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Delhi riots Chargesheet-20: रवीश कुमार का प्रिय प्रोफेसर अपूर्वानंद निकला दिल्ली दंगे का ‘अब्बा’!

आए दिन आप NDTV में रवीश कुमार के ‘प्राइम टाइम’ मेंं दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर अपूर्वानंद को भारत, हिंदू और मोदी सरकार के खिलाफ नफरत उगलते देखते होंगे! दिल्ली पुलिस की जांच में वही अपूर्वानंद हिंदुओं के खिलाफ हुए दिल्ली दंगे के प्रमुख मास्टरमाइंड में से एक निकला। इसे दंगे का एक अन्य मास्टर माइंड उमर खालिद ‘अब्बा’ बुलाता था!

दिल्ली दंगे के मामले को लेकर जिस महिला गुलफिशा उर्फ गुल को पकड़ा गया था, उसने डीयू के प्रोफेसर और घनघोर कम्युनिस्ट प्रोफेसर अपूर्वानंद पर कई सनसनीखेज आरोप लगाए हैं। गुलफिशा उर्फ गुल ने पुलिस को दिए बयान में आरोप लगाया कि दिल्ली विश्वविद्यालय के Prof Apoorvanand ने दंगों की साजिश रची थी। दंगों के लिए बुर्के वाली महिलाओं की टीम तैयार करने का आइडिया उन्हीं का था। गुलफिशा के मुताबिक, प्रोफेसर अपूर्वानंद ने कहा था कि दंगों के लिए तैयार रहो।

UAPA Act में गिरफ्तार गुलफिशा का कहना है कि अपूर्वानंद दिल्ली दंगे की साजिश रचने वाले प्रमुख लोगों में से थे। उन्होंने कहा था कि दंगे के बाद पकड़े जाने पर मेरा और ‘पिंजरा तोड़’ ग्रुप से जुड़ी लड़कियों के नाम का खुलासा बिल्कुल मत करना जबकि उन्होंने हिंसा भड़काने में प्रमुख भूमिका निभाई थी।

गुलफिशा के मुताबिक DU के ‘पिंजड़ा तोड़’ ग्रुप की सदस्य देवांगना और परोमा राय से उसकी जान-पहचन हुई। इनके जरिये पिंजड़ा तोड़ ग्रुप को दिशा-निर्देश देने वाले डीयू के प्रोफेसर अपूर्वानंद और राहुल रॉय से मेरी मुलाकात हुई। राहुल रॉय के जरिये उमर खालिद से पहचान बढ़ी। दिसम्बर में प्रोफेसर अपूर्वानंद और राहुल रॉय ने हमें समझाया कि नागरिकता कानून की आड़ में हम सरकार के खिलाफ बगावत का माहौल बना सकते हैं और सरकार को घुटने पर ला सकते हैं, इसलिए हमें इसका विरोध करना है।

आरोप के मुताबिक प्रोफेसर अपूर्वानंद ने कहा कि जामिया कॉर्डिनेशन कमिटी (JCC) दिल्ली में 20-25 जगह पर आंदोलन शुरू कर करवा रही है। इस आंदोलन का मकसद भारत सरकार की छवि को मुस्लिम विरोधी साबित करना था। प्रोफेसर ने कहा कि यह तभी होगा जब हम प्रदर्शन की आड़ में दंगे करवाएंगे।

पुलिस के दावे के अनुसार डीयू के प्रोफेसर अपूर्वानंद भी पूर्व में दबोचे गए आप के निलंबित पार्षद ताहिर हुसैन, कांग्रेसी पूर्व पार्षद इशरत जहां, जेएनयू के छात्र सरजील इमाम तथा खालिद सैफी की तरह दिल्ली हिंसा की साजिश रचने वाली कोर टीम के हिस्सा थे। हालांकि पूछताछ के दौरान उन्होंने अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार किया था लेकिन दिल्ली दंगा को लेकर पकड़ी गई आरोपी महिला गुलफिशा उर्फ गुल जो कि जाफराबाद की रहने वाली है, उसनेे पुलिस को दिए बयान में यह खुलासा किया की प्रोफेसर अपूर्वानंद ने कहा था कि हिंसा की साजिश के लिए तैयार रहो। इसके लिए मर मिटाना होगा। इससे मोदी सरकार की छवि खराब होगी और हम लोगों को फायदा होगा।

आरोप के मुताबिक हिंसा करवाने के बाद प्रोफेसर अपूर्वानंद ने गुलफिशा की उसकी भूमिका को लेकर तारीफ भी की थी। गुलफिशा ने पुलिस को बताया कि हिंसा के बाद अपूर्वानंद ने उससे कहा था कि तुमने अच्छा काम किया है, लेकिन पकड़े जाने पर मेरा और ‘पिंजड़ा तोड़’ की लड़कियों का नाम मत लेना।

गुलफिशा के दावे को माने तो प्रदर्शन में शामिल रही बुर्के वाली महिलाओं को मिर्च पाउडर लाने के लिए कहा गया था ताकि विरोध प्रदर्शन रोकने की कोशिश पर इन्हें पुलिस पर फेंका जाए। गुलफिशा ने आगे बताया हिंसा के लिए दो वॉट्सऐप ग्रुप बनाए गए थे, जिनका नाम- ‘औरतों का इंकलाब’ और ‘वॉरियर’ था। इस ग्रुप से मुस्लिम समाज की बहुत भारी संख्या में महिलाएं जुड़ी हुई थी।

