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सत्य घटनाओं पर आधारित Crime file:2 दोस्त, दोस्त न रहा!

रहमान और रफीक में अटूट दोस्ती थी । दोनों उम्र में तो छोटे -बड़े थे लेकिन एक दूसरे को बेहद पसंद करते थे । इनमें रहमान बड़ा था और रफीक छोटा। दोनों के बीच दोस्ती इस कदर थी कि रोजी-रोटी की दिक्कत जब गांव में पेश आने लगी तब दोनों एक साथ ही अपने-अपने गांव से परिवारों को लेकर दिल्ली आ गए थे।

दिल्ली आने पर रफीक अपने अनुभव के आधार पर साइकिल रिपेयरिंग का काम शुरू किया तो उसका दोस्त रहमान ई- रिक्शा चलाकर अपने परिवार का पेट पालता था। दोनों पड़ोस में रहते थे और दोनों का एक दूसरे के घर अक्सर आना-जाना था। ईद हो या मोहर्रम दोनों परिवार एक साथ मिलकर ही त्योहार मनाते थे। इनमें रफीक के परिवार में उसकी पत्नी नूरजहां तथा दो छोटी -छोटी बच्चियां थी। वही रहमान के परिवार में उसकी पत्नी फातिमा, एक जवान बेटी जीनत तथा दो अन्य छोटे -छोटे बच्चे।

रफीक अपने दोस्त रहमान के घर के समीप ही साइकिल रिपेयरिंग की दुकान चलाता था जबकि उसका दोस्त दिन भर सवारियों को उनकी मंजिल तक पहुंचा कर कमाता था।

वक्त बीतता गया लेकिन रहमान और रफीक में कभी किसी बात पर कोई लड़ाई -झगड़ा नहीं हुई। दोनों एक दूसरे के परिवार का भी ख्याल खूब रखते थे। यदि कभी रहमान के बच्चे की तबीयत खराब हो जाती तो रफीक रात -रात भर जागकर उसकी सेवा करता, वहीं रफीक के बच्चियों के बीमार होने पर रहमान काम धंधा छोड़ दोस्त की मदद में जुट जाता। रफीक कई बार तो अपने दोस्त के अनुपस्थिति में उसके घर ही घंटों पड़ा रहता था। इस दौरान वह रहमान की बीवी यानी भाभी फातिमा से खूब गप्पे मारता था। उस दौरान रफीक का खाना -पीना वही होता था और फातिमा रफीक की खूब आदर- सत्कार करती।

तीखे नैन नक्श वाली जीनत रफीक को अंकल पुकारती और रफीक भी उसे बहुत स्नेह देता था। एक दिन की बात है, सुबह से तेज बारिश हो रही थी। रहमान उस दिन चाह कर भी ई-रिक्शा कमाने के लिए नहीं निकाल पाया लेकिन उसका दोस्त रफीक दुकान खोलने के बहाने उसके घर आ धमका। रफीक को भीगते देख रहमान ने पूछा भाई रफीक क्यों बारिश में अपनी जान देने पर तुले हो, देखो तो मुझे, मैं तो आज बारिश की वजह से काम पर जा नहीं पाया। यह सुनकर रफीक सक पकाते हुए बोला भाई तेरे से मिलने थोड़े ही आया हूं । मैं तो भाभी फातिमा और जीनत को गिफ्ट देने आया हूं। दोस्त की बात सुनकर रहमान को आश्चर्य हुआ! वह बोल पड़ा दोस्ती तो तेरी मुझसे है, लेकिन हम लोगों में गिफ्ट का चलन कहां है? वैसे भी मुझे तो आज तक तो कोई गिफ्ट नहीं दिया फिर मेरी पत्नी और बेटी के लिए क्या गिफ्ट लाया है?

