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केरल में विपदा के समय में भी दलितों को अपमानित करने और हिंदू रीतियों के खिलाफ घृणा फैलाने से बाज नहीं आ रहे ईसाई मिशनरीज!

केरल के अलापुझा जिले के पल्लिपाड ग्राम पंचायत स्थित एक स्कूल में चल रहे राहत शिविर में रहने वाले दलित परिवारों ने ईसाई समुदाय के खिलाफ अमानवीय व्यवहार और अपमानित करने का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन और जिला मजिस्ट्रेट से शिकायत की है। जिलाधिकारी एस सुहास ने जिला पुलिस अधीक्षक को इस मामले की जांच कर शीघ इसकी रिपोर्ट देने आदेश दिया है। वहीं ईसाई समुदाय के पादरियों ने राज्य में आई भयंकर बाढ़ के लिए हिंदू रीति रिवाजों को जिम्मेदार ठहराया है। प्राकृतिक आपदा के समय जहां दुश्मन भी एक दूसरे का साथ देते हैं, वहीं केरल में ईसाई समुदाय सांप्रदायिक दुश्मनी को और चौड़ा करने पर तुला है। एक तरफ जहां ईसाई समुदाय दलित हिंदू को अपमान करने का कोई भी मौका नहीं छोड़ता वहीं बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदा के लिए हिंदू रीति रिवाजों को दोषी ठहरा रहा है। समाज में इस प्रकार लोगों को अपमान करने के साथ धार्मिक घृणा फैला कर ईसाई पादरी अपना राजनीतिक हित साधने में लगा हुआ है।

मुख्य बिंदु

* दलित वाले राहत शिविर में भोजन और जगह शेयर करने से क्रिश्चियन समुदाय ने किया इनकार

* आहत दलित परिवारों ने प्रदेश के मुख्यमंत्री और जिलाधीश से क्रिश्चियनों के खिलाफ की शिकायत

मालूम हो कि केरल में अचानकोविल नदी में आई बाढ़ की वजह से वहां का एक गांव बुरी तरह प्रभावित हो गया। उस गांव के करीब 50 परिवारों को अंजिलिमूडु एलपी स्कूल में बनाए गए राहत शिविर में रखा गया। इनमें 23 दलित परिवार थे तथा 27 क्रिश्चियन परिवार थे। चूंकि राहत शिविर एक था इसलिए राहत सामग्री इकट्ठे दी गई। लेकिन क्रिश्चियन परिवारों ने दलित परिवारों के साथ न खाना चाहते थे और न ही रहना चाहते थे। उन लोगों ने अपनी खाद्य सामग्री दे देने को कहा। जबकि दलित परिवारों का कहना था कि इस दुख की घड़ी में सब साथ मिलकर रहेंगे और इसका सामना करेंगे। दलित परिवार के टीनू विजयन का कहना है कि चूंकि क्रिश्चियन समुदाय के लोग हिंदू दलितों से अंदर से घृणा करते हैं इसलिए ये लोग न तो उनके साथ अपना भोजन शेयर करना चाहते थे और न ही वह जगह जहां दलित परिवार रहते थे।

आखिर में उनलोगों ने दलित परिवारों पर अपनी लड़कियों की तस्वीर खीचने का आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ शिकायत दर्ज करवा दी। इसके बाद ही ग्राम पंचायत के अधिकारियों ने उन लोगों को किसी दूसरे राहत शिविर में शिफ्ट कर दिया है। वहीं इस घटना से आहत दलित परिवारों ने राज्य के मुख्यमंत्री तथा जिलाधीश से अमानवीय व्यवहार करने तथा अपमानित करने की शिकायत की है। जिलाधीश ने शीघ्र ही इस मामले की जांच करने का आदेश दिया है। हालांकि बाद में हिंदू ऐक्य वेदी के सदस्यों ने जिला उपाध्यक्ष श्रेयस एस नंपूंथरी के नेतृत्व में राहत शिविर का दौरा कर क्रिश्चियन समुदाय के इस कारनामे के विरोध में प्रदर्शन किया और दलित परिवारों के साथ ही भोजन भी किया।

क्रिश्चियन समुदाय सिर्फ दलित हिंदू विरोधी नहीं है बल्कि वह हिंदू रीति रिवाजों का मजाक उड़ाने से बाज नहीं आते। क्रिश्चियन पादरियों ने आरोप लगाया है कि केरल में बाढ़ आने के लिए लिए हिंदू रीति-रिवाज ही जिम्मेदार हैं। क्रिश्चियनिटी के प्रचारक ब्रो लैजोरस मोहन समाज में इस प्रकार के विष घोलने के लिए ही प्रसिद्ध है। बाढ़ की वजह से प्रदेश में मची तबाही के बाद अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि हिंदुओं के कुछ खास रिवाज ही बाढ़ के लिए जिम्मेदार हैं। इन्हीं की वजह से केरल में कई लोगों की जानें गई हैं और हजारों लोग बेघर हुए हैं। हालांकि लैजोरस मोहन का हिंदुओं को अपमानित करने के लिए इस प्रकार घृणा फैलाना ही एक मात्र एजेंडा है। यह इसलिए किया जा रहा है ताकि हिंदुओं के खिलाफ अपने नीहित स्वार्थ की पूर्ति के लिए ईसाइयों को एक किया जा सके और उससे राजनीतिक लाभ उठाया जा सके।

URL: Even in times of calamity in Kerala, Christians humiliate Dalits and spread hatred against Hindu customs

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