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आइये जानें – क्या ज़ायरोपैथी कोरोना में मददगार साबित हो सकता?

कोरोना वाइरस क्या है? 
यह एक प्रकार का जीवाणु है, जो स्वयं को निरंतर अपग्रेड करता रहता है और तेज़ी से फैलता है। मानव शरीर के लिये बहुत हानिकारक है और कई बार जानलेवा भी हो सकता है।आज इस वाइरस ने पूरी दुनिया को तबाह कर दिया है, अमेरिका जैसी महाशक्ति घुटनों पर आ गई है। 

अभी तक इस वाइरस की कोई दवा या वैक्सीन क्यों नहीं बन पाया?
चूँकि यह वाइरस स्वयं को निरंतर अपग्रेड करता रहता है और अभी तक इसकी कैरेक्टर मैपिंग नहीं हो पाई है, अत: इस  कारण से कोई दवा या वैक्सीन बनना संभव नहीं है। 

यदि इसकी कोई दवा नहीं है तो कोरोना पेशेन्ट का क्या इलाज हो रहा है? 
फ़िलहाल कोरोना मरीज़ों को सिम्पटोमैटिक इलाज और साफ़-सुथरा वातावरण दिया जा रहा है, जिससे समय के साथ उनकी प्रतिरोधक क्षमता कोरोना वाइरस को हरा सके और पेशेन्ट कोरोना मुक्त बन सके।यही कारण है कि कोरोना से इस लड़ाई में वही लोग ठीक हो रहे हैं, जिनकी प्रतिरोधक क्षमता ठीक है।जिन लोगों को कोई बीमारी है और लम्बे समय से इलाज के कारण उनकी प्रतिरोधक क्षमता क्षीण है, उनके लिये इस वाइरस से बचना कठिन है। 

समूचे देश में लॉकडाउन है, सोशल डिस्टेंसिग पर ज़ोर दिया जा रहा परन्तु फिर भी संक्रमण बढ़ता ही जा रहा है?
आपने बहुत अच्छा सवाल किया है। सबसे पहले यह समझने की ज़रूरत है कि किसी भी वाइरस के संक्रमण को कैसे समाप्त किया जा सकता है। वाइरस संक्रमण को रोकने के लिये दो तरह से काम करना होगा- पहला प्रोटेक्शन और दूसरा प्रीवेन्शन। 

प्रोटेक्शन और प्रीवेन्शन क्या अलग-अलग बातें हैं?
आज पूरी दुनिया के साथ-साथ हमारा देश भी सिर्फ़ प्रोटेक्शन पर ज़ोर दे रहा है जैसे-लॉकडाउन, सोशल डिस्टेन्सिंग, मास्क पहनना, बार-बार हॉंथ धोना, सैनेटाइजर लगाना इत्यादि परन्तु प्रीवेन्शन की कोई बात नहीं कर रहा, क्योंकि इसकी समझ कम है लोगों में। एक कहावत सभी ने सुनी होगी-“Prevention is Better than Cure” परन्तु इस बात को हमें गहराई से समझना होगा। वास्तविक रूप में प्रीवेन्शन शरीर का internal matter है।शरीर किसी भी बीमारी या आपदा का मुक़ाबला तभी कर सकता है जब उसकी प्रतिरोधक क्षमता मज़बूत हो। अतः प्रीवेन्शन सिर्फ़ प्रतिरोधक क्षमता को मज़बूत करने से ही मिलेगा। 

प्रतिरोधक क्षमता क्या है?

  1. शरीर में बाहर से अंदर आने वाली हर चीज़ का बहिष्कार करना 
  2. शरीर के अंदर किसी भी प्रकार की अव्यवस्था को सुचारू बनाना 
  3. शरीर के अंदर किसी भी अंग को छतिग्रस्त होने से बचाना और छतिग्रस्त अंगों को रिपेयर करना।