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यह सुनते ही रफीक घबरा गया। उसने स्थिति को संभालते हुए  बोला अरे ऐसा कुछ नहीं है भाई क्यों मुझ पर शक कर रहे है? उसके बाद वह दुकान खोलने चला गया लेकिन रहमान को दाल में कुछ काला नजर आया। वह अपना शक मिटाने के लिए कुछ देर बाद बारिश की धीमी रफ्तार होते ही वहां से चला तो गया, लेकिन कुछ देर बाद फिर घर वापस आ गया। घर के बाहर खड़े रहमान ने पाया कि रफीक की दुकान तो खुली है लेकिन वह दुकान से नदारद है। उसके मन में रफीक के प्रति कुछ शक हुआ और वह धीरे-धीरे कदमों से जब कमरे में घुसा तो पाया रफीक पलंग पर बैठे फातिमा से गप्पे मार रहा है और जीनत भी पास में खड़ी है।

रहमान वहां पहुंचते ही जोर से चिल्लाते हुए रफीक से पूछा अब समझ में आया तुम बारिश में भी क्यों दुकान खोलने आते हो ? तुम मेरी अनुपस्थिति में पत्नी और बेटी के साथ क्या गुल खिला रहे हो? इतना सुनना था कि रफीक आग बबूला हो गया और वह भी जोर-जोर से चिल्लाते हुए रहमान पर  ताने कसने लगा। इतना सुनना था कि रहमान बाहर से लाठी उठा ले आया और रफीक पर हमला कर दिया। दोनों में काफी देर तक बहस, कहासुनी और मारपीट होती रही। लेकिन भला हो पड़ोसियों का जिन्होंने शोरगुल सुनकर दोनों के बीच हो रही लड़ाई को शांत करा दिया।

इस घटना के बाद रहमान ने फातिमा को खबरदार कर दिया कि आगे से रफीक इस घर में नहीं आना चाहिए। उसने फातिमा को खूब खरी-खोटी सुनाई। उधर ,फातिमा परेशान थी कि अपने पति का गुस्सा  कैसे शांत करे। इस वजह से उसने भी बिना कोई देरी किए हामी भर दी, लेकिन वहीं खड़ी जीनत गुमसुम तथा उदास थी । उसने हकलाते हुए अपने अब्बू को बताया कि आपने ठीक किया। रफीक अंकल अब यहां नहीं आना चाहिए। रफीक अंकल गंदे हैं। वह मुझे न केवल गलत ढंग से छूते हैं, बल्कि पीछा भी करते हैं। वह जब भी स्कूल जाती है तब रफीक अंकल पीछा करते हैं। इस दौरान वह उसे चॉकलेट या कोई अन्य गिफ्ट भी देते हैं। अपने घर में भी पहुंचकर वह मुझे छूने की कोशिश करते हैं। यह सारी बात मैंने अम्मी को भी बताई है, लेकिन उन्होंने कुछ नहीं किया।

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बेटी की बात सुनकर रहमान अवाक रह गया! उसे बहुत गुस्सा आ रहा था। उसने दोबारा से फातिमा को खूब खरी-खोटी सुनाई। रहमान का मन कर रहा था कि अभी रफीक के घर पहुंच कर उसके होश ठिकाने लगा दे, लेकिन उस समय उसने मन मसोसकर रह जाना ही मुनासिब समझा।

अगले दिन रहमान काम पर भी नहीं गया और दिन भर बेचैन होकर कमरे में इधर-उधर चक्कार काटता रहा। इस दौरान उसने ना कुछ खाया और ना ही पीया। वह अपनी पत्नी और बच्चों से भी बात नहीं कर रहा था। कुछ देर बाद शाम ढल आई थी। रहमान के घर में फातिमा रोटी पका रही थी और रहमान पलंग पर लेटे लेटे कुछ सोच रहा था। उसकी तंद्रा तब टूटी जब जीनत कमरे में आकर रहमान से बोली, अब्बू अब तो रोटी खा लो। आपने दिनभर कुछ नहीं खाया है। बेटी की बात सुनकर रहमान किसी तरह दो निवाले खाया और यह कह कर थाली को लौटा दिया कि उसे अब भूख नहीं है। कुछ देर बाद रात हो आई थी।

