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‘कोविड19’ – एक प्राकृतिक-प्रकोप या वैश्विक आतंकी-साजिश’?

चित्रांश सक्सेना| पिछले १ वर्ष से विश्व के लगभग सभी देश कोरोना वायरस संक्रमण से जूझ रहे है। लगातार सवाल उठता आ रहा है कि कब और कैसे इस घातक वायरस की उत्पत्ति हुई? और इस वायरस का उद्गम स्थान कहाँ है?

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यू.एच.ओ.) का कहना है कि वायरस का विवरण सबसे पहले चीन के शहर वुहान में दिसंबर 2019 को मिला। डब्ल्यू.एच.ओ. का मानना है कि, ‘कोविड-१९’, SARS Cov-२ नामक वायरस का ‘genetic varient’ हैं, जिसकी उत्पत्ति चमगादड़ की एक प्रजाति से हुई है। सबसे रोचक़ बात है कि, १ साल बीत  जाने के बाद भी डब्ल्यू.एच.ओ. ये बताने में असक्षम रहा कि – इसका उद्गम कैसे हुआ।

अभी हाल ही में (मार्च 2021) को विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यू.एच.ओ.) ने ‘स्टडी ऑफ़ ओरिजिनस ऑफ़ SARS-CoV-2:  चाइना पार्ट’, नामक रिपोर्ट में स्पष्ट तौर पर कहा है कि वायरस की किसी वैज्ञानिक प्रयोगशाला से रिसाव होने की संभावना न्यूनतम है। संयुक्त राष्ट्र ने भी यही कहा है कि यह वायरस प्रयोगशाला से नहीं बल्कि पशुओं से इंसान में आया है।

जबकि अनेकों विश्व प्रसिद्ध वैज्ञानिको के स्वतंत्र-अनुसन्धान के अनुसार, कोविड-१९ एक कृत्रिम विशाणु है। जहाँ इसकी ‘DNA analysis’, दृढ़ता से इंगित करती है कि इसे प्रयोगशाला में कृत्रिम रूप से बनाया गया है।

इस तरह की विरोधाभासी रिपोर्टों और विश्व स्वास्थ्य संस्थाओं क़ी अनेकों अवसरों पर थकी हुई प्रतिक्रियाएं, और भी संदेहास्पद प्रतीत होती हैं। इस बीच कुछ रिपोर्ट (जो ‘Conspiracy Theory’ पर आधारित हैं) इतनी गहन, तथ्ययात्मक और विस्तृत अध्ययन के साथ उपलब्ध हैं, कि उनको सिरे से नकारना असंभव हैं।

आइए इनमें से कुछ रिपोर्टों को साथ में रख कर निष्पक्ष पत्रकारिता के नेत्रों से देखने और समझने का प्रयास करते हैं। इन रिपोर्टों के अनुसार, कुछ संस्थानों एवं चंद देशों की कोरोना वायरस संबंधित योजना के सूत्रधार थे।

इस लेख में हम उन तथ्यों को लेकर आएंगे जिसको ना तो तथाकथित मीडिया ने और ना ही किसी अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने निष्पक्ष रूप से समाज के सामने प्रस्तुत करने की कोशिश की ।

जर्मनी में ५०० मेडिकल डॉक्टर और विशेषज्ञ जिन्हें ‘डॉक्टर ऑफ इंफॉर्मेशन’ बुलाया गया, राष्ट्रीय प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह बयान दिया “कोरोना संकट एक सुनियोजित खेल है। यह केवल एक धोखा है! अब समय है जब हमें समझना चाहिए कि हम वैश्विक अपराध के बीच में हैं।”

कुछ इसी तरह स्पेन के ६०० डॉक्टरों के समूह, ‘डॉक्टर ऑफ ट्रुथ’, ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के ज़रिए कहा “Covid-19 is a false pandemic created for political purposes. This is a world dictatorship with a sanitary excuse. We urge doctors, the media and political authorities to stop this criminal operation, by spreading the truth.”