जन्म पर प्रतिरोधक क्षमता अनिर्मित (raw) होती है। इसका विकास और विस्तार उस समय शुरू हो जाता है, जैसे बाहर की वस्तुयें शरीर में प्रवेश करना करती हैं।शुरूआत में प्रतिरोधक क्षमता अंदर आने वाली प्रत्येक वस्तु का तिरस्कार करती है, फिर धीरे-धीरे भोजन, पानी और वायु को स्वीकार करना शुरू कर देती है।परन्तु भोजन, पानी और वायु में छिपकर हानिकारक जीवाणु अंदर पहुँच जाते हैं और प्रकृति अनुसार क्षति पहुँचाना शुरू कर देते हैं। जीवाणु के प्रवेश का आभास होते ही, प्रतिरोधक क्षमता उपयुक्त एन्टी-बॉडीज बनाना शुरू कर देती है। यदि प्रतिरोधक क्षमता उपयुक्त एन्टी-बॉडीज पर्याप्त मात्रा में बनाकर जीवाणु को समाप्त कर देती है तो शरीर जीवाणु द्वारा होने वाली क्षति से बच जाता है, अन्यथा जीवाणु घातक भी हो सकता है।

प्रतिरोधक क्षमता मज़बूत करने के क्या उपाय हैं?
जब से कोरोना वाइरस का संक्रमण फैलना शुरू हुआ है देश का हर नागरिक प्रतिरोधक क्षमता मज़बूत करने के उपाय बता रहा है।पौष्टिक आहार, नियमित व्यायाम, योगा, गोमूत्र, च्यवनप्राश, शहद, नींबू,नीम, अदरक, लहसुन, गिलोय, तुलसी, गर्म पानी, धूप इत्यादि अनेकों सुझाव इमूनिटी को बढ़ा सकते हैं। परन्तु इन सभी माध्यमों से प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में कम से कम छ: महीने से एक से डेढ़ साल का समय लगेगा, जिसके लिये अभी इतना वक्त नहीं है और दूसरा यह सब कर पाना भी सभी के लिये संभव नहीं है। 

इसका कोई अन्य उपाय है क्या?
हॉं, ज़ायरोपैथी पिछले तीन दशकों से प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाकर लोगों की क्रॉनिक बीमारियों को जड़ से समाप्त करने का काम कर रहा है।इसके लिये ज़ायरोपैथी ने एक नया प्रोडक्ट प्रिवेन्टिका बनाया है। प्रिवेन्टिका शरीर को 19 प्रकार की विभिन्न बीमारियों से सुरक्षा प्रदान करती है और बीमारी के इलाज में भी काम करती है। अत: जनसाधारण की प्रतिरोधक क्षमता मज़बूत करने के लिये मात्र प्रिवेन्टिका ही काफ़ी है, परन्तु कोरोना वाइरस से संक्रमित व्यक्ति के लिये उसकी कंडीशन के मुताबिक़ ज़ायरोपैथी के अन्य इम्यूनो-सप्लीमेंट्स का भी प्रयोग करना होगा। 

कुछ लोगों का कहना है कि किसी भी दवा या सप्लीमेंट से प्रतिरोधक क्षमता नहीं बढ़ाई जा सकती?
हॉं, मैंने भी कई लोगों को यह बात कहते हुये सुना है।परन्तु उन्हीं लोगों को यह भी कहते हुये सुना है कि पौष्टिक आहार, नियमित व्यायाम और प्रोपर रेस्ट से प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाई जा सकती है।यदि उनकी इस बात को मानें तो फूड़ सप्लीमेंट जो भोजन का कंसनट्रेटेड प्रारूप है, प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में क्यों कारगर नहीं होगा? 

मौजूदा इलाज का अवलोकन!

