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हाईकोर्ट के आदेश पर भी नहीं तोडा दाऊद का घर और कंगना के सपनों पर बुलडोजर

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मुंबई में कंगना रनौत की 48 करोड़ की कीमत की प्रापर्टी पर बृहन्मुंबई महानगरपालिका ने बुलडोजर चलवा दिया। आश्चर्य है कि कंगना को ये प्रॉपर्टी शरद पवार ने अपने मित्र से दिलवाई थी और इसका निर्माण भी कानून सम्मत किया गया था। बृहन्मुंबई महानगरपालिका की मुस्तैदी देखकर अब लोग पूछने लगे हैं कि मुंबई में खड़े हज़ारों अवैध निर्माणों पर इनकी मुस्तैदी कहाँ चली जाती है।

सत्तर से अस्सी के दशक में मुंबई में सक्रिय दाऊद गैंग ने सरकारों से घालमेल कर अवैध निर्माण किये थे। दाऊद और उसके गुर्गों की वह अवैध सम्पत्तियाँ आज भी शान से सिर  उठाए खड़ी हैं। उद्धव ठाकरे और संजय राउत के चश्मे कंगना रनौत के वैध निर्माण देख पाते हैं लेकिन दाऊद एंड कंपनी के साम्राज्य को छूने में उनकी सरकार डरती है।

मोदी सरकार आने के बाद देशभर में दाऊद इब्राहिम की सम्पत्तियाँ जब्त कर नीलाम की जाने लगी। इनमे से कई सम्पत्तियाँ सैफी बुरहानी अपलिफ्टमेंट ट्रस्ट ने नीलामी में खरीद ली थी। हालांकि ट्रस्ट दाऊद का वह घर नहीं खरीद सका, जिसमे वह भारत छोड़कर भाग जाने से पहले रहा करता था।

ये घर भी अवैध निर्माण के तहत ही आता है लेकिन ट्रस्ट द्वारा बोली के लिए अपील करने के बाद अवैध निर्माण का तथ्य पीछे कहीं छुप गया। देखा जाए तो अवैध निर्माणों को नीलाम करने के बजाय ध्वस्त करना ही ठीक होता है क्योंकि दाऊद के रिश्तेदार सम्पत्तियों को वापस लेने के लिए क़ानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं।

मुंबई के भेंडी बाज़ार में हाजी इस्माइल हाज़ी हबीब मुसाफ़िरख़ाना नाम से एक बिल्डिंग है। यही वह बिल्डिंग है, जो दाऊद के कलंक के रूप में कई वर्ष से अवैध रूप से खड़ी हुई है।

कंगना रनौत का ऑफिस एक दिन में तोड़ देने वाली बृहन्मुंबई महानगरपालिका के पास एक वर्ष पूर्व से दाऊद का ये घर गिराने का हाईकोर्ट का आदेश है लेकिन उसे आज तक भेंडी बाजार में खड़ा ये अवैध निर्माण नहीं दिखाई दिया। जब सैफी बुरहानी अपलिफ्टमेंट ट्रस्ट ने दाऊद का ये घर खरीदना चाहा तो वहां  रहने वाले न्यायालय चले गए।

11 दिसंबर 2019 को बॉम्बे हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि दाऊद इब्राहिम का ये घर गिरा दिया जाए। आज एक वर्ष होने आ रहा है लेकिन उद्धव सरकार ने दाऊद का घर तोड़ने की हिम्मत नहीं दिखाई। जब हाईकोर्ट ने दाऊद के घर को न गिराए जाने का कारण उद्धव सरकार से पूछा तो सरकार ने कोरोना का हवाला दिया था और आश्चर्य कि कंगना रनौत का ऑफिस तोड़ने में कोरोना आड़े नहीं आया

पिछले वर्ष ही म्हाडा मुंबई मधु चव्हाण ने बड़ा खुलासा करते हुए बताया था कि डी-कंपनी की छत्रछाया में सत्तर से अस्सी के दशक में दक्षिण मुंबई में सैकड़ों अवैध निर्माण किये गए थे। सबसे खतरनाक बात ये है कि इन अवैध निर्माणों का लेखा-जोखा म्हाडा और बीएमसी के पास नहीं है।

उद्धव सरकार को ये भी मालूम है कि इन अवैध निर्माणों को आसानी से पानी-बिजली के कनेक्शन मिल जाते हैं। इन अवैध निर्माणों में रहने वाले लोग बिजली का वैध बिल भरते हैं। ये महानगर मुंबई के लिए किसी मज़ाक से कम नहीं है।

कंगना का ऑफिस तोड़ दिया गया लेकिन उनके ऑफिस से लगा हुआ मनीष मल्होत्रा का ऑफिस बीएमसी ने छोड़ दिया। मनीष मल्होत्रा बॉलीवुड के ख्यात ड्रेस डिजाइनर हैं। मनीष मल्होत्रा ने बहुत वर्ष पहले खुलासा किया था कि वे फिल्म निर्माता करण जौहर के साथ समलैंगिक रिश्ते में थे।

मनीष के बॉलीवुड के प्रभावी लोगों से बहुत प्रगाढ़ संबंध हैं। शायद इन्हीं संबंधों की खातिर बीएमसी ने मनीष मल्होत्रा के ऑफिस पर बुलडोजर नहीं चलाया। शायद इन्हीं संबंधों की ख़ातिर दाऊद का घर आज भी भेंडी बाजार में शान से खड़ा है। शायद इन्हीं संबंधों की ख़ातिर कंगना रनौत का ‘मणिकर्णिका फिल्म्स का ऑफिस ध्वस्त कर दिया गया।

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Vipul Rege

पत्रकार/ लेखक/ फिल्म समीक्षक पिछले पंद्रह साल से पत्रकारिता और लेखन के क्षेत्र में सक्रिय। दैनिक भास्कर, नईदुनिया, पत्रिका, स्वदेश में बतौर पत्रकार सेवाएं दी। सामाजिक सरोकार के अभियानों को अंजाम दिया। पर्यावरण और पानी के लिए रचनात्मक कार्य किए। सन 2007 से फिल्म समीक्षक के रूप में भी सेवाएं दी है। वर्तमान में पुस्तक लेखन, फिल्म समीक्षक और सोशल मीडिया लेखक के रूप में सक्रिय हैं।

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