अफगानिस्तान, पाकिस्तान, बंग्लादेश के हिंदू-सिखों की एक कहानी! या तो इस्लाम अपनाओ या फिर मरो!

अफगानिस्तान पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे मुसलिम बहुल वाले भारत के पड़ोसी देशों में रह रहे सिख हों या हिंदू अमानवीय दुर्दशा झेलने को मजबूर हैं। ये दोनों समुदाय वहां मतान्तरण के शिकार होने के साथ ही असहिष्णु और दोयम दर्जे के व्यवहार सहने को मजबूर है। इतना ही नहीं इन तीनों मुसलिम बहुल देशों में दोनों सिख और हिंदू समुदायों की संख्या अनवरत रूप से घट रही है। मुसलमान बहुल देश अफगानिस्तान में साल 1990 में शुरू हुए सिविल वॉर के पहले 250,000 सिख और हिंदू रहते थे। जबकि यूएस डिपार्टमेंट की एक रिपोर्ट के अनुसार एक दशक पहले यहां महज 3000 सिख और हिंदू रह गए। पाकिस्तान और बांग्लादेश में भी हिंदुओं की स्थिति इससे भिन्न नहीं हैं।

मुख्य बिंदु

* पाकिस्तान और बांग्लादेश में अत्याचार और अमानवीय दुर्दशा सहने को मजबूर हैं हिंदू और सिख

* पाकिस्तान में तो हिंदू समुदाय विलुप्त होने की कगार पर पहुंच गया है, बांग्लादेश में घट रही आबादी

वर्षों तक अफगानिस्तान में अल्पसंख्यक बनकर अत्याचार सहते रहे सिख अब आजिज आकर भारत आने का फैसला करने लगे हैं। उन्होंने यह फैसला उस आत्मघाती हमले के बाद लिया है जिसमें इस समुदाय के कम से कम 13 लोगों की मौत हो गई थी। आईएस के इस हमले में हुई मौतों में वहां की संसद में इकलौते सिख अवतार सिंह खालसा और अपने समुदाय के बीच खासी पैठ रखने वाले रवैल सिंह भी शामिल थे।

जो हाल अफगानिस्तान में सिखों और हिंदुओं के साथ हुआ है वही हाल पाकिस्तान और बांग्लादेश में हिंदुओं के साथ हो रहा है। जब पाकिस्तान अलग देश बना तो उस समय पाकिस्तान में हिंदुओं की आबादी कुली आबादी की 25 प्रतिशत थी, जो अब धीरे-धीरे शून्य की ओर बढ़ रही है। जो एक आध प्रतिशत हिंदू बचे भी है वे अमानवीय दुर्दशा झेलने को मजबूर है, लेकिन किसी विश्व बिरादरी पत्रकारों का ध्यान इस तरफ नहीं जा रहा है कि आखिर पाकिस्तान में हिंदू समुदाय का अस्तित्व मिट क्यों रहा है? क्या कारण है कि हिंदू वहां से विलुप्त होते जा रहे हैं? ध्यान रहे कि पाकिस्तान की जनसंख्या रॉकेट की गति से बढ़ती जा रही है। खास बात है कि पाकिस्तान से भागकर भारत की शरण में आए हिंदुओं का यहां की सरकारें भी अपने वोट बैंक के कारण कोई सुध नहीं ले रही।

अरविंद केजरीवाल जैसे मुख्यमंत्री अपने वोट बैंक को साधने के लिए बर्मा और बांग्लादेश से अवैध तरीके से घुसपैठ कर भारत आए रोहिंग्या मुसलमानों की सुध लेने में थोड़ी देर नहीं करते। बांग्लादेश जैसे मुसलिम बहुल देश में हिंदुओं की स्थिति दयनीय ही नहीं है बल्कि हिंदुओं की आबादी तीव्र गति से घट रही है। हिंदुओं के खिलाफ बांग्लादेश ने ‘वेस्टेड प्रापर्टीज रिटर्न (एमेंडमेंट) बिल 2011’ लागू किया है इसके बाद से हिंदुओं की जमीन कब्जा करने की प्रवृति बढ़ी है। क्योंकि इसमें सरकारी संरक्षण भी प्राप्त है। इस कानून के तहत मुसलमानों द्वारा जब्त की गई संपत्ति या जमीन के संदर्भ में हिंदुओं को दावा करने का अधिकार भी नहीं है। बांग्लादेश ने जो एक कानून बनाया है उससे यह आंकलन किया जा रहा है कि 25 साल के बाद वहां से भी हिंदू विलुप्त हो जाएंगे। जबकि एक समय था कि वहां हिंदुओं की आबादी कुल आबादी की 10 प्रतिशत थी जो घटकर अब सात प्रतिशत से भी कम हो गई है।

फिर भी विश्व पत्रकार और मानवाधिकार बिरादरी खामोश है। हिंदुओं की वेदना पूरे विश्व में किसी को नहीं दिखती। हिंदुओं के समर्थन में पूरी दुनिया में कभी कोई आवाज नहीं उठती।

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