राफेल डील पर CAG की रिपोर्ट आने से पहले उसे खारिज करने पर उतरी कांग्रेस!

जिस प्रकार कांग्रेस पार्टी राफेल डील पर राहुल गांधी के लगातार झूठ बोलने से चारों ओर से घिर गई है उससे बचने के लिए हमला करने का नया पैंतरा आजमा रही है। राफेल डील पर फंस जाने से तिलमिलाई कांग्रेस अब नौकरशाहों पर हमला कर उसे डराने-धमकाने पर उतर आई है। कांग्रेस पार्टी राफेल डील पर सीएजी की रिपोर्ट आने से पहले ही उसे खारिज करने पर उतर गई है। इसके तहत कांग्रेस के वरिष्ठ नेता  कपिल सिब्बल नौकरशाहों को धमकाने पर उतर आए हैं। कपिल सिब्बल ने भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (सीएजी) राजीव महर्षि पर हमला करना शुरू कर दिया है। कपिल सिब्बल ने उन्हें कांग्रेस की सरकार आने पर देख लेने की धमकी दी है। कांग्रेस की यह धमकी उसकी कमजोरी को ही दर्शाती है।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल पार्लियामेंट में सीएजी की रिपोर्ट पेश होने से पहले ही सीएजी राजीव महर्षि को धमकाते हुए उन पर हित के टकराव का आरोप लगाया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राफेल डील की अप्रैल 2015 में घोषणा की थी तब वे केंद्रीय वित्त सचिव थे । आज जब सीएजी की रिपोर्ट संसद में पेश होने जा रही है इसी बीच सिब्बल ने सीएजी को धमकाते हुए कहा है राजीव महर्षि को राफेल सौदे पर सीएजी की रिपोर्ट पेश करने से बचना चाहिए। सिब्बल ने चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर यह संसद में पेश की गई तो यह एक और बड़ा घोटाला होगा।

ऐसा नहीं है कि कपिल सिब्बल कांग्रेस के पहले नेता हैं जिन्होंने नौकरशाहों को धमकाया है। इससे पहले राज्य सभा में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंन शर्मा भी नौकरशाहों के साथ देश की शीर्षस्थ जांच एजेंसियों सीबीआई और ईडी के अधिकारियों को धमका चुके हैं। उन्होंने तो यहां तक कहा था कि सरकार बदलने वाली है औह जैसे ही सरकार बदली इन अधिकारियों की खैर नहीं।

आनंद शर्मा की तरह ही कपिल सिब्बल ने कहा है कि अधिकारियों को पता होना चाहिए कि चुनाव आते हैं, जाते हैं, हम कभी विपक्ष में होते हैं तो कभी सत्ताधारी पार्टी होते हैं। हम ऐसे अधिकारियों पर नज़र रखेंगे जो उत्साह में आकर पीएम के प्रति वफादारी दिखाने की कोशिश कर रहे हैं।

सीएजी पर कपिल सिब्बल के इस हमले को लेकर वरिष्ठ पत्रकार सुशांत सिन्हा ने अपने ट्वीट में जबरदस्त टिप्पणी की है। यह टिप्पणी ठीक उसी प्रकार की है जिस तरह एक दिन पहले ही केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने राहुल गांधी को लेकर की थी। उन्होंने कहा था राहुल गांधी एक असफल विद्यार्थी की भांति अपनी कक्षा के अव्वल आने वाले विद्यार्थी (नरेंद्र मोदी) से इर्ष्या करते हैं। सिब्बल भी कांग्रेस को फेल होने की आशंका से पहले ही अवगत करा दिया है।

इस प्रकार की धमकी कांग्रेस का कल्चर रहा है। कांग्रेस की रस्सी जल गई लेकिन अभी तक उसका बल नहीं गया है। वह आज भी देश में खुद को शासक मान रही है। कांग्रेस की शासकीय और तानाशाही प्रवृत्ति खत्म नहीं हुई है। वह हमेशा ही सरकारी अधिकारियों को अपना गुलाम समझती है। जबकि उसे समझना चाहिए कि वे सरकार अस्थायी होती है लेकिन देश के नौकरशाह स्थायी सेवक होते हैं। किसी सरकारी अधिकारियों को किसी प्रकार धमकी देना गैर कानूनी और असंवैधानक है।