इस बात की पुष्टि USA की एक ‘PLANDEMIC’ नामक डॉक्यूमेंटरी में भी की गयी है जिसका समर्थन २७,००० मेडिकल डॉक्टर्स ने भी किया है। इस डॉक्यूमेंटरी के अनुसार यह अंतरराष्ट्रीय साजिश है, वैश्विक सत्तावादी मानसिकता वाली संस्थानों का आतंकी खेल है, जिसका शिकार सम्पूर्ण विश्व हो गया है।

विश्व और भारत की ‘अग्रिम और स्वतंत्र’ कही जाने वाली संस्थागत-पत्रकारिता ने इस पहलु को सहजता से हम सभी से दूर रखा।

यहां हम उन सभी तथ्यों का पुनःअवलोकन करेंगे, जिनसे प्रतीत होता है कैसे ‘कोरोना वायरस एक अंतराष्ट्रीय साजिश है!!?’

कोरोना वायरस की टेस्टिंग किट २०१५ में आयी: ना केवल भारत में दिसंबर २०१९ से अप्रैल २०२० तक कोई स्पष्ट कोरोना टेस्टिंग किट नहीं थी, बल्कि विश्व पटल पर भी मार्च तक ऐसा बताया गया कि इस वायरस की टेस्टिंग किट नहीं है। परंतु २०१५ में ‘रिचर्ड रोत्सचाइल्ड’ ने “कोविड-१९ टेस्टिंग किट की पद्धति” को ४ वर्ष पहले ही सरकारी डच संस्था के साथ पेटेंट करा लिया था। अर्थात इस वायरस के आने से चार वर्ष पहले ही १३ अक्टूबर २०१५ में टेस्टिंग किट आ गई थी।

२०१७ में कोरोनावायरस टेस्टिंग किट बांटी गई: करोड़ों की संख्या में ‘वर्ल्ड इंटीग्रेटेड ट्रेड सॉल्यूशन’ (WITS) ने २०१७ और २०१८ में कोविड टेस्टिंग किट बाँटी। हैरान करने वाली बात यह है कि जब कोविड-१९ नामक बीमारी थी ही नहीं, तब उसी नाम की टेस्टिंग किट क्यों और कैसे बाँटी गई?

उस ही अंतराल में WITS के दस्तावेजों के अनुसार, अप्रैल २०२० में ही इन उत्पादों के नाम बदलकर ‘कोविड-१९ टेस्ट किट’ कर दिया गया था। और भी अचंभित करने वाली बात ये है कि, उस समय वर्ल्ड बैंक के कथानुसार “डब्ल्यू.एच.ओ. और विश्व सीमा शुल्क संगठन (डब्लू. सी. ओ.) ने प्रमुख उत्पादों की सूची जारी करी, जिन्हें कोविड चिन्ह प्रदान किये गए थे। ताकि उत्पादों को आसानी से ट्रैक किया जा सके”।

5 सितंबर 2020 को जब यह तथ्य इंटरनेट पर वायरल हुए तो 6 सितंबर 2020 को WITS ने उस डॉक्यूमेंट से ‘कोविड-19’ शब्द हटाकर केवल ‘मेडिकल टेस्ट किट’ कर दिया।  आगे जब इस बात की पुष्टि करी गई तो मिला कि इस मेडिकल टेस्टिंग किट का प्रोडक्ट कोड नहीं हटाया गया था, जिससे पता चला 300215 ‘कोविड टेस्टिंग किट’ का कोड है।

तो क्या WITS, WHO व WCO को भी कोविड नाम के आने वाले विशाणु के बारे में पहले से पता था!?