फातिमा और उसके तीनों बच्चे अलग कमरे में सो रहे थे। इस दौरान रहमान चुपके से अपने कमरे से बाहर निकल आया। वह कुछ देर तक अपने घर के दरवाजे पर इधर-उधर घूम कर वक्त बिताया फिर चहल कदमी करते हुए आगे बढ़ने लगा। कुछ ही देर में रहमान अपने दोस्त रफीक के घर के आगे मौजूद था। उसने इधर उधर देखा और फिर दीवार फांद कर उस कमरे तक पहुंच गया। जहां रफीक पत्नी नूरजहां के साथ सो रहा था।

बगल में ही उसकी दोनों बच्चियां सोती दिखाई पड़ी। बदले की आग में जल रहा रहमान ने अचानक रफीक पर मीट काटने वाले चाकू से हमला बोल दिया। रफीक कुछ बोल पाता उससे पहले ही रहमान ने उस पर अनगिनत वार कर उसे मौत के घाट उतार दिया। इस बीच जैसे ही रफीक के मुंह से चीख निकली तो उसकी पत्नी नूरजहां घबराकर पलंग पर बैठ गई। लेकिन वह कुछ समझ पाती उससे पहले ही रहमान ने उस पर भी ताबड़तोड़ चाकू से हमला कर दिया। उस बेचारी की तो चीख भी नहीं निकल पाई। नूरजहां को रहमान ने सदा के लिए मौत के आगोश में सुला दिया।

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इसके बाद रहमान जल्दी-जल्दी तेज कदमों से अपने घर की तरफ चला आया और इस दौरान वह लगातार बुदबुदा रहा था, ‘ए खुदा ऐसा दोस्त कभी किसी को मत देना। जो अपने ही दोस्त की बीवी और बेटी की इज्जत से खेल रहा हो। ठीक किया साले को मार दिया… और उसकी बीवी नूरजहां यह तो बिल्कुल निकम्मी औरत थी ।  रफीक पर उसका बिल्कुल ध्यान नहीं था।’

उसे दुख भी हो रहा था कि बचपन के दोस्त को उसने मार दिया। फिर आत्मग्लानि से उसका गला भर आया था ।  कुछ देर बाद अपने घर पहुंचे रहमान ने अचानक एक फैसला लिया। और वह फैसला था खुद की जिंदगी समाप्त करने का। वह भागकर स्टोर रूम में गया और गेहूं के कनस्तर में छिपाकर रखे गए सल्फास ले आया फिर बाद में उसने सल्फास खा ली । इसके बाद वह जोर-जोर से उल्टियां करने लगा।

अपने अब्बू को तड़पती आवाज सुनकर जीनत की आंख खुल गई और वह भागकर उसके कमरे में पहुंची। पिता की हालत देख जीनत जोर जोर से चिल्लाने लगी। उसकी आवाज सुनकर फातिमा तथा कुछ पड़ोसी भी मौके पर पहुंचे, जिन्होंने मामले की सूचना पुलिस को दी। मौके पर पहुंची पुलिस को रहमान ने बयान दिया कि उसने अपने दोस्त रफीक और उसकी बीवी नूरजहां का कत्ल कर दिया है और बाद में आत्मग्लानि के चलते जहर खा लिया। पुलिस ने उसके बयान को रिकॉर्ड किया। कुछ देर बाद ही रहमान की मौत हो गई।

उसकी बेटी जीनत ने भी पुलिस को बताया कि रफीक अंकल अच्छे नहीं थे। वह उसका पीछा करते थे। उसे छूने की कोशिश करते थे और मना करने पर मारते पीटते थे। उसे अपने पिता की मौत पर बड़ा अफसोस है।  रफीक अंकल यदि सही आदमी होते तो इस तरह की घटनाएं नहीं होती।                         

नोट:- दोनों हत्याएं तथा खुदकुशी का यह मामला आउटर नॉर्थ दिल्ली का है। पात्रों के नाम बदल दिए गए हैं ।

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Archana Kumari

Archana Kumari

राजधानी दिल्ली में लंबे समय तक अपराध संवाददाता के रूप में कार्य का अनुभव। अर्चना विभिन्न समाचार पत्रों तथा न्यूज़ चैनल में काम कर चुकी हैं। फिलहाल स्वतंत्र पत्रकारिता।

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