जो कपिल सिब्बल आज सीएजी राजीव महर्षि पर आरोप लगा रहे हैं कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दवाब में हैं, उसी कपिल सिब्बल को यह तो जवाब देना चाहिए कि नेशनल हेराल्ड केस मामले में सीएजी की रिपोर्ट कौन तैयार करवाया था। उस समय तो देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तो नहीं थे? मालूम हो कि नेशनल हेराल्ड केस मामले में ही सोनिया और राहुल गांधी बेल पर बाहर हैं। इन लोगों पर धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार का मामला चल रहा है। इनके खिलाफ सीएजी की रिपोर्टो के आधार पर ही मामला चल रहा है।

सीएजी राजीव महर्षि के खिलाफ आरोप लगाने वाले कांग्रेस के कपिल सिब्बल क्या यह नहीं जानते कि कांग्रेस अपने कार्यकाल में क्या सब कर चुकी है। इस संदर्भ में वरिष्ठ पत्रकार उत्कर्ष आनंद ने ट्वीट करते हुए लिखा है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार ने साल 2013 में रक्षा सौदे को मंजूरी दिलाने के लिए पूर्व रक्षा सचिव शशिकांत शर्मा को सीएजी बनाया था। शर्मा की नियुक्ति के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में कई जनहित याचिकाएं भी दी गई थी। उन याचिकाओं में कहा गया था कि जो व्यक्ति रक्षा सचिव के रूप में वीवीआईपी हेलिकॉप्टर सौदा समेत कई रक्षा सौदों को मंजूरी दी हो वही व्यक्ति सीएजी के रूप में उसकी जांच कैसे कर सकता है? गौर हो कि उनकी नियुक्ति के खिलाफ दी गई कई याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उनकी नियुक्ति के समर्थन में फैसला दिया था।

गांधी परिवार के रहमोकरम पर जीने वाले कपिल सिब्बल और आनंद शर्मा जैसे बिना जनाधार के नेता उन्हें बचाने के लिए देश के संविधान की अवहेलना करने से भी बाज नहीं आते। नहीं तो उन्हें मालूम होना चाहिए कि किसी सरकारी अधिकारी को धमकी देना या चेतावनी देना गैर कानूनी होने के साथ ही संविधान की अवहेलना करना होता है।

अधिकारियों को इस प्रकार खुलेआम धमकी और चेतावनी देना यह दिखाता है कि कांग्रेस के साथ उसके नेता कितने हताश हो चुके हैं। इस बारे में भाजपा महिला मोर्चा के सोशल मीडिया इंचार्ज प्रीति गांधी ने कहा है कि ये वही कपिल सिब्बल है जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सत्ता में आने के बाद देश में असहिष्णुता बढ़ने के आंसू रो रहे थे, लेकिन आज उनकी सहिष्णुता घास चरने चली गई है। गांधी परिवार को बचाने की धुन में ये लोग देश के कानून और संविधान को भी ताक पर रख दिया है।

अंग्रेजी में कहावत है ऑफेंस इज द बेस्ट पालिसी ऑफ द डिफेंस (Offence is the best policy of the defence) इसका मतलब होता है कि हमला करना ही बचाव की सबसे अच्छी नीति होती है। कांग्रेस जिस प्रकार कैग की रिपोर्ट आने से पहले ही हमलावर हो गई है इससे स्पष्ट हो गया है कि अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा राफेल पर बोले गए झूठ को लेकर बचाव की मुद्रा में आ गई है। इसके अलावा ये लोग नेशनल हेराल्ड मामले में सोनिया गांधी को बचाने के लिए कैग से लेकर सीबीआई और ईडी के अधिकारियों को धमकाने पर उतर आए हैं।

URL : congress starting offence on cag report before tabled in parliament!

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