एंथोनी फ़ौसी ने दिया था महामारी का संकेत: अमेरिकी राष्ट्रपति के मुख्य चिकित्सा सलाहकार एंथोनी फ़ौसी ने २०१७ में विवादित बयान दिया और कहा राष्ट्रपति ट्रंप की पहली अवधि में सहसा एक संक्रामक बीमारी का प्रकोप अवश्य होगा। फ़ौसी ने बताया “कोई संदेह नहीं है कि आने वाली प्रशासन के लिए संक्रामक रोगों के क्षेत्र में चुनौतियां आने वाली है।” (“There will be a surprise outbreak. There’s NO DOUBT in anyone’s mind about this.”)

इस बयान को आज के संदर्भ में देखें – तो यह सोचने पर मजबूर करता है कि, फ़ौसी कैसे निश्चित थे कि ट्रंप के शासनकाल में ही इस बीमारी का प्रकोप आएगा? और भी ऐसा क्या महत्वपूर्ण है जो फ़ौसी जानते हैं? अभी के लिए हम फ़ौसी के बयान से आगे बढ़ते हैं।{ संदर्भ सूची-1}

बिल गेट्स और मेलिंडा गेट्स ने निकटस्त महामारी की उद्घोषणा: अमेरिकी उद्योगपति और माइक्रोसॉफ्ट के सी.ई.ओ. बिल गेट्स ने और उनकी पूर्व पत्नी मेलिंडा गेट्स ने २०१८ में बताया था किस प्रकार वैश्विक महामारी तत्पर है। बिल गेट्स ने बोला था “वैश्विक महामारी आने को तैयार है, जो लगभग ३० मिलियन लोगों को अपनी चपेट में ले जाएगी। शायद ऐसा आने वाले दशक में हो।” मेलिंडा ने कहा ‘इंजीनियर्ड वायरस’ इंसानियत के लिए सबसे बड़ा खतरा है यह इंसानियत पर आने वाले सालों में अवश्य चोट पहुंचाएगा।

यही नहीं, अपने पूर्वानुमान पर आधारित हो, बिल गेट्स ने अक्टूबर २०१९ में ही ‘कोरोना वायरस महामारी अभ्यास’ न्यू यॉर्क में आयोजित किया। इस अभ्यास का नाम था ‘Event201’ जिसका उद्देश्य विश्व को कोरोना महामारी के लिए तैयार करना बताया गया। सोचने की बात यह है कि बिल गेट्स और मेलिंडा को १ साल पहले आने वाली महामारी के बारे में कैसे पता चल गया? विश्व में वैक्सीन के सबसे बड़े व्यापारियों में से एक है बिल गेट्स जिसने इस महामारी से पहले ही अगले वर्ष टीका बेचने के बारे में अतिउत्साहित ट्विटर पर कह डाला। कोरोना अभ्यास के कुछ समय पश्चात बिल गेट्स ने ट्वीट में लिखा- मैं विशेष रूप से इस बारे में उत्साहित हूँ के आने वाले साल में स्वास्थ्य के क्षेत्र में, वैक्सीन की सबसे अच्छी खरीद होगी। { संदर्भ सूची -2}

बिल गेट्स ने संक्रमण के फैलने से पूर्व ही कह डाला कि लगभग ३० मिलियन लोग इसकी चपेट में आएंगे उसके बाद भविष्य में फैल सकने वाली बीमारी कोरोना वायरस नामक चुनौती से निपटने के लिए अक्टूबर २०१९ पूर्वभ्यास (mock-drill) आयोजित कर डाला। इसके बाद दिसंबर में वैक्सीन की होने वाली खरीद पर उत्साह जताते हैं और उसके बाद कहते हैं कि उनकी वैक्सीन खरीदना है केवल एक उपाय है। यह सभी बिल गेट्स के कृत्य संदेह के घेरे में लाते हैं। क्या एक इतना बड़ा उद्योगपति केवल स्वयं के पूर्वानुमानों के आधार पर इतना विस्तृत विश्वस्तरीय प्रबंधन करेगा?

