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Delhi riots chargesheet-21 गृहमंत्री अमित शाह सख्त! दिल्ली दंगों की साजिश का तार को खंगालने के लिए दिया और वक्त!

गृहमंत्री अमित शाह ने दिल्ली दंगे में शामिल आरोपियों के खिलाफ दिल्ली पुलिस को और भी पुख्ता सबूत जुटाने के लिए कहा है ताकि अदालत में सबूतों की कमी न पड़े। यही कारण है कि दिल्ली पुलिस आरोपियों के खिलाफ अब तक जुटाए सबूतों के अलावा अभी भी इनके लिंक के सारे ‘वायर’ को जोड़ने में समय ले रही है।

यह साफ हो चुका है कि किस तरह देश-विदेश से फंडिंग किए जाने के बाद राजधानी में प्लानिंग करके दंगे कराए गए थे। CAA-NRC का विरोध किए जाने के नाम पर दंगाइयों का मकसद पूरे भारत को दंगों में झोंकना था।

इस साजिश का तार सरहद पार से लेकर कई राजनीतिक पार्टियों, विश्वविद्यालय के प्रोफेसरों, एनजीओ से जुड़े हैं । इस हिंसा को लेकर कांग्रेस की पूर्व पार्षद इशरत जहां, आम आदमी पार्टी के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन और राष्ट्रीय जनता दल के दिल्ली युवा अध्यक्ष मीरान हैदर के पकड़े जाने के बाद बहुत हद तक इसकी पुष्टि हो चुकी है। लेकिन दिल्ली दंगे के ताना-बाना बुनने वाले और इस अपराधिक साजिश में शामिल बड़े चेहरे का खुलासा होना बाकी है।

वैसे लोग जो प्रत्यक्ष तौर पर दंगे के भड़काने में शामिल रहे हैं उन पर अन्य आरोपों के अलावा गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम कानून भी लगाया गया है। दिल्ली पुलिस का कहना है कि उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई इस हिंसा के मामले में गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम कानून (UAPA) के तहत गिरफ्तार हो चुके लगभग दस आरोपियों के खिलाफ जांच के लिए और वक्त की जरूरत है। आरोपियों की कुंडली खंगालने में गृहमंत्रालय से और अधिक समय दिए जाने से आरोपियों के मंसूबों तथा इनके तार कहां-कहां जुड़े हैं, इसका पता आसानी से लगाया जा सकता है। पुलिस ने इस बाबत अदालत से भी समय मांगा है, जिसे अदालत ने मंजूर कर लिया है। अदालत ने दस आरोपियों के खिलाफ जांच की अवधि 17 सितंबर तक बढ़ा दी है।                                        हमारा देश कई दशकों से आतंकवाद का डंस झेल रहा है और इसके चलते कई निर्दोष नागरिकों, पुलिसकर्मियों और सैनिकों के परिवार बिखर चुके हैं। यह दिगर बात है कि नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद देश में अपेक्षाकृत कम आतंकवादी घटनाएं हुई हैं। ऐसा इसलिए संभव हुआ क्योंकि आतंकी हिंसा को लेकर केंद्र सरकार जीरों टॉलरेंस की नीति पर चल रही है। दिल्ली दंगे को लेकर भी केंद्र सरकार का वही रुख है जिसके चलते दिल्ली पुलिस मामले की तह तक पड़ताल करना चाहती है।

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दिल्ली पुलिस का कहना है कि  दिल्ली दंगे को लेकर कई आरोपियों को या तो पकड़ा जा चुका है या फिर उन्हें दबोचने की प्रक्रिया चल रही है। हालांकि कई ऐसे भी आरोपी है जिन्होंने पर्दे के पीछे छुप कर हिंसा को भड़काने में मुख्य भूमिका अदा की है। उन्हें अब तक नहीं पकड़ा जा सका है। उनसे पूछताछ और जांच जारी है। अदालत ने जिन आरोपियों के खिलाफ जांच के लिए समय बढ़ाने का आदेश दिया है उनमें ‘पिंजरा तोड़’ संगठन की कार्यकर्ता देवांगन कलीता और नताशा नरवाल, आम आदमी पार्टी के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन, कांग्रेस पार्टी की पूर्व पार्षद इशरत जहां, खालिद सैफी, मीरान हैदर, गुलफिशा उर्फ गुल फातिमा, शफा उर रहमान, आसिफ इकबाल तान्हा और शादाब अहमद शामिल है।

कोर्ट में सुनवाई के दौरान आरोपियों की ओर से कहा गया कि उन्हें दिल्ली पुलिस की याचिका की प्रति नहीं मिली है, इसलिए वे लोग पुलिस की याचिका का जवाब देने की स्थिति में नहीं हैं जबकि दिल्ली पुलिस का कहना था कि इन आरोपियों के आपराधिक साजिश का खुलासा होना बाकी है, इस वजह से जांच के लिए और अधिक समय की मांग की गई।

इस पर अदालत ने दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले का जिक्र करते हुए कहा कि आरोपियों को याचिका की प्रति लेने औऱ उसका विरोध करने का कोई अधिकार नहीं है। अदालत ने यह भी कहा कि  क्योंकि आपराधिक साजिश का खुलासा होना बाकी है, इसलिए जांच की अवधि बढ़ाने और सभी आरोपियों को हिरासत में रखने की अवधि बढ़ाने की अनुमति दी जाती है। इसके बाद अदालत ने सभी आरोपियों की हिरासत भी 17 सितंबर तक बढ़ाने का आदेश दिया।

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आपको बता दूं कि इन आरोपियों के खिलाफ पहले भी जांच के लिए समय बढ़ाया जा चुका है। इस पर आरोपियों के वकील ने विरोध करते हुए कहा कि जांच के लिए 60 दिन का समय पहले ही बढ़ाया जा चुका है। इसलिए जांच के लिए अब और समय बढ़ाने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए लेकिन कोर्ट ने कहा कि यूएपीए की धारा 34 (डी) के तहत दूसरी बार भी 90 दिनों के लिए समय बढ़ाया जा सकता है।

दिल्ली पुलिस का कहना है कि बढ़ी अवधि के दौरान न केवल आपराधिक साजिश का पता लगाएगी बल्कि इस मामले से संबंधित आरोप पत्र भी अदालत में दाखिल कर देगी। दिल्ली पुलिस का कहना है कि यूएपीए एक्ट के दायरे में आए एक-एक आरोपी को आतंकी घोषित किया जा सकता है और उनकी चल अचल संपत्ति भी जप्त की जा सकती है। दबोचे गए आरोपियों ने हिंसा में शामिल होकर यह बताना चाहा कि उनको देश की कानून-व्यवस्था पर कोई भरोसा नहीं है। ऐसे आरोपियों के खिलाफ ही यूएपीए एक्ट लगाया गया है।

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Archana Kumari

Archana Kumari

राजधानी दिल्ली में लंबे समय तक अपराध संवाददाता के रूप में कार्य का अनुभव। अर्चना विभिन्न समाचार पत्रों तथा न्यूज़ चैनल में काम कर चुकी हैं। फिलहाल स्वतंत्र पत्रकारिता।

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