेसी सांसद!

अमेरिकी खुफिया एजेंसी का खुलासा किया है कि भारत की नीतियों को प्रभावित करने के लिए रूस ने कांग्रेस से लेकर सीपीआई और सीपीएम के नेताओं को खरीद रखा था। यह खुलासा अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए की “दिसंबर 1985” नाम की रिपोर्ट से हुआ है। इस रिपोर्ट से यह भी खुलासा हुआ है कि रूस पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के कार्यकाल तक कांग्रेस, सीपीआई और सीपीएम जैसी राजनीतिक पार्टियों को बेशुमार पैसे देता था। न सिर्फ इन राजनीतिक पार्टियों को बल्कि उनके कई नेताओं को भी रिश्वत देता था। रूस इतना बेहिसाब पैसा इसलिए देता था ताकि भारत की नीति उनके मनोनुकूल बनाई जा सके।

भारत की विदेश नीति से लकेर शिक्षा नीति तक अगर रूस से प्रभावित और वामपंथी झुकाव वाली रही है तो इसमें कांग्रेस से लेकर सीपीआई और सीपीआई के भ्रष्ट नेताओं का हाथ है। क्योंकि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से लेकर राजीव गांधी तक के कार्यकाल के दौरान ऐसे कई भ्रष्ट नेता थे जो रूस से पैसे लेकर उसके लिए काम करते थे।

मुख्य बिंदु

*पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से लेकर राजीव गांधी के कार्यकाल तक रूस ने भारत में झोंक रखा था पैसा

अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए की “दिसंबर 1985” नाम की रिपोर्ट से हुआ है यह खुलासा

सीआईए की रिपोर्ट में तो यहां तक कहा गया है कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सरकार के दौरान कांग्रेस के कई सांसदों को रूस पैसा देता था। इसके अलावा सीपीआई और सीपीएम जैसी वामपंथी पार्टियों के सांसद से लेकर नेताओं तक को पैसा दिया गया था। वैसे भी भारत में तो यह प्रचलित अवधारणा है कि भारत की वामपंथी पार्टियां रूस और चीन के पैसे से चलती हैं और उन्हीं के लिए काम भी करती है। इंदिरा गांधी के कार्यकाल में रूस से पैसे लेकर उसके हित में काम करने का खेल राजीव गांधी के कार्यकाल तक जारी रहा। सीआईए रिपोर्ट में तो यहां तक कहा गया है कि राजीव गांधी ने भारत की निर्भरता मास्को से कम करने का प्रयास भी किया था लेकिन वे ऐसा नहीं कर पाए।

सीआईए ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि 24 पृष्ठों वाले गोपनीय ज्ञापन को कई बार संपादित किया गया, कई पृष्ठ हटा दिए गए, इसके बाद भी यह बात साफ हो गई कि सोवियत संघ ने सीपीआई और सीपीएम सहित कई विपक्षी दलों को पैसे दिए। सोवियत संघ इनको किकैक योजनाओं से लेकर व्यापारिक लेनदेन तथा नकदी के रूप में पैसों का भुगतान करता था।

सीआईए की लाखों विज्ञप्तियों के विश्लेषण के आधार पर तैयार की गई रिपोर्ट के मुताबिक सोबियत संघ पार्टी फंड के अलावा कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दलों को पैसे दिया करता था। रिपोर्ट के मुताबिक इंदिरा गांधी की अंतिम सरकार के दौरान कांग्रेस के करीब 40 प्रतिशत सांसदों को सोवियत संघ से पैसा मिलता था। सोवियत संघ भारत स्थिति अपने दूतावास से ही इनलोगों को भुगतान करता था। इसके लिए रूसी दूतावास में एक रिजर्व कोष स्थापित था। रिपोर्ट में कहा गया है कि इंदिरा गांधी के कार्यकाल के दौरान कांग्रेस में ऐसे कई व्यवसाई सांसद थे जिनका निजी व्यापार सोवियत संघ के साथ चलता था। तभी तो सोवियत संघ की करीब एक दर्जन संगठन भारत में अपनी राजनीतिक गतिविधियां चलाते थे। इन्हीं संगठनों में भारत-रूस सांस्कृतिक सोसायटी, विश्व शांति परिषद तथा व्यावसायिक पत्रकार संगठन शामिल है। शायद इसी का नतीजा है कि आज भी देश में कई पत्रकार उस समय सोवियत संघ के खाए नमक का हक आज तक अदा कर रहे हैं।

“1985 दस्तावेज” से यह भी खुलासा हुआ है कि पिछले तीन दशकों से रूस भारत में बड़े स्तर पर प्रोपगेंडा तथा गलत सूचना देने का अभियान चला रखा है। और उसके इस अभियान को बढ़ाने में टाइम्स ऑफ इंडिया, हिंदुस्तान टाइम्स, स्टेट्समैन तथा हिंदू जैसा अखबार शामिल है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ये ऐसे अखबार हैं जो बगैर स्रोत के रूस के प्रोपगेंडा फैलाने के अभियान में शामिल हैं। रिपोर्ट में तो यहां तक कहा गया है कि इन अखबारों के संपादकीय तक रूस के प्रोपगेंडा का हिस्सा होते थे। ये लोग कल भी वही काम करते थे और आज भी वही काम कर रहे हैं।

सीआईए की इस रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ है कि रूस ने पहले से अपनी सामग्री भारत में प्रकाशित करने के लिए 40 से 50 पत्रकारों को लगा रखा था। कुछ सालों से तो रूस ने इस काम के लिए अपने पत्रकारों की संख्या बढ़ाकर करीब 300 तक कर दी है। अब तो रूस के पेर्रोल पर पलने वाले इन प्रोपेगंडावादियों ने गलत स्रोत का उपयोग करना भी शुरू कर दिया है ताकि भारतीय पाठकों को भरमाया जा सके।

देश में पैट्रियट और ब्लिज जैसे अखबार न केवल बोगस स्रोत का उपयोग करते हैं बल्कि देश की सबसे नामी न्यूज एजेंसी अब मास्को के डेटलाइन वाली स्टोरी को भी अपनी स्टोरी के रूप में उपयोग कर रही है ताकि भारत से प्रकाशित होने वाले अखबार उस स्टोरी को अपने यहां प्रकाशित कर सके। रिपोर्ट में प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया (पीटीआई) को रूस के पेरोल पर चलने वाली एजेंसी तक करार दिया है।

URL: CIA disclosure: Russia had funded Congress, CPI and CPM leaders

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