जी.पी.एम.बी. ने स्पष्ट कहा ‘कोरोना वायरस महामारी के लिए तैयार रहें’: विश्व में कोरोना के कैस दिसंबर २०२० में मिले, किंतु ‘ग्लोबल प्रिपेरेडनेस मॉनिटरिंग बोर्ड’ (जी.पी.एम.बी.) ने सितंबर 2019 को ही ‘अ वर्ल्ड एट रिस्क’ नाम की रिपोर्ट निकाली। इस रिपोर्ट में कोरोना वायरस नामक संक्रमण से बचने की आवश्यकता पर जोर देते हुए तैयार रहने को कहा गया। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि इस रिपोर्ट में लिखा था ‘संयुक्त राष्ट्र (विश्व स्वास्थ्य संगठन सहित) कम से कम दो system-wide प्रशिक्षण और अनुकरणीय अभ्यास आयोजित करता है, जिसमें से एक अभ्यास ‘जानबूझकर उन्मुक्त किए गए श्वसन संबंधी घातक रोग’ की रोकथाम को ध्यान में रखते हुए करना चाहिए।’

इस कथन के बाद यह कहना गलत नहीं होगा, कि रिपोर्ट लिखने वालों को संयुक्त राष्ट्र से ऐसी जानकारी मिली होगी। जिसने बड़ी-बड़ी संस्थानों के मूल उद्देश्यओं को शक घेरे में लाकर खड़ा कर दिया है। यही नहीं रिपोर्ट के कवर पर कोरोना वायरस का चित्र बना है और कई लोग मास्क में भी दिखाए गए हैं। ऐसी आश्चर्यजनक खबर पर किसी का ध्यान कैसे नहीं जा रहा है जो आज की स्थिति हू-बहू दर्शाती हैं।

२०१८ में वीडियो विवरण: इंस्टीट्यूट फॉर डिजीज मॉडलिंग ने २०१८ में ही एक वीडियो में दर्शाया – चीन के वुहान क्षेत्र से उत्पन्न हुआ एक ‘फ्लू वायरस’ पूरे विश्व में फैल रहा है। इस वीडियो में यह एक बार फिर आश्चर्यजनक तौर पर भविष्य को एक साल पहले ही व्याख्या कर दिया। वीडियो में इसे कहा गया “अ सिमुलेशन फॉर ग्लोबल पैनडेमिक”। { संदर्भ सूची -3}

वुहान, बायो सेफ्टी लैब लेवल से उद्गम करोना: बायो वेपन के विशेषज्ञ डॉ. फ्रॉसिस बोयल, ट्रम्प प्रशासन के प्रवक्ता एवं अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति ट्रम्प के छोटे से वीडियो में उन्हें इस वायरस को वुहान, बायो सेफ्टी लैब से फैलाए जाने पर वार्तालाप करते सुना गया। कहा जाता है कि यह लैब विशेषकर कोरोना वायरस पर हो रहे प्रयोगों में निपुण है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की कथित जांच में इंसानों द्वारा वायरस के निर्माण पर सभी संभावनाओं को खारिज करते हुए चीन को एक बार फिर आरोपों से बचा लिया। {संदर्भ सूची -4}

अभी हाल ही में US स्टेट डिपार्टमेंट ने चीन से मिले ख़ुफ़िया दस्तावेजों को सार्वजनिक किया है। जिसे चीनी स्वास्थ्य अधिकारियों एवं सैन्य विशेषज्ञों द्वारा 2015 में लिखे जाने का दावा किया गया, जब कोविड-19 के उद्गम स्थान पर जांच की गई थी। इन दस्तावेजों में चीनी विशेषज्ञों ने ‘SARS कोरोनावायरसों के समूह’ में कोविड-19 को उदाहरण की तरह प्रस्तुत किया और इसे ‘न्यू एरा ऑफ जेनेटिक वेपन’ के नाम से प्रस्तुत किया था।