गुलफिशा को यह जिम्मेवारी दी गई थी कि साजिश के तहत वो खुद बुर्के वाली महिलाओं और बच्चों को साथ गली-गली जाकर CAA और NRC के खिलाफ इस कदर माहौल तैयार करे कि जिससे और अधिक संख्या में महिलाएं उनके आंदोलन से जुड़ सकें। इसके लिए वह कॉम की दुहाई देकर महिलाओं को भड़काती थी। जिसके बाद महिलाएं प्रदर्शन में आने के लिए तैयार हो जाती थीं। महिलाओं और बच्चों को प्रदर्शन में जोड़ने की वजह यह होती थी कि पुलिस महिलाओं और बच्चों को जबरन नहीं उठाएगी जैसे शाहीन बाग में हो रहा था।

उसने बताया कि JCC के साथ मिलकर सीलमपुर इलाके में 24 घण्टे के प्रदर्शन करने के लिए उसे जगह देखने के चयन की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। ‘पिंजड़ा तोड़’ ग्रुप की सदस्य देवांगना कलिता, नताशा नारवाल और परोमा रॉय आदि की मदद से 5 जनवरी से सीलमपुर फ्रूट मंडी में प्रदर्शन शुरू किया गया। इस धरने को शुरू करने में गुड्डू चौधरी और तस्लीम अहमद ने साथ दिया।

गुलफिशा ने पुलिस को बताया कि फ्रूट मंडी सीलमपुर में प्रदर्शन शुरू होने के बाद जामिया कोऑर्डिनेशन कमिटी के सदस्य हमें हर तरह से मदद करते थे और सफूरा और मिरान हैदर हमारे और दूसरे प्रदर्शन को को-ऑर्डिनेट करते थे। इस दौरान उमर खालिद भी हमें पैसों से मदद करते थे और भीड़ को भड़काऊ भाषण देते थे, जिससे लोग धरने में जुड़े रहते थे।

गुलफिशा का कहना है कि प्रोफेसर अपूर्वानंद ने हमें हिंसा के लिए मैसेज दे दिया था, जिसके बाद हमने पत्थर, खाली बोतलें, एसिड, छुरियां इकठ्ठा करने और सभी महिलाओं को सूखी लाल मिर्च रखने के लिए बोला था।

पुलिस को दिए बयान में उसने बताया कि 22 फरवरी को चक्का जाम करने की साजिश के तहत महिलाओं को इकट्ठा कर कैंडल मार्च के बहाने हम निकले और जाफराबाद मेट्रो स्टेशन के नीचे बैठ गए और रोड ब्लॉक कर दिया। इसके बाद 24, 25, 26 फरवरी को जबरदस्त हिंसा हुई थी।

इस आरोपी के बयान में इस बात का भी जिक्र है कि
‘ट्रंप दौरे’ को ध्यान में रखते हुए देश को बदनाम किए जाने की सबने साजिश रची थी। चांद बाग रोड का भी ‘चक्का जाम’ वॉट्सएप पर पोस्ट किया गया और इसको भी प्रोफेसर अपूर्वानंद मॉनिटर कर रहे थे।

गौरतलब हो कि इसी तरह के आरोपों के चलते 4 अगस्त 2020 को दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल ने डीयू के प्रोफेसर अपूर्वानंद को पूछताछ के लिए बुलाया था और करीब 5 घंटे तक पूछताछ की थी। बाद में पुलिस ने प्रोफेसर का मोबाइल भी जांच के लिए जब्त कर लिया था।

जांच में यह भी सामने आया है कि प्रोफेसर अपूर्वानंद इस हिंसा के मास्टरमाइंड खालिद सैफी तथा उमर खालिद जैसों के साथ प्रमुख भूमिका में था। आरोपी महिला ने पुलिस से कहा “हम सीक्रेट जगह मीटिंग करते थे जिसमे प्रो.अपूर्वानंद, उमर खालिद आदि शामिल होते थे।उमर खालिद ने कहा उसके PFI, JCC से अच्छे सम्बंध हैं।पैसों की कमी नहीं है। हम मोदी सरकार को उखाड़ फेंकेगे। प्रो.अपूर्वानंद को उमर खालिद अब्बा मानता है।

पूछताछ के बाद कम्युनिस्ट माइंड-गेम खेलते हुए प्रोफेसर अपूर्वानंद ने अपने प्रिय लेफ्ट मीडिया में एक बयान भी जारी किया था ताकि दिल्ली पुलिस पर दबाव बनाया जा सके। उसने कहा था कि वह जांच में पूरा सहयोग कर रहा है। विरोध प्रदर्शन करना हर भारतीय का मौलिक अधिकार है। उसने दिल्ली पुलिस पर दबाव बनाने के लिए इस केस की सही तरीके से जांच करने जैसा शगूफा छोड़ा ताकि किसी बेगुनाह को कोई परेशानी ना हो, जबकि वह खुद मुस्लिम महिलाओं को दंगाई बनाने का दोषी है।

मूल तौर पर बिहार के सिवान के रहने वाले अपूर्वानंद डीयू में हिंदी पढ़ाने के साथ ही कई अखबारों और डिजिटल वेब पोर्टल के लिए लिखते हैं। इसके साथ ही टीवी खासकर NDTV पर रवीश कुमार के शो में राजनीतिक विश्लेषक के तौर पर भी बहस करते हुए नजर आते हैं।

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Archana Kumari

राजधानी दिल्ली में लंबे समय तक अपराध संवाददाता के रूप में कार्य का अनुभव। अर्चना विभिन्न समाचार पत्रों तथा न्यूज़ चैनल में काम कर चुकी हैं। फिलहाल स्वतंत्र पत्रकारिता।

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2 Comments

  1. PRABHAT KR RAI says:

    अपूर्वानंद जैसे देशद्रोही पर कठोरतम कार्यवाई होनी चाहिए जो कि देशद्रोहियो के लिए उदाहरण बने।

  2. Amitav Ratha says:

    This culprit used the cover of a gentle profession. He should be punished.

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