कोरोना इलाज को लेकर यदि हम मौजूदा स्वास्थ्य प्रणाली का ऑंकलन करें तो-

  1. कोरोना की आज कोई दवा नहीं है और बनने की संभावना भी नहीं है, क्योंकि आजतक किसी भी वाइरस की कोई कारगर दवा नहीं बन पाई है। जो भी दवाओं का प्रयोग किया जा रहा है उनसे किसी जगह कुछ लोग ठीक हो रहें हैं तो दूसरी जगह वहीं दवा हानिकारक हो रही है। महज़ सिम्पटम कंट्रोल के अलावा और कोई दवा कोरोना को ठीक करने का काम नहीं करती।आपको यह बताना ज़रूरी है कि कोरोना के लिये बहुचर्चित दवा हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वीन की उपयोगिता पर जॉंच चल रही है।
  2. दूसरा प्रयास प्लाज़्मा थिरैपी से कोरोना को ठीक करने का किया जा रहा।प्लाज़्मा थिरैपी की खोज नोबेल लॉरियेट Amil Von Behring ने लगभग 130 साल पहले की थी, परन्तु आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि अभी तक इस थ्योरी पर सिर्फ़ रिसर्च ही हो रही है।वैसे भी इस थिरैपी का प्रयोग थोड़े समय के लिये प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिये किया जाना है। अत: यदि आप इस थिरैपी से ठीक भी हुये तो कुछ समय बाद दुबारा संक्रमित हो सकते है। 
  3. कोरोना से जीतने का तीसरा एवं अंतिम प्रयास वैक्सीन बनाने का है। जिसकी कॉमर्शियल उपलब्धता में कम से कम डेढ़ से दो साल के समय का अनुमान लगाया जा रहा है।वैक्सीन तो सभी जल्द से जल्द बनाना चाहते हैं पर वैक्सीन के डेवलपमेंट, ट्रायल, ह्यूमन एप्लिकेशन और कॉमर्शियल प्रोडक्शन में इतना समय लगेगा। इसके अतिरिक्त कोरोना के रीलैप्स केसेज ने प्लाज़्मा थिरैपी एवं वैक्सीन के भविष्य में कारगर होने पर सवालिया निशान लगा दिये हैं। 

ऐसी परिस्थिति में जहॉं कोई दवा, वैक्सीन या अन्य कोई भी उपचार उपलब्ध नहीं है वहाँ यदि लीग से हटकर कुछ सुझाव कारगर हो सकता है तो उसका प्रयोग क्यों नहीं करना चाहिये? 

ज़ायरोपैथी कोरोना वाइरस आपदा में कैसे मददगार हो सकती है?
मौजूदा हालात में ज़ायरोपैथी के सप्लीमेंट्स का प्रयोग विभिन्न प्रकार से करना चाहिए-

  1. कोरोना संक्रमित व्यक्ति की तात्कालिक कंडीशन के अनुसार सप्लीमेंट का हाई ग्रेड प्रोटोकॉल 
  2. स्वास्थ्य सेवाओं में जुड़े हुये हाई रिस्क लोगों के लिये, हाई रिस्क प्रीवेन्शन प्रोटोकॉल 
  3. अन्य सेवाओं में जुड़े हुये लो रिस्क लोगों के लिये, लो रिस्क प्रीवेन्शन प्रोटोकॉल 
  4. अन्य सभी के लिये- प्रीवेन्शन प्रोटोकॉल 
    इस प्रकार से यदि ज़ायरोपैथी द्वारा सुझाये गये इम्यूनो-सप्लीमेंट्स का सही ढंग से प्रयोग किया जाय तो कोरोना वाइरस संक्रमण को समाप्त करने में बहुत बड़ी सफलता मिल सकती है।

कामायनी नरेश
 फाउन्डर ऑफ ज़ायरोपैथी

1800-102-1357 ; +91-8800-8800-40

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4 Comments

  1. Monalika Shrivastav says:

    Very informative information. Thank you for bringing up the information about zyropathy. Along with the contact details of the doctor.

  2. नरेन्द्र कुमार कुमावत says:

    इस थेरेपी से कौन कौन सी बीमारिया ठीक हो सकती है

  3. रोहित says:

    इस थेरेपी से कौन कौन सी बीमारी ठीक हो सकती है, कृपया बताने की कृपया करें।

  4. Avinash says:

    कुछ ऐसी बीमारी होती है,कई सालों तक रहती है और उसके बाद जब व्यक्ति मर जाता है तब पता चलता है कि मर चुका है और बीमारी का बाद में पता चलता है पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद… आज बात करेंगे उन बीमारियों की जो शरीर को अंदर से खोखला बना देती है. यह बीमारी इतनी घातक है कि कई सालों तक तो पता ही नहीं चलता है और धीरे-धीरे आपको काल के गाल में समा कर ही दम लेती हैं आइए जानते हैं बीमारियों के बारे में..

    https://hi.letsdiskuss.com/what-are-the-most-fatal-diseases-in-the-world

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