अमेरिकी राज विभाग को मिले दस्तावेजों को आधार बनाकर ‘द ऑस्ट्रेलियन’ पत्रिका कहती है कि – ‘पीपल्स लिबरेशन आर्मी’ यानी चीनी सेना के कमांडरों ने अनर्थकारी परियोजना का अनुमान लगाया था, और तो और उनमें बायोवेपन हमले के माध्यम से दुश्मन की चिकित्सा ढांचे को ध्वस्त करने की बात सीधे-सीधे उजागर होती हैं। चलो, अब इसी परिपेक्ष में भारत की तत्कालीन स्थितियों और घटित हो रही व्यवसायिक गतिविधियों का भी अवलोकन करते हैं।

पिछले एक माह से जो भारत में – 1) ऑक्सीजन-कमी की परिस्थितियां बन रही है, 2) जिसमें ऑक्सीजन सिलेंडर कंसंट्रेटर की कालाबाजारी, 3) राजनीतिक पार्टी और नेताओं का खुलकर इसमें हाथ देखना, 4) कुछ भारतीय मीडिया संस्थाओं का अनुपात से अधिक शोर करना और 5) इस तरह की परिस्थितियां बनने से बहुत पूर्व ही कुछ उद्योगपतियों का चीन से थोक में ऑक्सीजन-कंसंट्रेटर आयात करना। यें सभी परिस्थिति-जन्य तथ्य, एक बहुत बड़ी साजिश की संभावनाओं की ओर इंगित करते हैं।

2003 में SARS वायरस को कृत्रिम रूप से आतंकियों द्वारा चीन में फैलाए जाने की आशंका जताई गई। आगे इस डॉक्यूमेंट में आगामी किताब “व्हाट रियली हैपेंड इन वुहान” में चीनी शीर्ष स्वास्थ्य अधिकारियों और लेखकों के नामों का भी खुलासा किया गया है।

ऑस्ट्रेलिया के नेता जेम्स पेटरसन (James Patterson) एवं राज्यमंत्री टॉम तुघेन्धात (Tom Tugendhat) ने इन्हीं दस्तावेजों का उल्लेख करते हुए चीन में उद्गम हुए कोविड-19 की पारदर्शिता पर चिंता जताई। जबकि चीन के सरकारी मुखपत्र ‘ग्लोबल टाइम्स’ ने ‘द ऑस्ट्रेलियन’ को सीधी चेतावनी देते हुए कहा की वो किताबों में छपे तथ्यों को गलत ढंग से प्रस्तुत ना करें।

तेजी से बदलती हुई तथ्यात्मक परिस्थितियों से यह तय है कि आने वाले दिनों में निश्चित ही महामारी का दंश झैलता विश्व और चीन खुल कर एक दूसरे के आमने-सामने होंगे। जो विश्व पहले से ही कोरोना महामारी से जूझ रहा है उसके लिए यह जानना अति आवश्यक हो गया है कि अगर सही मायने में इसमें चीन की अमानवीय और विध्वंसकारी संलिप्ता पाई जाती है तो यह सीधे-सीधे विश्व के विरुद्ध युद्ध की उद्घोषणा ही है। विश्व को जरूरत है कि एक मंच पर आकर चीनी नेतृत्व का उत्तरदायित्व निर्धारित करते हुए उचित दंड दिया जाए। {संदर्भ सूची-5}

ऐसे ही कोरोना वायरस महामारी को पूर्वनिहित उद्देश्यों को उजागर कर रहे, कई तथ्य मिल जाएंगे और सभी आपके मन को विचलित कर आज बड़ी-बड़ी संस्था पर सवाल खड़े करने को मजबूर कर जाएंगे। इसी तरह का अनुमान २०१४ में एक पत्रकार ‘हैरी वॉक्स’ ने भी लगाया था। हैरी के अनुसार “योजना यह है कि इससे हजारों-सैकड़ों लोग संक्रमित हो जाएंगे जिससे शासक वर्ग (ruling group) जनमानस के ‘नए स्तर के नियंत्रण’ की प्रष्ठभूमि रखेगा।” सिर्फ इतना ही नहीं इस दुविधाजनक स्थिति के आने से ४ वर्ष पूर्व ही ‘कर्फ्यू’ और ‘क्वारंटाइन’ को भी इस साजिश का उपकरण बता दिया था। {संदर्भ सूची-6}

