Sandeep Deo:-मुख्यमंत्री रहते एकनाथ शिंदे ने ज्योतिष्मठ के शंकराचार्य जी के कहने पर गाय को राज्य-माता का दर्जा दिया था। उसके बाद शंकराचार्य जी ने हिंदुओं से खुलकर अपील की थी कि वह महाराष्ट्र में महायुति को ही वोट करें। इसका परिणाम यह हुआ कि हिंदुओं ने खुलकर भाजपा-शिंदे गुट को वोट किया था।
लेकिन एक सच जो मीडिया ने नहीं बताई, वह यह कि भाजपा शिंदे द्वारा गाय को राज्य-माता का दर्जा दिए जाने से खुश नहीं थी। राज्य के दो बड़े नौकरशाह ने इसमें अड़चन डाल कर इसे रोकने का प्रयास किया, लेकिन शिंदे नहीं माने और अध्यादेश ले आए।
अंदर ही अंदर भाजपा शिंदे के इस कदम से नाराज थी। हालांकि ऊपर से वह इसके समर्थन में दिखने का प्रयास तो कर रही थी, लेकिन अपनी ही सरकार के इस कदम का खुलकर समर्थन नहीं किया था।
बाद में भाजपा की उत्तराखंड और राजस्थान की सरकार ने भी गाय को राज्य माता का दर्जा देने की ओर कदम बढ़ाया, लेकिन तथाकथित हिंदू पार्टी के आलाकमान ने इस पर रोक लगा दिया!
जो पार्टी बीफ एक्सपोर्टर से चंदा लेती हो, गो वंश मिथुन के मांस निर्यात के लिए कानून बनाती हो, पिंक रिवोल्यूशन को बढ़ाते हुए बीफ एक्सपोर्ट में भारत को अव्वल बनाती हो और जो अनुच्छेद-370 हटाने की आड़ में जम्मू-कश्मीर से रणबीर पीनल कोड हटाकर वहां गो हत्या को कानूनी बनाती हो, वह गाय को राज्य माता का दर्जा देना कैसे स्वीकार कर सकती है भला?
उसी वक्त पता चल गया था कि चुनाव बाद शिंदे को साइड किया जाएगा और आज आखिर यही हुआ। मैंने बहुत पहले बकायदा वीडियो में इसे समझाया भी था कि शिंदे ने कैसे गाय को राज्य माता का दर्जा देकर भाजपा के आला कमान को नाराज कर दिया है!