इन सभी तथ्यों के प्रकाश में देखें तो, कोरोना-आतंक एकमात्र बायोवेपन के भांती प्रयोग किया गया और सत्तावादी सोच का यह उदाहरण जान पड़ता हैं।

कोरोना काल में जहां भारत और संपूर्ण विश्व महामारी से बचने की कोशिश में व्यस्त है, वही ऐसी खबरें दब के बहुत नीचे रह गई है।  पर ये बात भी सही है कि, जहाँ आज की कठिन परिस्तिथियो में जनमानस जीवन के लिए संघर्ष-रत है, वहाँ उन्हें क्या लेना कि कोरोना वायरस का उद्गम कहां और कैसे हुआ?

किंतु जब भविष्य में ऐसे विषयों पर चर्चा होगी, तब जाग्रत समाज को यह अवश्य पता होना चाहिए कि, तत्कालीन संस्थायें, सरकारें और बुद्धिजीवी वर्ग, कोरोना महामारी के समय पर क्या कह और कर रहे थे। जहाँ विश्व स्वास्थ्य संगठन ने ‘स्टडी ऑफ़ ओरिजिनस ऑफ़ SARS-CoV-2: चाइना पार्ट’ पर दी रिपोर्ट में कहा कि वायरस के फैलने का सबसे प्रबल कारण ‘इंटरमीडियरी होस्ट’ हो सकता है।

वहीं स्वास्थ्य संगठन का भी बयान है क़ि ‘पुख्ता सुरक्षा व्यवस्थाओं के सुनिश्चित होने के कारण, चीन प्रयोगशाला में कोरोना वायरस पर हो रहे अनुसन्धानों  के कारण वायरस का वातावरण में रिसाव होना असंभव है’. इस तरह के वक्तव्य किंचित केवल संशय ही उत्पन्न करते हैं कि इन बयानों का रुझाव किसकी ओर जा रहा है!!?

इस तरह की वैश्विक-स्तर की विस्तृत रिपोर्ट्स, बिखरे तथ्य, पक्ष-प्रतिपक्ष विश्लेषनों और प्रस्तुत कारकों व कारणों के आधार पर हम भी किसी सटीक निष्कर्ष पर नहीं पहुँच सकते। परंतु जिस तरह विदेशी व अंग्रेज़ी-बौद्धिक जगत स्वच्छंदता और खुले मन से इस तरह का विमर्श  कर सकता है, तो भारतीय समाज क्यों वंचित रखा हैं? हमारा प्रयास भी केवल इतना हैं की भारतीय पत्रकारिता भी ‘सही और गलत’ के अंतर-द्वन्द से ऊपर उठ, समाज के मध्य तथ्य रखे, और बौद्धिक निष्कर्ष निकालने का कार्य उनके विकसित मानस पर छोड़ दे.

संदर्भ सूची –

  1. एंथोनी फ़ौसी ने दिया था महामारी का संकेत
  2. बिल गेट्स और मेलिंडा गेट्स ने निकटस्त महामारी की की उद्घोषणा
  3. इंस्टीट्यूट फॉर डिजीज मॉडलिंग
  4. वुहान, बायो सेफ्टी लैब लेवल-४ से उद्गम करोना
  5. US के हाँथ लगे चीनी डॉक्यूमेंट में कोरोना जानबूझकर रिसाव-
  6. पत्रकार ‘हैरी वॉक्स’ ने बताया वैश्विक महामारी
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